Damoh :में नवनिर्वाचित अधिवक्ता संघ पदाधिकारियों ने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर को दी श्रद्धांजलि, घंटाघर पर किया माल्यार्पण
रिपोर्ट: सोनू अठया | दमोह (मध्य प्रदेश)
नवनिर्वाचित अधिवक्ता संघ ने राष्ट्रपिता और संविधान निर्माता को किया नमन
दमोह, 14 जुलाई 2026।
जिला अधिवक्ता संघ दमोह के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मुकेश पांडे एवं नवगठित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने मंगलवार को शहर के ऐतिहासिक घंटाघर पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा भारत रत्न एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अधिवक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के विचारों, आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के सार्वजनिक अभिनंदन और सामाजिक दायित्वों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने का प्रतीक माना गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता इस अवसर पर उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।
घंटाघर पर आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम
मंगलवार सुबह जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मुकेश पांडे के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शहर के प्रमुख स्थल घंटाघर पहुंचा। यहां स्थापित महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्पमालाएं अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, न्यायिक प्रणाली और संविधान की मजबूती में इन दोनों महापुरुषों का योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज का दायित्व केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
महात्मा गांधी के आदर्शों को बताया आज भी प्रासंगिक
माल्यार्पण कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महात्मा गांधी के जीवन और उनके सिद्धांतों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, सेवा, नैतिकता और सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के समय था।
अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भी समाज में शांति, भाईचारे और न्यायपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए गांधीजी के विचारों को अपनाना आवश्यक है। सत्य और अहिंसा के सिद्धांत न्याय व्यवस्था की आत्मा हैं और प्रत्येक अधिवक्ता का दायित्व है कि वह इन मूल्यों को अपने व्यावसायिक जीवन में भी अपनाए।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान और सामाजिक न्याय के संदेश को किया याद
कार्यक्रम में संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान का भी विस्तार से उल्लेख किया गया। उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब ने देश को ऐसा संविधान दिया जिसने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, न्याय और स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान की।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समानता, विधि का शासन और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी मार्गदर्शक हैं। अधिवक्ताओं ने संविधान की गरिमा बनाए रखने और आम नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प लिया।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष मुकेश पांडे ने जताया आभार
जिला अधिवक्ता संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मुकेश पांडे ने इस अवसर पर अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिला अधिवक्ता संघ की गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान, उनके हितों की रक्षा और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ता समाज न्यायपालिका का महत्वपूर्ण स्तंभ है और प्रत्येक अधिवक्ता की जिम्मेदारी है कि वह संविधान और कानून की मर्यादा का पालन करते हुए समाज में न्याय की स्थापना में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
अधिवक्ताओं ने न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किलों के हितों की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि न्याय व्यवस्था और संविधान की गरिमा बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में प्रत्येक अधिवक्ता का कर्तव्य है कि वह निष्पक्षता, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे।
अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि भविष्य में जिला अधिवक्ता संघ सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगा, ताकि समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाई जा सके और लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों की जानकारी मिल सके।
अधिवक्ता हितों की रक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा और उनके पेशे से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार, युवा अधिवक्ताओं के मार्गदर्शन, विधिक प्रशिक्षण और पेशेवर विकास के लिए भी ठोस प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा जिला अधिवक्ता संघ के सभी सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के प्रति दिखाई प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांत प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज संविधान की रक्षा करने वाले प्रमुख वर्गों में शामिल है। इसलिए संविधान के प्रति निष्ठा और उसके मूल्यों का संरक्षण करना प्रत्येक अधिवक्ता का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।
सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन का भी लिया संकल्प
माल्यार्पण कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ताओं ने केवल न्यायिक दायित्वों तक सीमित रहने के बजाय समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर कानूनी जागरूकता शिविर, निःशुल्क विधिक परामर्श, सामाजिक सेवा कार्यक्रम तथा संविधान जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे, ताकि आम नागरिकों तक न्याय और कानून की सही जानकारी पहुंच सके।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की रही मौजूदगी

इस अवसर पर जिला अधिवक्ता संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मुकेश पांडे के साथ नवगठित कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, युवा अधिवक्ता एवं संघ के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी ने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की तथा संविधान, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया।
न्याय, संविधान और सेवा के प्रति समर्पण का संदेश
जिला अधिवक्ता संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल औपचारिक माल्यार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह न्याय, संविधान, सामाजिक समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बना। कार्यक्रम के माध्यम से अधिवक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने, अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा करने और समाज में संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते रहेंगे।
