अनूपपुर की बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला मामले में ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार, तकनीकी मानकों की अनदेखी और सरकारी धन की बंदरबांट के गंभीर आरोप लगाए हैं। कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई।
बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला: प्रशासनिक नाक के नीचे बदहाल निर्माण, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
रिपोर्ट: जिला ब्यूरो, अनूपपुर
बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला क्या है?
बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला इन दिनों अनूपपुर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। जनपद पंचायत कार्यालय से कुछ ही दूरी पर ग्राम पंचायत बदरा में पेयजल पाइपलाइन विस्तार कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार जिस कार्य से क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था मजबूत होनी थी, वही कार्य अब विवादों में घिर गया है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा।
प्रशासनिक कार्यालय के सामने ही उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर यह कार्य हो रहा है, वहां से विभागीय अधिकारियों का प्रतिदिन आना-जाना रहता है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
नाली में बिछाई जा रही पाइपलाइन पर विवाद
ग्रामीणों के मुताबिक तकनीकी नियमों के अनुसार पाइपलाइन को निर्धारित गहराई तक खुदाई कर सुरक्षित तरीके से बिछाया जाना चाहिए था।लेकिन आरोप है कि लागत और श्रम बचाने के उद्देश्य से पाइपों को सीधे खुली नालियों के भीतर डाल दिया गया है।यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो भविष्य में—
- पाइपलाइन टूटने की आशंका बढ़ सकती है।
- दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल सकता है।
- नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
- सरकारी धन की बड़ी बर्बादी हो सकती है।
ग्रामीणों का आरोप: नियमों की खुली अनदेखी
बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य में इस्तेमाल की जा रही प्रक्रिया तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है और जिम्मेदार अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभाग या पंचायत की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सरपंच और सचिव पर मनमानी के आरोप
स्थानीय नागरिकों ने पंचायत के सरपंच एवं सचिव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई तो उनकी शिकायतों पर विचार करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज किया गया।कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने वालों पर दबाव बनाने का भी प्रयास किया गया।इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूषित जल आपूर्ति का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार यदि पेयजल पाइपलाइन को खुले नाले अथवा गंदे जल स्रोत के संपर्क में बिछाया जाता है तो भविष्य में जल प्रदूषण की संभावना बढ़ सकती है।ऐसी स्थिति में जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।इसी कारण ग्रामीण पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला मामले में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं अनूपपुर कलेक्टर से मांग की है कि—
- पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए।
- वित्तीय जांच भी कराई जाए।
- यदि अनियमितता मिले तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
- निर्माण कार्य को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा।
प्रशासन से क्या उम्मीद?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जाता है तो योजना का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।अब सभी की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
निष्कर्ष
बदरा पंचायत पाइपलाइन घोटाला से जुड़े आरोपों ने ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।यदि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा बल्कि आम नागरिकों की पेयजल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी होगा।अब आवश्यक है कि जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाए।

