Kotma के सार्वजनिक तालाब पर कथित अतिक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता, नागरिकों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
संवाददाता: अभिषेक त्रिवेदी
सरस्वती स्कूल और मवेशी बाजार के समीप स्थित तालाब पर निर्माण गतिविधियों को लेकर उठे सवाल, प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा
Kotma । नगर के मध्य स्थित सार्वजनिक तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों को लेकर स्थानीय नागरिकों में चिंता और असंतोष का माहौल है। सरस्वती स्कूल तथा मवेशी बाजार के समीप, बस स्टैंड से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस जलस्रोत के आसपास हो रहे निर्माण कार्य को लेकर लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह तालाब वर्षों से नगर के प्रमुख जलस्रोतों में शामिल रहा है। वर्षा जल के संग्रहण, भूजल स्तर बनाए रखने तथा आसपास के पर्यावरणीय संतुलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में यदि सार्वजनिक भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति के निर्माण हो रहा है, तो यह भविष्य में जल संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
सार्वजनिक जलस्रोत के संरक्षण पर उठे सवाल
नगरवासियों का कहना है कि तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि शहर की प्राकृतिक धरोहर भी है। बरसात के दौरान यही जलस्रोत अतिरिक्त वर्षा जल को रोकने में सहायक होते हैं और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तालाबों के आसपास लगातार निर्माण और अतिक्रमण बढ़ते रहे तो आने वाले वर्षों में जल संकट और शहरी जलभराव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
निर्माण गतिविधियों को लेकर नागरिकों की आपत्ति
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि तालाब के आसपास निर्माण सामग्री रखकर पक्का निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि संबंधित भूमि सरकारी अभिलेखों में तालाब या सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में दर्ज है, तो किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
हालांकि, संबंधित निर्माण की वैधानिक स्थिति और भूमि अभिलेखों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इस संबंध में अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
Kotma नगर पालिका की भूमिका पर स्पष्टीकरण की मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका से मांग की है कि वह स्पष्ट करे कि संबंधित निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृतियां जारी की गई हैं या नहीं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण वैध है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
नगरवासियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों और जलस्रोतों की सुरक्षा स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई होने से भविष्य में बड़े विवादों और पर्यावरणीय नुकसान से बचा जा सकता है।
जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है तालाब
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों और कस्बों में स्थित पारंपरिक तालाब केवल जल संग्रहण के साधन नहीं होते, बल्कि वे भूजल स्तर बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और स्थानीय तापमान को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि ऐसे जलस्रोतों का क्षेत्रफल लगातार कम होता है, तो इसका सीधा प्रभाव भविष्य में जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसलिए इनका संरक्षण केवल प्रशासन ही नहीं बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
नागरिकों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की राजस्व एवं तकनीकी स्तर पर जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार का अतिक्रमण, नियमों का उल्लंघन या अवैध निर्माण सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और भविष्य में सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार के विवाद की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में नगर पालिका अथवा जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। संबंधित विभाग का पक्ष आने के बाद ही निर्माण कार्य की वैधता और लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा रखते हैं ताकि नगर का यह महत्वपूर्ण जलस्रोत सुरक्षित रह सके।
पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक हित का विषय
तालाबों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जलस्रोत सुरक्षित रहने से भूजल स्तर बेहतर रहता है, किसानों और आम नागरिकों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है तथा भविष्य में जल संकट की संभावना कम होती है।
इसी कारण स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो तत्काल कार्रवाई की जाए और सार्वजनिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
फिलहाल नगरवासियों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच रिपोर्ट और संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
