MP Weather Today: मध्य प्रदेश में सुस्त पड़ा मानसून, पांच दिन से नहीं हुई तेज बारिश, सामान्य से नीचे पहुंचा वर्षा का आंकड़ा
MP में मानसून की रफ्तार पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में सक्रिय रहने वाला मानसून पिछले पांच दिनों से कमजोर पड़ा हुआ है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन झमाझम बारिश का इंतजार अभी भी जारी है। हल्की बारिश और बूंदाबांदी के कारण जुलाई में पहली बार प्रदेश का कुल वर्षा आंकड़ा सामान्य से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग तीन प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में वर्षा की कमी साफ दिखाई दे रही है।
पांच दिन से नहीं हुई कहीं भी भारी बारिश
पिछले पांच दिनों के दौरान प्रदेश के किसी भी जिले में भारी या अति भारी वर्षा दर्ज नहीं की गई। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और अन्य बड़े शहरों में बादल छाने के बावजूद तेज बारिश नहीं हुई। अधिकांश स्थानों पर केवल हल्की फुहारें या बूंदाबांदी देखने को मिली, जिससे गर्मी और उमस का असर भी बढ़ गया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं। इसी कारण प्रदेश में पर्याप्त नमी होने के बावजूद बारिश का सिलसिला थम गया है।
सामान्य से तीन प्रतिशत कम हुई बारिश
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक कुल 241.8 मिलीमीटर (करीब 9.5 इंच) वर्षा दर्ज की गई है। इस अवधि तक प्रदेश में सामान्य रूप से 250.1 मिलीमीटर (करीब 9.8 इंच) बारिश होनी चाहिए थी। इस प्रकार प्रदेश का कुल वर्षा आंकड़ा सामान्य से तीन प्रतिशत कम हो गया है।
जुलाई का महीना मानसून के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लगातार पांच दिनों तक तेज बारिश नहीं होने से मौसम वैज्ञानिकों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में ज्यादा कमजोर स्थिति
MP के पूर्वी हिस्से में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक कमजोर बनी हुई है। जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग में सामान्य से लगभग 17 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती हैं, इसलिए वर्षा की कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है।
वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भी सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। प्रदेश के आधे से अधिक जिले फिलहाल सामान्य से कम वर्षा वाले दायरे में शामिल हैं।
आज इन जिलों में हल्की बारिश के आसार
MP मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को प्रदेश के पूर्वी जिलों में मौसम कुछ सक्रिय रह सकता है। सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
इसके विपरीत भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और आसपास के अधिकांश जिलों में दिनभर तेज धूप निकलने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में फिलहाल भारी बारिश की संभावना बेहद कम बताई जा रही है।
क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाले प्रमुख मौसम तंत्र फिलहाल कमजोर पड़ चुके हैं या उनका प्रभाव प्रदेश से दूर चला गया है। यही वजह है कि बादल तो बन रहे हैं, लेकिन वे पर्याप्त वर्षा नहीं करा पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होता है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
इसके अलावा प्रशांत महासागर क्षेत्र में भी तीन नई मौसमी प्रणालियों के विकसित होने के संकेत मिल रहे हैं। यदि इनमें से कोई प्रणाली बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव मध्य प्रदेश के मानसून पर भी देखने को मिल सकता है।
जुलाई में बारिश कम होना चिंता का विषय
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई मध्य प्रदेश में मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। पूरे मानसून सीजन की लगभग 35 से 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। ऐसे में यदि जुलाई के मध्य तक पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो इसका असर पूरे मानसून के औसत पर पड़ सकता है।
भोपाल में सामान्य मानसूनी वर्षा लगभग 39 इंच मानी जाती है, जिसमें से करीब 14 इंच बारिश केवल जुलाई में होती है। वहीं जबलपुर में जुलाई के दौरान सामान्य वर्षा 17 इंच से अधिक रहती है। ऐसे में जुलाई के शुरुआती पखवाड़े में बारिश की कमी मौसम वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
देवास में सबसे ज्यादा, आलीराजपुर में सबसे कम बारिश
MP के जिलों की बात करें तो देवास इस समय वर्षा के मामले में सबसे आगे है। यहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है और अब तक लगभग 18 इंच पानी बरस चुका है।
इसके अलावा हरदा में लगभग 15 इंच, इंदौर और सीहोर में 14 इंच, जबकि भोपाल में करीब 13.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा जैसे जिले फिलहाल अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं।
दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे शुष्क जिला बना हुआ है। यहां अब तक केवल करीब 2.25 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 74 प्रतिशत कम है।
किसानों की बढ़ी चिंता
लगातार पांच दिनों से तेज बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। प्रदेश के कई इलाकों में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है और अब फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए नियमित बारिश जरूरी है। यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं होता है तो कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि मौसम विभाग का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई मौसम प्रणाली के सक्रिय होने के बाद प्रदेश में फिर से अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल किसानों और आम लोगों की नजरें आगामी मौसम गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल इंतजार बारिश की वापसी का
MP में मानसून पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन उसकी गति फिलहाल धीमी पड़ गई है। अगले कुछ दिनों तक अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। यदि नई मौसम प्रणालियां सक्रिय होती हैं तो प्रदेश में एक बार फिर झमाझम बारिश देखने को मिल सकती है। तब तक प्रदेशवासियों को तेज बारिश के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।
