नाबालिग से छेड़छाड़ की शिकायत: पीड़ित परिवार का आरोप—रोज दे रहे आवेदन, फिर भी नहीं हो रही सुनवाई
सिविल लाइन थाना क्षेत्र का मामला, पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
संवाददाता: घनेन्द्र सिंह बुन्देला
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई और शिकायत निवारण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बगौता निवासी एक पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपनी नाबालिग बेटी के साथ हुई कथित छेड़छाड़, अभद्रता और मारपीट की घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार का आरोप है कि घटना के बाद से वे लगातार अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
परिवार का कहना है कि न्याय की उम्मीद में वे कई दिनों से पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है। वहीं, आवेदन में कुछ पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
13 जुलाई की घटना को लेकर लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन के अनुसार, 13 जुलाई को उनकी नाबालिग बेटी के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की गई। परिवार का आरोप है कि घटना के दौरान बेटी के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और विरोध करने पर मारपीट भी हुई।
परिजनों का कहना है कि घटना से नाबालिग मानसिक रूप से बेहद आहत है। परिवार ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष द्वारा की गई इस हरकत के बाद उन्होंने तत्काल पुलिस की शरण ली, ताकि मामले में कानूनी कार्रवाई हो सके और बच्ची को न्याय मिल सके।
शिकायत लेकर थाने पहुंचे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज करने पर उठाए सवाल
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद वे सिविल लाइन थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया के दौरान उनकी बात को पूरी गंभीरता से नहीं सुना गया।
परिवार का दावा है कि उन्होंने जो तथ्य पुलिस को बताए थे, उन्हें रिपोर्ट में उसी स्वरूप में शामिल नहीं किया गया। उनका कहना है कि शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोपों को नजरअंदाज किया गया, जिससे मामले की वास्तविकता प्रभावित हो सकती है।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस से कई बार अनुरोध किया कि उनकी शिकायत को तथ्यों के अनुरूप दर्ज किया जाए, लेकिन उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
“लगातार आवेदन दे रहे हैं, फिर भी नहीं हो रही सुनवाई”
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद से वे लगातार विभिन्न अधिकारियों को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार उन्हें जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक मामले में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी।
परिवार के अनुसार, न्याय की उम्मीद में वे कई बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार आवेदन देने के बावजूद यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती है तो पीड़ित पक्ष का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।
पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी लगाए आरोप
पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में पीड़ित परिवार ने कुछ पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का कहना है कि थाने में उन्हें घंटों तक बैठाकर रखा गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
इतना ही नहीं, परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उन पर दबाव बनाकर कुछ बयान लिखवाने और हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया। इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है, लेकिन परिवार ने इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो घटना की वास्तविकता सामने आ जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई संभव होगी।
परिवार ने यह भी मांग की है कि केवल कथित आरोपियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि आवेदन में जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
नाबालिग से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता आवश्यक
नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों में कानून विशेष संवेदनशीलता बरतने की अपेक्षा करता है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के बाद समयबद्ध कार्रवाई, पीड़ित की सुरक्षा, गोपनीयता और निष्पक्ष जांच को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी परिवार को यह महसूस होता है कि उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो इससे न्याय प्रक्रिया पर विश्वास प्रभावित हो सकता है। इसलिए संबंधित एजेंसियों के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
परिवार ने सुरक्षा की भी जताई चिंता
पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले के बाद से वे मानसिक तनाव में हैं। उनका आरोप है कि उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा की है कि जांच पूरी होने तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।
पुलिस अधीक्षक से क्या मांग की गई?

पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में पीड़ित परिवार ने प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी हैं—
- नाबालिग के साथ कथित छेड़छाड़, अभद्रता और मारपीट के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उस पर भी कार्रवाई की जाए।
- आवेदन में जिन पुलिसकर्मियों पर अभद्र व्यवहार, धमकी देने तथा दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं, उनकी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए और उन्हें निष्पक्ष न्याय दिलाया जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
यह मामला अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत पर प्रशासन किस प्रकार की कार्रवाई करता है। यदि जांच के दौरान लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में अलग तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख रहा है और उन्हें उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का पक्ष आना शेष
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया था। पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोप उनके आवेदन पर आधारित हैं। समाचार पोर्टल किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।
यदि इस मामले में पुलिस प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने मामले का संतुलित और तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
