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₹1000 की नौकरी से DSP पद तक का सफर: किसान परिवार के दो बेटों प्रकाश और सुरेंद्र गडरिया ने पेश की संघर्ष और सफलता की मिसाल

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Published On: 15 July 2026
Farmer’s two sons Prakash and Surendra Gadariya achieve DSP rank.
— Farmer’s two sons Prakash and Surendra Gadariya achieve DSP rank.

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₹1000 की नौकरी से DSP पद तक का सफर: किसान परिवार के दो बेटों प्रकाश और सुरेंद्र गडरिया ने पेश की संघर्ष और सफलता की मिसाल

संवाददाता: पवन धाकड़

साधारण किसान परिवार से निकलकर पुलिस विभाग में हासिल किया बड़ा मुकाम

जावरा। मेहनत, संघर्ष और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर इंसान किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। इस बात को सच साबित किया है अलीराजपुर जिले की जोबट तहसील के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले दो भाइयों ने। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने वाले प्रकाश गडरिया और सुरेंद्र गडरिया अब प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

रतलाम जिले में अपनी सेवाएं दे रहे दोनों पुलिस अधिकारियों का चयन उप पुलिस अधीक्षक (DSP) पद के लिए हुआ है। वर्तमान में प्रकाश गडरिया जावरा औद्योगिक थाना प्रभारी (TI) के रूप में पदस्थ हैं, जबकि उनके छोटे भाई सुरेंद्र गडरिया रावटी थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दोनों भाइयों की इस उपलब्धि से परिवार, गांव, क्षेत्र और पुलिस विभाग में खुशी का माहौल है।

एक किसान परिवार के दो बेटों का पुलिस विभाग के उच्च पद तक पहुंचना न केवल परिवार के लिए गौरव की बात है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सीमित सुविधाओं के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

सिर्फ ₹1000 वेतन से शुरू हुआ प्रकाश गडरिया का संघर्ष

प्रकाश गडरिया की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। वर्ष 1998 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मात्र ₹1000 मासिक वेतन पर गुरुजी (शिक्षक) के रूप में की थी। उस समय आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन मन में आगे बढ़ने का जज्बा और कुछ बड़ा हासिल करने का सपना था।

शिक्षक की नौकरी करते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (PSC) की तैयारी शुरू की। नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को साथ लेकर चलना आसान नहीं था, लेकिन प्रकाश ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

उन्होंने लगातार मेहनत की और PSC की परीक्षा में दो बार मुख्य परीक्षा तक पहुंचे। हालांकि दोनों प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन असफलताओं ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। उन्होंने हर बार अपनी कमियों को पहचाना और पहले से अधिक मेहनत के साथ तैयारी जारी रखी।

बिना कोचिंग और संसाधनों के हासिल की सफलता

आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जहां विद्यार्थी महंगी कोचिंग और आधुनिक सुविधाओं का सहारा लेते हैं, वहीं प्रकाश गडरिया ने सीमित संसाधनों में अपने सपने को पूरा करने का प्रयास किया।

आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने बिना किसी विशेष कोचिंग और बड़े मार्गदर्शन के अपनी तैयारी जारी रखी। कई बार परिस्थितियां उनके खिलाफ रहीं, लेकिन उन्होंने संघर्ष को अपनी ताकत बनाया।

जीवन के कठिन दौर में उन्हें पारिवारिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। कई चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उनका मानना था कि मेहनत और धैर्य के बल पर किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है।

उनकी इसी लगन और आत्मविश्वास का परिणाम रहा कि वर्ष 2006 में उनका चयन मध्यप्रदेश पुलिस में उप निरीक्षक (SI) के पद पर हुआ। वर्ष 2007 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें पहली पदस्थापना भोपाल में मिली।

ईमानदारी और जनसेवा से बनाई अलग पहचान

पुलिस विभाग में आने के बाद प्रकाश गडरिया ने अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। ईमानदारी, निष्पक्ष निर्णय और जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार के कारण वे एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में पहचाने जाने लगे।

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम लोगों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने पर भी ध्यान दिया।

उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने का अवसर दिया। वर्तमान में वे रतलाम जिले के जावरा औद्योगिक थाने में थाना प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

बड़े भाई से प्रेरणा लेकर सुरेंद्र गडरिया ने भी चुना सफलता का रास्ता

प्रकाश गडरिया की सफलता ने उनके छोटे भाई सुरेंद्र गडरिया को भी प्रेरित किया। उन्होंने भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का निर्णय लिया और पुलिस सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया।

प्रकाश ने अपने छोटे भाई का पूरा सहयोग किया। बताया जाता है कि वे सुरेंद्र को इंदौर से वापस गांव लेकर आए ताकि दोनों भाई साथ रहकर तैयारी कर सकें और अपने लक्ष्य पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकें।

दोनों भाइयों ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और कठिन मेहनत जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत सफल हुई और सुरेंद्र गडरिया का चयन भी मध्यप्रदेश पुलिस में उप निरीक्षक (SI) के पद पर हुआ।

सुरेंद्र गडरिया ने भी हासिल किया DSP बनने का सपना

पुलिस सेवा में आने के बाद सुरेंद्र गडरिया ने भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ निभाया। वर्तमान में वे रतलाम जिले के रावटी थाने में थाना प्रभारी (TI) के रूप में पदस्थ हैं।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर कार्य किया।

अब उनका चयन भी उप पुलिस अधीक्षक (DSP) पद के लिए हो गया है। इससे परिवार की खुशी दोगुनी हो गई है। बड़े भाई प्रकाश के बाद छोटे भाई सुरेंद्र ने भी अपनी मेहनत से सफलता का नया अध्याय लिखा है।

ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बनी दोनों भाइयों की कहानी

प्रकाश और सुरेंद्र गडरिया की सफलता यह संदेश देती है कि सफलता पाने के लिए केवल सुविधाएं ही जरूरी नहीं होतीं, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

एक छोटे किसान परिवार से निकलकर पुलिस विभाग के बड़े पद तक पहुंचने का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक परेशानियों या सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा समझ लेते हैं।

दोनों भाइयों ने साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रखी जाए तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में लंबे समय तक नहीं टिक सकती।

परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल

दोनों भाइयों के DSP पद पर चयन की खबर मिलते ही परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों, रिश्तेदारों और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।

किसान परिवार से आने वाले इन दोनों भाइयों ने अपनी मेहनत से न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

उनकी कहानी आज यह संदेश दे रही है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा हो, यदि मेहनत और विश्वास कायम रहे तो सफलता जरूर मिलती है।

प्रकाश गडरिया और सुरेंद्र गडरिया का सफर उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। ₹1000 की नौकरी से शुरू हुआ सफर अब DSP पद तक पहुंच चुका है और यह सफलता संघर्ष की एक शानदार मिसाल बन गई है।

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