—Advertisement—

Manawar हलहारिणी अमावस्या पर “एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान, सिंगाजी गौमाता मंदिर में होगा भव्य वृक्षारोपण

Author Picture
Published On: 13 July 2026
Manawar
— हलहारिणी अमावस्या पर अनूठी पह

—Advertisement—

Manawar हलहारिणी अमावस्या पर “एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान, सिंगाजी गौमाता मंदिर में होगा भव्य वृक्षारोपण

Manawar , जिला धार। पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा और जनजागरूकता के उद्देश्य से ग्राम वायल स्थित सिंगाजी गौमाता मंदिर परिसर में हलहारिणी अमावस्या के पावन अवसर पर विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। 14 जुलाई 2026, मंगलवार को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के तहत “एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में पौधारोपण किया जाएगा।

इस अभियान का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ गौमाता की सेवा, हरियाली को बढ़ावा देना और समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। कार्यक्रम में 21 त्रिवेणी पौधों और 43 फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने का कार्य करेंगे।

पूजन के साथ होगा कार्यक्रम का शुभारंभ

वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य पंडित प्रवीण शर्मा (राधे भैया), बड़ा बड़दा के करकमलों से किया जाएगा। धार्मिक और सामाजिक भावना से जुड़े इस आयोजन में क्षेत्र के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और गौसेवा से जुड़े लोगों के शामिल होने की संभावना है।

आयोजन समिति ने बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और गौमाता को विशेष स्थान दिया गया है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए “एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा जा रहा है।

21 त्रिवेणी और 43 फलदार पौधों का होगा रोपण

कार्यक्रम के दौरान कुल 64 पौधों का रोपण किया जाएगा। इसमें 21 त्रिवेणी पौधे और 43 फलदार पौधे शामिल हैं। त्रिवेणी पौधों को भारतीय परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है, जबकि फलदार पौधे पर्यावरण के साथ-साथ पक्षियों और जीव-जंतुओं के लिए भी उपयोगी साबित होते हैं।

आयोजकों के अनुसार इन पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि वे केवल लगाए जाने तक सीमित न रहें, बल्कि भविष्य में बड़े वृक्ष बनकर समाज और प्रकृति को लाभ पहुंचाएं।

गौसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

“एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान के पीछे मुख्य उद्देश्य गौमाता के लिए स्थायी छाया की व्यवस्था करना है। गर्मी के मौसम में पेड़-पौधे पशुओं के लिए प्राकृतिक आश्रय का कार्य करते हैं। इसके अलावा फलदार वृक्ष पक्षियों को भोजन और रहने का स्थान उपलब्ध कराते हैं।

आयोजकों ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि जीवन का आधार हैं। पेड़ों से वर्षा चक्र संतुलित रहता है, वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहती है और जलवायु संतुलन में सहायता मिलती है।

पेड़ धरती का श्रृंगार हैं

आयोजन समिति ने कहा कि पेड़-पौधे धरती का वास्तविक श्रृंगार हैं। लगातार हो रही पेड़ों की कटाई से पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है। इसका असर ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में देखने को मिल रहा है।

समिति ने नागरिकों से अपील की कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।

भारतीय संस्कृति में प्रकृति का विशेष महत्व

भारत की संस्कृति में वृक्षों और गौमाता को सदैव सम्मान और पूजनीय स्थान दिया गया है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पेड़-पौधे मानव जीवन के लिए बेहद आवश्यक हैं।

“एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान इसी परंपरा को आधुनिक पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से जोड़ने का एक सकारात्मक प्रयास है। इसके माध्यम से लोगों को संदेश दिया जा रहा है कि धर्म, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

नागरिकों से शामिल होने की अपील

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ग्राम वायल और आसपास के क्षेत्र के नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की गई है। आयोजकों ने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस पुनीत अभियान में सहभागी बनें और पौधों के संरक्षण का संकल्प लें।

इस अवसर पर भागीराम भाभर (सरपंच), दिनेश पटेल (उपसरपंच), ग्राम वायल एवं सिंगाजी गौमाता मंदिर गोसेवा समिति ने क्षेत्रवासियों से कार्यक्रम में शामिल होकर पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया है।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य
  • गौमाता के लिए भविष्य में स्थायी छाया की व्यवस्था करना।
  • पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र में हरियाली को बढ़ावा देना।
  • पक्षियों और अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराना।
  • ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने में जनभागीदारी बढ़ाना।
  • अधिक से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराकर प्रकृति का संतुलन बनाए रखना।

Manawar हलहारिणी अमावस्या के अवसर पर आयोजित होने वाला यह वृक्षारोपण कार्यक्रम धार्मिक आस्था, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम प्रस्तुत करेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह अभियान क्षेत्र के लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करेगा।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp