बांधवगढ़ की लापता बाघिन 11 दिन बाद सुरक्षित मिल गई। वन विभाग ने हाथियों, डॉग स्क्वाड और विशेष टीमों की मदद से सफल सर्च ऑपरेशन चलाया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
बांधवगढ़ की लापता बाघिन 11 दिन बाद सुरक्षित मिली, वन विभाग को मिली बड़ी सफलता
रिपोर्ट – संभागीय ब्यूरो प्रमुख सुनील रैदास
उमरिया। बांधवगढ़ की लापता बाघिन आखिरकार 11 दिनों की लगातार तलाश के बाद सुरक्षित मिल गई। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में यह सफलता वन विभाग के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। लगातार बारिश, घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात विशेष सर्च अभियान चलाकर बाघिन को उसके प्राकृतिक आवास (होम रेंज) में खोज निकाला। प्रारंभिक जांच में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ पाई गई है, हालांकि उसके गले में लगा रेडियो कॉलर पूरी तरह बंद हो चुका है।
बाघिन कब हुई थी लापता?
वन विभाग के अनुसार बांधवगढ़ की लापता बाघिन का जीपीएस एवं वीएचएफ सिग्नल 1 जुलाई को दोपहर लगभग 2 बजे के बाद अचानक बंद हो गया था। रेडियो कॉलर से कोई लोकेशन प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों की चिंता बढ़ गई और तत्काल खोज अभियान शुरू किया गया।शुरुआती दिनों में वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में सुरक्षा कर्मियों और बीट गार्डों की टीमों ने संभावित क्षेत्रों में तलाश की, लेकिन कई दिनों तक कोई सफलता नहीं मिली।
कैसे शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन?
स्थिति गंभीर होने पर वन विभाग ने खोज अभियान का दायरा बढ़ाया। पांच-पांच सदस्यों की तीन विशेष टीमें गठित की गईं और लगभग 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगातार सघन तलाशी अभियान चलाया गया।लगातार हो रही बारिश, फिसलन भरे रास्ते और घने जंगल के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन वन अमले ने बिना रुके खोज जारी रखी।
हाथियों और डॉग स्क्वाड की अहम भूमिका
बांधवगढ़ की लापता बाघिन की तलाश में प्रशिक्षित हाथियों, उनके महावतों, डॉग स्क्वाड तथा 25 से अधिक वन अधिकारियों और कर्मचारियों को लगाया गया।क्षेत्र संचालक के निर्देशन में विशेष खोज दल बनाया गया जिसमें—
- वन अधिकारी
- वन कर्मचारी
- पशु चिकित्सक
- वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ
- हाथियों का दल
- डॉग स्क्वाड
को शामिल किया गया।रेडियो सिग्नल खोजने के लिए वीएचएफ रिसीवर एंटीना की संख्या भी एक से बढ़ाकर चार कर दी गई। संभावित इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाए गए, लेकिन बाघिन किसी भी कैमरे में कैद नहीं हुई।
कैसे मिली बाघिन?
लगातार चल रहे अभियान के दौरान खोज दल को जंगल में बाघिन के ताजा पदचिह्न मिले। इन्हीं पदचिह्नों के आधार पर हाथियों की सहायता से तलाशी आगे बढ़ाई गई।कुछ समय बाद बांधवगढ़ की लापता बाघिन अपने प्राकृतिक आवास (होम रेंज) में सुरक्षित दिखाई दी। वन अधिकारियों ने मौके पर उसकी गतिविधियों का निरीक्षण किया और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे पूरी तरह सामान्य एवं स्वस्थ पाया।
रेडियो कॉलर क्यों हुआ बंद?
वन विभाग के अनुसार पिछले लगभग 10 महीनों से इस बाघिन की निगरानी रेडियो कॉलर के माध्यम से की जा रही थी।प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रेडियो कॉलर पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है, जिसके कारण उसकी लोकेशन मिलना बंद हो गई थी।अब विशेषज्ञ इसकी तकनीकी जांच करेंगे ताकि खराबी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
वन विभाग ने क्या कहा?
वन विभाग ने कहा कि बांधवगढ़ की लापता बाघिन का सुरक्षित मिलना सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, हाथियों के दल, डॉग स्क्वाड और तकनीकी विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।बाघिन के स्वस्थ मिलने से वन विभाग के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों ने भी राहत की सांस ली है। विभाग अब उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखेगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
निष्कर्ष
11 दिनों तक चले कठिन अभियान के बाद बांधवगढ़ की लापता बाघिन का सुरक्षित मिलना वन विभाग की सतर्कता, आधुनिक तकनीक और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह सफलता देशभर में वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। रेडियो कॉलर की तकनीकी जांच के बाद भविष्य में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।

