अनूपपुर में हाथियों का दल पिछले 13 दिनों से वन क्षेत्र में डेरा जमाए हुए है। रेंजर स्वर्ण गौरव गांव-गांव गज चौपाल लगाकर ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के तरीके बता रहे हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
अनूपपुर में हाथियों का दल: 13 दिनों से जंगल में डेरा, रेंजर स्वर्ण गौरव की ‘गज चौपाल’ बनी सुरक्षा की मिसाल
रिपोर्ट: जिला ब्यूरो राजेश कुमार चौधरी | अनूपपुर
अनूपपुर में हाथियों का दल पिछले 13 दिनों से वन क्षेत्र में सक्रिय है। तीन हाथियों का यह दल लगातार अनूपपुर वन रेंज में घूम रहा है, जिससे आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि वन विभाग की सक्रिय निगरानी और रेंजर स्वर्ण गौरव की अनूठी ‘गज चौपाल’ पहल के कारण अब तक किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। ग्रामीणों को जागरूक करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के उद्देश्य से वन विभाग लगातार गांव-गांव पहुंचकर लोगों को सुरक्षा के उपाय समझा रहा है।
अनूपपुर में हाथियों का दल क्यों बना चिंता का विषय
अनूपपुर में हाथियों का दल पिछले 13 दिनों से वन क्षेत्र में लगातार बना हुआ है। तीन हाथियों का यह समूह भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में अलग-अलग हिस्सों में घूम रहा है। वन विभाग के अनुसार हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार का मानव-वन्यजीव संघर्ष न हो।वन विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
गज चौपाल क्या है?
ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए वन विभाग ने ‘गज चौपाल’ नाम से विशेष अभियान शुरू किया है।इस अभियान के तहत रेंजर स्वर्ण गौरव स्वयं गांवों में पहुंचकर पंचायत भवन, मंदिर और स्कूलों के आसपास ग्रामीणों को एकत्र करते हैं और हाथियों के व्यवहार, उनकी गतिविधियों तथा उनसे सुरक्षित रहने के उपाय सरल भाषा में समझाते हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है।
रेंजर स्वर्ण गौरव की अनूठी पहल
रेंजर स्वर्ण गौरव का कहना है कि केवल मुनादी या चेतावनी पर्याप्त नहीं होती। जब अधिकारी स्वयं गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करते हैं तो लोग अधिक गंभीरता से बात समझते हैं।उन्होंने बताया—
“13 दिन से हाथी इसी क्षेत्र में हैं। डराने से काम नहीं चलेगा। लोगों को समझाना होगा। इसलिए हर गांव में गज चौपाल लगाकर सीधे संवाद किया जा रहा है।”
उनकी यह पहल ग्रामीणों के बीच काफी सराही जा रही है।
गज चौपाल में दिए जा रहे सुरक्षा के 6 बड़े नियम
वन विभाग ग्रामीणों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियां बता रहा है—
1. हाथियों से कम से कम 200 मीटर दूरी रखें
किसी भी परिस्थिति में हाथियों के पास जाने का प्रयास न करें।
2. शाम 6 बजे के बाद अकेले बाहर न निकलें
जरूरत होने पर समूह में जाएं और टॉर्च साथ रखें।
3. फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश न करें
मोबाइल से हाथियों की फोटो या वीडियो लेने के लिए पास जाना बेहद खतरनाक हो सकता है।
4. शराब पीकर जंगल या खेतों में न जाएं
ऐसी स्थिति में खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
5. हाथी दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें
वन विभाग या हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत जानकारी दें।
6. पटाखे या तेज आवाज से हाथियों को न भगाएं
ऐसा करने पर हाथी आक्रामक हो सकते हैं और बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
वन विभाग की टीम कर रही 24 घंटे निगरानी
अनूपपुर में हाथियों का दल जहां-जहां पहुंच रहा है, वहां वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।टीम दिन और रात दोनों समय हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। उनके खाने, पीने और आराम करने वाले स्थानों की ट्रैकिंग की जा रही है। रात के समय हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर मोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।वन विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
ग्रामीणों ने की वन विभाग की सराहना
गांवों में आयोजित गज चौपाल के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की सराहना की।ग्रामीणों का कहना है कि पहले केवल मुनादी कर दी जाती थी, लेकिन इस बार अधिकारी स्वयं गांव पहुंचकर विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। इससे लोगों का डर कम हुआ है और वे अधिक सतर्क हुए हैं।
हाथी दिखने पर क्या करें?
यदि आपको अनूपपुर में हाथियों का दल दिखाई दे तो—
- घबराएं नहीं।
- सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- बच्चों को तुरंत घर के अंदर ले जाएं।
- भीड़ इकट्ठी न करें।
- सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने की कोशिश न करें।
- तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
निष्कर्ष
अनूपपुर में हाथियों का दल पिछले 13 दिनों से वन क्षेत्र में मौजूद है, लेकिन वन विभाग की सक्रियता और रेंजर स्वर्ण गौरव की गज चौपाल पहल के कारण अब तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। यह अभियान मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है। यदि ग्रामीण इसी प्रकार वन विभाग का सहयोग करते रहे तो भविष्य में भी ऐसी परिस्थितियों को आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा।
