महासमुंद में 7 दिन बाद खत्म हुई छात्राओं की हड़ताल, चार अस्थाई शिक्षकों की व्यवस्था के बाद खुला जम्हारी स्कूल
महासमुंद: जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जम्हारी में शिक्षकों की कमी को लेकर पिछले 7 दिनों से चल रहा छात्राओं का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। प्रशासन की पहल के बाद गुरुवार 16 जुलाई को स्कूल का ताला खोल दिया गया और नियमित पढ़ाई फिर से शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
छात्राओं ने विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की मांग को लेकर स्कूल में तालाबंदी कर दी थी। उनका कहना था कि जब तक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, तब तक स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा। लंबे समय से पढ़ाई प्रभावित होने के कारण छात्राओं ने यह कदम उठाया था।
शिक्षकों की कमी से परेशान थीं छात्राएं
पूरा मामला महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जम्हारी का है। इस स्कूल में करीब 150 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई थी।
छात्राओं का कहना था कि विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खासकर कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि स्कूल में गणित, संस्कृत, अर्थशास्त्र, भूगोल, सामाजिक विज्ञान और राजनीति विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो पा रही थी।
स्कूल में केवल तीन शिक्षक होने से बढ़ी समस्या
जानकारी के अनुसार, 150 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में केवल तीन शिक्षक कार्यरत थे। विद्यार्थियों का कहना था कि इतने कम शिक्षकों के भरोसे सभी विषयों की पढ़ाई कराना संभव नहीं है।
छात्राओं ने अपनी समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्होंने स्कूल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। इसके बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा।
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद बनी व्यवस्था
छात्राओं की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर के निर्देश पर विद्यालय में अस्थाई शिक्षकों की व्यवस्था की गई।
प्रतिभा पब्लिक स्कूल से चार अस्थाई शिक्षकों को जम्हारी स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजा गया है। शाला अध्यक्ष मोहन कुमार के अनुसार, ये शिक्षक अगले चार महीने तक विद्यालय में सेवाएं देंगे। इसके बाद स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति होने की संभावना है।
प्रशासन के इस कदम के बाद छात्राओं ने अपना आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया और 16 जुलाई को स्कूल का ताला खोल दिया गया।
छात्राओं की मांग थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
आंदोलन कर रही छात्राओं का कहना था कि उनका उद्देश्य स्कूल बंद करना नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई को बेहतर बनाना था। उन्होंने कहा कि शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा था, इसलिए मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
छात्राओं ने प्रशासन से मांग की थी कि केवल अस्थाई व्यवस्था ही नहीं, बल्कि जल्द से जल्द स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।
चार महीने के लिए अस्थाई समाधान
फिलहाल प्रशासन ने अस्थाई शिक्षकों की व्यवस्था कर तत्काल समस्या का समाधान करने का प्रयास किया है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई को गति मिलेगी और उन्हें विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिल सकेगा।
हालांकि, विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर अब स्थाई शिक्षक नियुक्ति पर बनी हुई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक अस्थाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी और विद्यालय में सभी विषयों के नियमित शिक्षक होना जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
जम्हारी स्कूल की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के मुद्दे को फिर सामने ला दिया है। विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षा उनका अधिकार है और इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
फिलहाल छात्राओं के आंदोलन के बाद स्कूल में पढ़ाई दोबारा शुरू हो गई है, लेकिन स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति की मांग अभी भी बनी हुई है। आने वाले समय में प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
