Budhni में 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन, सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरे किसान
संवाददाता : विकास सैनी
रेहटी में किसानों ने किया जोरदार प्रदर्शन
Budhni/रेहटी: बुधनी विधानसभा क्षेत्र के रेहटी में किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन किया। 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में जिले के अलग-अलग गांवों से सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ रेहटी कृषि उपज मंडी पहुंचे।
सुबह से ही मंडी परिसर में किसानों की भीड़ जुटने लगी थी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ मंडी परिसर में एकत्रित हो गए। किसानों ने सभा आयोजित कर मूंग खरीदी व्यवस्था, फसल की बिक्री और किसानों के सामने आ रही समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की।
100 प्रतिशत मूंग खरीदी की उठाई मांग
आंदोलन कर रहे किसानों का मुख्य मुद्दा सरकार द्वारा मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करना था। किसानों का कहना है कि बड़ी मेहनत और लागत लगाकर उन्होंने मूंग की फसल तैयार की है, लेकिन खरीदी प्रक्रिया में सीमाएं और व्यवस्थागत समस्याओं के कारण कई किसान अपनी पूरी उपज बेच नहीं पा रहे हैं।
किसानों ने मांग की कि सरकार सभी पात्र किसानों की पूरी मूंग फसल की खरीदी करे, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े। किसानों का कहना है कि कृषि पूरी तरह मौसम और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर है, ऐसे में सरकार को किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए खरीदी व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।
किसानों ने कहा कि यदि उनकी पूरी उपज की खरीदी नहीं की गई तो इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की।
सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ निकली रैली
किसानों ने रेहटी नगर में पैदल और ट्रैक्टर रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ निकली इस रैली ने किसानों की एकजुटता को प्रदर्शित किया। रैली के दौरान किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
रैली के बाद किसानों ने कृषि उपज मंडी के सामने मुख्य मार्ग पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों के सड़क पर उतरने से करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन मौके पर पहुंचा, किसानों से की चर्चा
किसान आंदोलन की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन एसडीएम बुधनी को सौंपा।
ज्ञापन में किसानों ने 100 प्रतिशत मूंग खरीदी सुनिश्चित करने, खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाने की मांग प्रमुखता से रखी।
सरकार को दिया एक सप्ताह का अल्टीमेटम
ज्ञापन सौंपने के बाद किसानों ने सड़क जाम समाप्त कर दिया, लेकिन उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
किसानों ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करती है तो अगला आंदोलन राजधानी भोपाल में किया जाएगा। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि भोपाल में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सड़क जाम जैसे कदम उठाए जाएंगे।
किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि अपने अधिकारों और मेहनत की फसल का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए है।
किसान स्वराज संगठन ने संभाली आंदोलन की कमान
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व किसान स्वराज संगठन द्वारा किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं को लगातार उठाया जा रहा है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
संगठन ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार खरीदी व्यवस्था को प्रभावी बनाए। किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
किसानों ने कहा- मेहनत का पूरा हक चाहिए
आंदोलन में शामिल किसानों ने कहा कि उन्होंने पूरे सीजन मेहनत कर मूंग की फसल तैयार की है। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी लागत खर्च होती है। ऐसे में यदि पूरी फसल नहीं बिकती है तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
किसानों ने सरकार से आग्रह किया कि वह किसानों की वास्तविक स्थिति को समझते हुए जल्द निर्णय ले। उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल प्रशासन ने किसानों से प्राप्त ज्ञापन को शासन तक पहुंचाने की बात कही है। वहीं किसान संगठन सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहा है।
यदि तय समय सीमा में किसानों की मांगों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कितना प्रभाव डालता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
