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E20 Petrol Controversy: नितिन गडकरी ने कहा- कार का माइलेज सही तरीके से आम लोग नहीं माप सकते, डीलर मशीन से ही होगी जांच

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Published On: 14 July 2026
E20 Petrol controversy: Nitin Gadkari explains fuel efficiency testing and mileage claims
— E20 Petrol controversy: Nitin Gadkari explains fuel efficiency testing and mileage claims

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E20 Petrol Controversy: नितिन गडकरी ने कहा- कार का माइलेज सही तरीके से आम लोग नहीं माप सकते, डीलर मशीन से ही होगी जांच

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बढ़ी बहस, माइलेज घटने के दावों पर सरकार का जवाब

नई दिल्ली। देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Petrol) की बिक्री अनिवार्य होने के बाद इसके फायदे और नुकसान को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। खासतौर पर वाहन मालिकों के बीच यह सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है कि क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कारों और दोपहिया वाहनों का माइलेज कम हो रहा है।

इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आम वाहन चालक अपनी गाड़ी के माइलेज की सटीक जांच नहीं कर सकता। माइलेज का सही आकलन करने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों के अधिकृत डीलरशिप पर उपलब्ध विशेष मशीनों की जरूरत होती है।

नितिन गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया और कई वाहन उपयोगकर्ताओं की ओर से E20 पेट्रोल के कारण माइलेज में कमी आने के दावे किए जा रहे हैं।

नितिन गडकरी ने माइलेज जांच के तरीके पर उठाए सवाल

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान नितिन गडकरी से E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद वाहनों के माइलेज में गिरावट को लेकर सवाल पूछा गया।

इंटरव्यू में पत्रकार ने अपनी कार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके पास वर्ष 2023 मॉडल की कार है, जो E20 ईंधन के लिए अनुकूल बताई गई थी। उन्होंने कहा कि पहले उनकी कार शहर में करीब 11 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 7 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है।

इस पर नितिन गडकरी ने पूछा कि उन्होंने माइलेज की जांच किस तरीके से की है। पत्रकार ने बताया कि उन्होंने कार के डैशबोर्ड पर दिखाई देने वाले माइलेज इंडिकेटर के आधार पर यह आंकड़ा बताया है।

इसके जवाब में गडकरी ने कहा कि केवल डैशबोर्ड पर दिखने वाले आंकड़े के आधार पर माइलेज की सही गणना नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि वाहन का वास्तविक माइलेज जानने के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर या डीलरशिप पर उपलब्ध मशीनों से जांच करनी होती है।

“आम व्यक्ति सही माइलेज नहीं माप सकता”: गडकरी

नितिन गडकरी ने कहा कि चाहे कोई आम वाहन मालिक हो या कोई अन्य व्यक्ति, बिना तकनीकी उपकरणों के वाहन के वास्तविक माइलेज का सही मूल्यांकन करना आसान नहीं है।

उन्होंने बताया कि वाहन कंपनियों के अधिकृत डीलर के पास ऐसी मशीनें उपलब्ध होती हैं, जिनसे वाहन की कार्यक्षमता, ईंधन खपत और माइलेज का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जा सकता है।

उनके अनुसार, केवल ड्राइविंग पैटर्न, ट्रैफिक की स्थिति, एयर कंडीशनर का उपयोग, सड़क की स्थिति और वाहन की देखभाल जैसी कई चीजें भी माइलेज को प्रभावित करती हैं।

इसलिए केवल ईंधन बदलने के आधार पर माइलेज में आई कमी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

सरकार ने भी माना था- कुछ वाहनों में कम हो सकता है माइलेज

हालांकि केंद्र सरकार ने भी यह स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता यानी फ्यूल इकोनॉमी में मामूली गिरावट आ सकती है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी एक दस्तावेज में बताया गया था कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का असर वाहन के इंजन और डिजाइन पर निर्भर करता है।

दस्तावेज के अनुसार, कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के कारण लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज में कमी देखी जा सकती है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल माइलेज के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। प्रदूषण में कमी, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होना और किसानों को लाभ जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

क्या है E20 पेट्रोल और क्यों लागू किया गया?

E20 पेट्रोल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।

एथेनॉल एक जैव ईंधन है जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।

भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य इसलिए रखा है ताकि:

  • पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम हो
  • विदेशी मुद्रा की बचत हो
  • किसानों को अतिरिक्त बाजार मिले
  • प्रदूषण में कमी लाई जा सके
  • देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिले

सरकार ने चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की योजना बनाई और अब देश में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है।

वाहन मालिक क्यों उठा रहे हैं सवाल?

E20 पेट्रोल लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव साझा किए हैं।

कई लोगों का दावा है कि E20 पेट्रोल डालने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज पहले की तुलना में कम हो गया है। कुछ लोगों ने इंजन पर इसके लंबे समय के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है।

वाहन विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसलिए अधिक मात्रा में एथेनॉल मिश्रण होने पर कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि आधुनिक वाहन, जिन्हें E20 के अनुरूप बनाया गया है, उनमें इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होने की संभावना रहती है।

पुराने और नए वाहनों पर अलग-अलग असर

E20 पेट्रोल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा पुराने वाहनों को लेकर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहन जिनके इंजन और ईंधन सिस्टम E20 के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, उनमें इसके प्रभाव अलग हो सकते हैं।

वहीं, नए वाहन जो E20 कंप्लायंट हैं, उनमें कंपनियों ने इंजन और अन्य हिस्सों को इस ईंधन के अनुसार तैयार किया है।

वाहन निर्माताओं ने भी समय-समय पर अपने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने वाहन के मॉडल के अनुसार ईंधन का इस्तेमाल करें।

माइलेज के अलावा इन कारणों से भी घट सकती है फ्यूल एफिशिएंसी

वाहन का माइलेज केवल पेट्रोल की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करता। कई अन्य कारण भी इसमें भूमिका निभाते हैं:

1. ट्रैफिक की स्थिति

शहरों में बार-बार ब्रेक लगाने और धीमी गति से चलने के कारण माइलेज कम हो सकता है।

2. ड्राइविंग स्टाइल

तेज एक्सीलेरेशन, अचानक ब्रेक लगाना और ज्यादा स्पीड पर वाहन चलाने से ईंधन की खपत बढ़ती है।

3. वाहन की सर्विसिंग

समय पर सर्विस न होने से इंजन की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

4. टायर प्रेशर

कम हवा वाले टायर इंजन पर ज्यादा दबाव डालते हैं और माइलेज घटा सकते हैं।

5. एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल

गर्म मौसम में एसी के अधिक उपयोग से भी ईंधन खपत बढ़ सकती है।

सोशल मीडिया पर E20 को लेकर बहस तेज

E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस चल रही है। कुछ लोग इसे पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ वाहन मालिक माइलेज और वाहन रखरखाव को लेकर चिंता जता रहे हैं।

हाल ही में कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए जिनमें वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के बाद माइलेज कम होने का दावा किया।

इन दावों के बीच सरकार का कहना है कि E20 के प्रभाव का वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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