शाढ़ौरा में अवैध उत्खनन का बड़ा खुलासा। कृषि उपज मंडी के पीछे पहाड़ी पर अवैध कोपरा खुदाई, बिना टैक्स मंडी परिसर से गुजर रहे डंपर, किसानों की सुरक्षा और सरकारी राजस्व पर गंभीर सवाल। पढ़ें स्वराज वाणी की विशेष रिपोर्ट।
शाढ़ौरा में अवैध उत्खनन का खेल
अशोकनगर। शाढ़ौरा में अवैध उत्खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शाढ़ौरा कृषि उपज मंडी के पीछे स्थित पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर अवैध कोपरा खुदाई की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पूरा कारोबार लंबे समय से जारी है, लेकिन अब तक जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे शासन को राजस्व की हानि होने के साथ-साथ पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अवैध उत्खनन में लगे माफिया बिना किसी वैध रॉयल्टी, लीज अथवा खनन अनुमति के जेसीबी मशीनों के माध्यम से पहाड़ी की लगातार खुदाई कर रहे हैं। लगातार हो रहे खनन से पहाड़ी का बड़ा हिस्सा खोखला होता जा रहा है।
मंडी परिसर बना डंपरों का रास्ता
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि अवैध कोपरा से भरे भारी-भरकम डंपर किसी वैकल्पिक मार्ग से नहीं बल्कि सीधे शाढ़ौरा कृषि उपज मंडी परिसर के भीतर से गुजर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि इन वाहनों से न तो मंडी शुल्क लिया जा रहा है और न ही किसी प्रकार का प्रवेश कर वसूला जा रहा है। जबकि मंडी परिसर का उपयोग कृषि उपज से जुड़े कार्यों के लिए किया जाना चाहिए।दिन और रात लगातार चलने वाले इन डंपरों ने मंडी परिसर को भारी वाहनों के ट्रांजिट मार्ग में बदल दिया है।
लाखों रुपये के राजस्व पर सवाल
शाढ़ौरा में अवैध उत्खनन से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोपरा निकाला जा रहा है। यदि खनन बिना अनुमति और बिना रॉयल्टी के किया जा रहा है तो इससे शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अवैध खनन और परिवहन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
पर्यावरण को पहुंच रही अपूरणीय क्षति
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी पहाड़ी का अनियंत्रित और अवैध उत्खनन पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करता है।
लगातार खुदाई से—
- पहाड़ी की प्राकृतिक संरचना नष्ट हो रही है।
- वर्षा जल संरक्षण प्रभावित हो रहा है।
- मिट्टी का कटाव बढ़ने की संभावना है।
- भविष्य में भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होगा।
किसानों और व्यापारियों की बढ़ी परेशानी
मंडी परिसर के भीतर तेज गति से गुजरते डंपरों के कारण पूरे क्षेत्र में धूल का गुबार बना रहता है।
इसका सीधा असर—
- किसानों,
- हम्मालों,
- व्यापारियों,
- मंडी कर्मचारियों
- तथा आसपास के लोगों पर पड़ रहा है।
धूल प्रदूषण के कारण लोगों को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मंडी की सड़कें भी हो रही खराब
लगातार ओवरलोड वाहनों के आवागमन से मंडी परिसर की सीसी सड़कें और आंतरिक मार्ग भी क्षतिग्रस्त होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में मंडी की सड़कों की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
हर समय बना रहता है हादसे का खतरा
शाढ़ौरा कृषि उपज मंडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं।
ऐसे में संकरे मार्गों से तेज गति से गुजरते भारी डंपर किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
व्यापारियों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मंडी परिसर से भारी वाहनों का आवागमन तत्काल बंद कराया जाए।
स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग तथा मंडी प्रशासन से मांग की है कि—
- अवैध उत्खनन की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- बिना अनुमति संचालित खनन तत्काल बंद कराया जाए।
- मंडी परिसर से भारी वाहनों का आवागमन रोका जाए।
- राजस्व नुकसान की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
प्रशासन से उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रतिदिन सैकड़ों डंपर मंडी परिसर से गुजर रहे हैं तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है?
यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिना रॉयल्टी और बिना वैध अनुमति के इतने बड़े स्तर पर खनन कैसे संचालित हो रहा है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
