आचार्य श्री समय सागर जी Bhopal चातुर्मास 2026 को लेकर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने इंदौर में श्रीफल अर्पित कर भोपाल में आगामी चातुर्मास आयोजित करने का निवेदन किया। प्रतिनिधिमंडल ने प्राकृत शोध संस्थान वैशाली के कार्यों पर भी चर्चा की।
इंदौर।
रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू
आचार्य श्री समय सागर जी Bhopal चातुर्मास 2026 को लेकर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए विहाररत परम पूज्य विद्या शिरोमणि नवाचार्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य में श्रीफल अर्पित कर वर्ष 2026 का आगामी चातुर्मास भोपाल में सम्पन्न कराने का विनम्र निवेदन किया। इस अवसर पर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने पूज्य आचार्यश्री का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त किया।राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर संघ के केंद्रीय संघ नायक श्री राकेश जी गोहिल, केंद्रीय संघ कोषाध्यक्ष श्री वीरेंद्र जी अजमेरा, भोपाल संघ नायक श्री जयदीप जी शास्त्री, शाखा संवाहक डॉ. मनोज जी सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
भोपाल चातुर्मास के लिए श्रीफल अर्पित
प्रतिनिधिमंडल ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को श्रीफल अर्पित करते हुए निवेदन किया कि वर्ष 2026 का चातुर्मास भोपाल में ही सम्पन्न हो। सभी सदस्यों ने यह भावना व्यक्त की कि पूज्य आचार्यश्री के पावन सान्निध्य से भोपाल सहित समूचे प्रदेश का जैन समाज धर्मलाभ प्राप्त करेगा तथा जिनशासन की प्रभावना को नई दिशा मिलेगी।प्रतिनिधिमंडल ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावनाएं रखते हुए आगामी वर्षायोग की सफलता एवं समाज के आध्यात्मिक उत्थान की मंगलकामना भी की।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे प्रमुख पदाधिकारी
इस अवसर पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ की ओर से—
- केंद्रीय संघ नायक श्री राकेश जी गोहिल
- केंद्रीय संघ कोषाध्यक्ष श्री वीरेंद्र जी अजमेरा
- भोपाल संघ नायक श्री जयदीप जी शास्त्री
- शाखा संवाहक डॉ. मनोज जी
- प्रचारक राजेश जैन दद्दू
सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।सभी ने पूज्य आचार्यश्री के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और भोपाल चातुर्मास की सफल आयोजना के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
आचार्य श्री समय सागर जी ने दिया धर्म एवं संयम का संदेश
इस अवसर पर पूज्य नवाचार्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने उपस्थित सभी सदस्यों को धर्म, संयम, आत्मकल्याण एवं जिनशासन की प्रभावना के लिए सदैव समर्पित भाव से कार्य करने का मंगल संदेश प्रदान किया।उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक उत्थान धर्म, सदाचार, अध्ययन एवं सेवा से ही संभव है। प्रत्येक श्रावक-श्राविका को जिनवाणी के प्रचार-प्रसार और समाज के संगठन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
आचार्यश्री ने संघ के सभी सदस्यों को अपने जीवन में संयम, अनुशासन, करुणा एवं सेवा को अपनाने का भी संदेश दिया।
प्राकृत शोध संस्थान, वैशाली के भावी कार्यों पर हुई चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने इस अवसर पर प्राकृत शोध संस्थान, वैशाली (बिहार) के भावी विकास, योजनाओं तथा शोध गतिविधियों के संबंध में भी पूज्य आचार्यश्री से विस्तृत चर्चा की।आचार्य श्री समय सागर जी ने प्राकृत भाषा, जैन आगमों के संरक्षण, अध्ययन एवं शोध कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और जैन दर्शन के संरक्षण के लिए शोध संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने संस्थान के माध्यम से युवा पीढ़ी को प्राकृत भाषा एवं जैन साहित्य से जोड़ने पर विशेष जोर देते हुए प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया।
जिनशासन की प्रभावना के लिए समर्पण का आह्वान
आचार्यश्री ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहकर जिनशासन की प्रभावना के कार्यों में अधिक सक्रिय होना चाहिए। धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सेवा एवं संस्कारों का विस्तार भी प्रत्येक श्रावक का दायित्व है।
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ द्वारा किए जा रहे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों की भी उन्होंने सराहना की तथा भविष्य में इसी समर्पण के साथ कार्य करते रहने का आशीर्वाद प्रदान किया।
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने जताई कृतज्ञता
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के पदाधिकारियों ने पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका सान्निध्य और मार्गदर्शन पूरे संघ के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है।
संघ ने यह भी प्रार्थना की कि आगामी वर्ष 2026 का चातुर्मास भोपाल में सम्पन्न हो, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को धर्मलाभ प्राप्त हो सके तथा जैन समाज में आध्यात्मिक जागृति का नया वातावरण निर्मित हो।
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक काल माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान आचार्य एवं साधु-संत एक ही स्थान पर विराजमान होकर धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, तप, आराधना एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से समाज को धर्ममार्ग पर अग्रसर करते हैं।
चातुर्मास के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक कार्यक्रमों, प्रवचनों, तप एवं विभिन्न आध्यात्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं। इसी कारण चातुर्मास का आयोजन किसी भी नगर के लिए अत्यंत गौरव एवं सौभाग्य का विषय माना जाता है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ द्वारा आचार्य श्री समय सागर जी Bhopal चातुर्मास 2026 के लिए श्रीफल अर्पित कर किया गया यह निवेदन जैन समाज की धार्मिक आस्था एवं संगठनात्मक एकता का प्रतीक है। संघ ने आशा व्यक्त की कि पूज्य आचार्यश्री के आशीर्वाद से आगामी चातुर्मास भोपाल में सम्पन्न होगा और समाज को आध्यात्मिक उन्नति का अमूल्य अवसर प्राप्त होगा।

