E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग
नई दिल्ली। देशभर में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि इसके लागू होने के दौरान उपभोक्ताओं के अधिकारों, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वे जिस पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं, उसमें इथेनॉल की मात्रा कितनी है। बिना स्पष्ट जानकारी के उपभोक्ताओं को E20 जैसे ईंधन का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को ईंधन में मौजूद इथेनॉल प्रतिशत की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
पेट्रोल पंपों पर जानकारी प्रदर्शित करने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिस्पेंसिंग नोजल और बिक्री रसीद (बिल) पर इथेनॉल मिश्रण की मात्रा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके वाहन में किस प्रकार का ईंधन डाला जा रहा है। विशेष रूप से पुराने वाहनों को लेकर चिंता जताई गई है, क्योंकि सभी वाहन अधिक मात्रा वाले इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए अनुकूल नहीं हो सकते हैं।
पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर चिंता
PIL में कहा गया है कि बिना पर्याप्त जानकारी के E20 पेट्रोल की बिक्री से कुछ पुराने वाहनों के प्रदर्शन, माइलेज और इंजन के पुर्जों पर असर पड़ सकता है।
याचिका में मांग की गई है कि सरकार और संबंधित कंपनियां वाहन मालिकों को यह जानकारी उपलब्ध कराएं कि कौन-कौन से वाहन मॉडल अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए उपयुक्त हैं।
इसके लिए एक आधिकारिक और आसानी से उपलब्ध वाहन कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है, जिसमें वाहन मालिक अपने वाहन की जानकारी के आधार पर ईंधन की अनुकूलता जांच सकें।
सरकार की नीति का विरोध नहीं: याचिका
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला सरकार की पर्यावरण अनुकूल इथेनॉल नीति के विरोध में नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से जुड़े नीतिगत उद्देश्यों पर सवाल नहीं उठाया जा रहा, बल्कि इसे लागू करते समय उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी और सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है।
याचिका में कहा गया है कि किसी भी नई ईंधन व्यवस्था को लागू करते समय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट से मांगी गई प्रमुख राहतें
PIL में सुप्रीम कोर्ट से कई निर्देश जारी करने की मांग की गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- सभी पेट्रोल पंपों पर फ्यूल नोजल के पास इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत की जानकारी प्रदर्शित करना।
- पेट्रोल की बिक्री रसीद या बिल में इथेनॉल मात्रा का उल्लेख करना।
- वाहन मॉडल के अनुसार E20 और अन्य इथेनॉल मिश्रित ईंधनों की अनुकूलता बताने वाला आधिकारिक डेटाबेस तैयार करना।
- पुराने और E20 के लिए अनुकूल नहीं वाहनों के लिए स्पष्ट ट्रांजिशन नीति बनाना।
- वाहन वारंटी, इंश्योरेंस और सर्विस सुविधाओं से जुड़े उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग
याचिका में E20 कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
इस समिति के जरिए वाहन कम्पैटिबिलिटी, इंजन की उम्र, रखरखाव खर्च, पर्यावरणीय प्रभाव, पानी की खपत, खाद्य सुरक्षा और वाहन वारंटी जैसे मुद्दों का अध्ययन करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से E20 नीति से जुड़े तकनीकी अध्ययन, नीति दस्तावेज, वाहन अनुकूलता रिपोर्ट और सार्वजनिक परामर्श से जुड़े रिकॉर्ड अदालत के सामने प्रस्तुत करने का अनुरोध भी किया है।
अंतरिम राहत की मांग
याचिका में अंतिम फैसला आने तक अंतरिम निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है। इसके तहत तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर तुरंत इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत प्रदर्शित करने, फ्यूल बिल में जानकारी देने और वाहन अनुकूलता संबंधी प्रारंभिक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
इसके अलावा कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल एप पर भी E20 फ्यूल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
E20 नीति पर बढ़ी चर्चा
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, पर्यावरणीय प्रभाव घटाना और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है।
हालांकि, E20 के विस्तार के साथ वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता जागरूकता और तकनीकी बदलाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा बढ़ी है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे के निर्देशों पर नजर रहेगी।
