दमोह नशा मुक्ति अभियान 2026 के तहत 15 जुलाई से “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान शुरू होगा। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने युवाओं को नशे से बचाने और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की।
दमोह नशा मुक्ति अभियान 2026: 15 जुलाई से जिलेभर में चलेगा व्यापक अभियान, युवाओं को नशे से बचाने प्रशासन का बड़ा संकल्प
रिपोर्टर: सोनू अठया | दमोह (मध्य प्रदेश)
दमोह नशा मुक्ति अभियान 2026
दमोह नशा मुक्ति अभियान 2026 के तहत जिला प्रशासन ने जिले को नशामुक्त बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है। 15 जुलाई से “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान की शुरुआत होगी। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे की लत से बचाना, समाज में जागरूकता फैलाना तथा नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई करना है।
इसी उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव एवं पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी की संयुक्त अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी संबंधित विभागों को अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
युवाओं को नशे से बचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना जिला प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज—तीनों के लिए घातक है।
उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन, पंचायतें तथा विभिन्न शासकीय विभाग मिलकर कार्य करेंगे। उद्देश्य केवल कानून लागू करना नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन लाना भी है।
15 जुलाई से शुरू होगा “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने बताया कि 15 जुलाई से पूरे जिले में “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान शुरू होगा।
उन्होंने बताया कि इस अभियान में पुलिस विभाग के साथ—
- स्वास्थ्य विभाग
- शिक्षा विभाग
- आबकारी विभाग
- रेलवे प्रशासन
- नारकोटिक्स विभाग
- राजस्व विभाग
- स्थानीय प्रशासन
संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा तथा कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रतिबंधित दवाओं और नशीले पदार्थों पर विशेष निगरानी
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिलेभर में नियमित निरीक्षण किए जाएं।
विशेष रूप से निगरानी रखी जाएगी—
- मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री
- रेलवे स्टेशन परिसर
- बस स्टैंड
- सार्वजनिक स्थान
- स्कूल एवं कॉलेजों के आसपास
- नशीले पदार्थों की तस्करी
- अफीम की अवैध खेती
- संदिग्ध गतिविधियां
प्रशासन ने कहा कि संयुक्त टीम लगातार कार्रवाई करेगी ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
समाज की भागीदारी से बनेगा नशामुक्त दमोह
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि केवल प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से ही अभियान सफल हो सकता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें तथा अपने मित्रों और परिवार के लोगों को भी जागरूक करें।
नागरिकों से प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी—
- नशीले पदार्थों की बिक्री
- ड्रग्स तस्करी
- अवैध शराब
- प्रतिबंधित दवाओं का दुरुपयोग
- नशे से संबंधित किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि
की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें।
प्रशासन का कहना है कि जनता के सहयोग से ही दमोह को पूर्णतः ड्रग फ्री जिला बनाया जा सकता है।
नशे के खिलाफ जनआंदोलन बनाने की तैयारी
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अभियान के दौरान स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रैलियां, शपथ कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर अभियान तथा सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक संदेश पहुंचाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को सही समय पर जागरूक कर नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
निष्कर्ष
दमोह नशा मुक्ति अभियान 2026 केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 15 जुलाई से शुरू होने वाला “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने, अवैध कारोबार पर रोक लगाने तथा नागरिकों को जागरूक करने का बड़ा प्रयास साबित हो सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून के साथ-साथ जनसहभागिता इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत होगी।
