Ashoknagar शासकीय जमीन कब्जा मामला: दबंगों की धमकियों से परेशान भूमिहीन महिला पहुंची कलेक्टर के पास, सुरक्षा और आवास की लगाई गुहार
रिपोर्टर: राहुल जैन, अशोकनगर
Ashonagar शासकीय जमीन कब्जा मामला
Ashoknagar जिले की जनसुनवाई में मंगलवार को अशोकनगर शासकीय जमीन कब्जा मामला चर्चा का विषय बन गया। मुंगावली के पूर्व कस्बा रेंज वार्ड क्रमांक-14 निवासी अंजिली रजक ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया कि वह कई वर्षों से जिस शासकीय भूमि पर अपने परिवार के साथ रह रही हैं, वहां आसपास रहने वाले कुछ कथित दबंग उन्हें लगातार धमका रहे हैं और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
महिला ने प्रशासन से सुरक्षा देने के साथ-साथ आवासीय योजना के अंतर्गत उसी भूमि का पट्टा उपलब्ध कराने की मांग की है।
जनसुनवाई में सुनाई अपनी पीड़ा
मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में अंजिली रजक ने अधिकारियों के समक्ष अपनी पूरी समस्या रखी। उन्होंने बताया कि उनका कई वर्ष पहले अपने पति से तलाक हो चुका है और तब से वह अलग रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
महिला का कहना है कि वह लंबे समय से शासकीय भूमि पर निवास कर रही हैं, लेकिन अब कुछ लोग उन्हें वहां से हटाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।
राजकुमार डावर पर लगाए गंभीर आरोप
आवेदन में महिला ने पड़ोस में रहने वाले राजकुमार डावर पर प्रताड़ित करने और धमकाने का आरोप लगाया है।
महिला का कहना है कि जो लोग उन्हें वहां से हटाना चाहते हैं, वे स्वयं भी शासकीय भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें ही परेशान किया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासन द्वारा अभी नहीं की गई है और मामले की जांच होना बाकी है।
पहले भी दे चुकी हैं कई आवेदन
अंजिली रजक ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि वह पूर्व में कई बार प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रख चुकी हैं।
उनका कहना है कि अब तक किसी प्रकार का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। इसी कारण उन्हें एक बार फिर जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की मांग करनी पड़ी।
आवासीय पट्टा और सुरक्षा की मांग
महिला ने कलेक्टर से दो प्रमुख मांगें की हैं—
- उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
- जिस भूमि पर वह वर्षों से निवास कर रही हैं, वहां शासन की आवासीय योजना के तहत आवासीय पट्टा दिया जाए।
महिला का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनके परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो सकता है।
प्रशासन की निष्पक्ष जांच पर टिकी उम्मीद
Ashoknagar शासकीय जमीन कब्जा मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यदि महिला के आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासन आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सकता है। वहीं यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े अन्य तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित पक्षों पर भी नियमानुसार कार्रवाई संभव है।
भूमिहीन परिवारों के सामने बड़ी चुनौती
मध्यप्रदेश के कई जिलों में भूमिहीन परिवार वर्षों से शासकीय भूमि पर निवास कर रहे हैं और समय-समय पर आवासीय पट्टे की मांग उठती रही है।
ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होती है। एक ओर पात्र परिवारों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना होता है, वहीं दूसरी ओर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल Ashoknagar शासकीय जमीन कब्जा मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है।
अब देखना होगा कि कलेक्टर द्वारा शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं और जांच के बाद महिला को सुरक्षा, राहत तथा आवासीय पट्टा देने संबंधी क्या निर्णय लिया जाता है।
प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर स्थानीय लोगों की भी नजर बनी हुई है।
