MP Weather Today: मध्य प्रदेश में छह दिन से थमी तेज बारिश, बढ़ने लगी गर्मी और उमस, सामान्य से 7% कम हुई बारिश
MP में मानसून की रफ्तार पर पिछले छह दिनों से ब्रेक लगा हुआ है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश का दौर थमने के बाद अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। जुलाई के मध्य में, जब आमतौर पर झमाझम बारिश होती है, तब प्रदेश के कई जिलों में तेज धूप, बढ़ता तापमान और उमस लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल अगले पांच दिनों तक प्रदेश में व्यापक या भारी बारिश की संभावना बेहद कम है। हल्की से मध्यम बारिश कुछ जिलों में हो सकती है, लेकिन मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत अभी कमजोर हैं।
मौसम में आए इस बदलाव का असर बारिश के आंकड़ों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 7 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ, तो बारिश की कमी और बढ़ सकती है, जिसका असर कृषि और जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है।
छह दिन से नहीं हुई तेज बारिश
जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई की शुरुआत में मध्य प्रदेश में मानसून ने अच्छी रफ्तार पकड़ी थी। कई जिलों में लगातार भारी बारिश हुई और नदियां-तालाब भरने लगे थे। लेकिन पिछले छह दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का दौर पूरी तरह थम गया है।
आसमान में बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वे अधिकांश स्थानों पर केवल बूंदाबांदी या हल्की फुहारों तक ही सीमित हैं। तेज बारिश नहीं होने के कारण दिन के समय धूप निकल रही है और तापमान लगातार बढ़ रहा है।
जुलाई में मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी
बारिश थमने के बाद प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। सामान्य तौर पर जुलाई के महीने में लगातार बारिश के कारण तापमान नियंत्रित रहता है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण लोगों को मार्च और अप्रैल जैसी गर्मी महसूस होने लगी है।
तेज धूप और अधिक नमी के कारण उमस भी काफी बढ़ गई है। सुबह से ही चिलचिलाती धूप लोगों को परेशान कर रही है, जबकि शाम के समय भी मौसम में राहत नहीं मिल रही। विशेष रूप से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और नर्मदापुरम जैसे शहरों में उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
सामान्य से 7 प्रतिशत कम हुई बारिश
MP मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 241.8 मिलीमीटर यानी लगभग 9.5 इंच बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि तक प्रदेश में सामान्य रूप से करीब 260 मिलीमीटर यानी 10.2 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। इस प्रकार राज्य में अब तक सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
बारिश में आई यह कमी जुलाई के मध्य तक चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि यही महीना पूरे मानसून सीजन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। प्रदेश की कुल मानसूनी वर्षा का बड़ा हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है।
पूर्वी MP में ज्यादा चिंता
बारिश की सबसे अधिक कमी पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग के जिलों में औसतन 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
यदि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में अच्छी वर्षा नहीं होती है, तो खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों की खेती बारिश पर काफी हद तक निर्भर रहती है।
पश्चिमी जिलों में भी घटा बारिश का आंकड़ा
MP के पश्चिमी हिस्से भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
हालांकि यहां स्थिति पूर्वी जिलों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन यदि मानसून की सुस्ती लंबे समय तक बनी रहती है, तो इन क्षेत्रों में भी बारिश की कमी बढ़ सकती है।
आज इन 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। जिन जिलों में बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है, उनमें—
- इंदौर
- उज्जैन
- रतलाम
- झाबुआ
- धार
- आलीराजपुर
- छिंदवाड़ा
- पांढुर्णा
- सिवनी
- मंडला
- बालाघाट
- डिंडौरी
- अनूपपुर
- उमरिया
- शहडोल
- सतना
- मैहर
- रीवा
- मऊगंज
- सीधी
- सिंगरौली
इन जिलों में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
इन जिलों में बढ़ेगा तापमान
दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर बना रहेगा। भोपाल सहित रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, जबलपुर, सागर, छतरपुर और टीकमगढ़ सहित कई जिलों में दिन का तापमान बढ़ने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश नहीं होती है, तो अधिकतम तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।
मानसून क्यों हुआ कमजोर?
MP मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल मानसून को सक्रिय करने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं। बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय नहीं होने के कारण मध्य प्रदेश तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है। यही वजह है कि बादल बनने के बावजूद प्रदेश में तेज बारिश नहीं हो रही।
यदि आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित होता है, तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश का दौर लौट सकता है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश में लगातार हो रही देरी से किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है। कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है और अब फसलों को नियमित बारिश की जरूरत है। यदि जल्द अच्छी वर्षा नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
अगले पांच दिन कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना बहुत कम है। कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर गर्मी और उमस का असर बना रहेगा। मौसम विभाग लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और यदि बंगाल की खाड़ी में नई मौसम प्रणाली सक्रिय होती है तो मानसून दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है।
फिलहाल मध्य प्रदेश के लोगों को तेज बारिश के लिए कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है।
