MP Weather: तीन दिन तक हल्की बारिश से मिलेगी राहत, 14 जुलाई से फिर सक्रिय होगा मानसून, कई जिलों में तेज वर्षा के संकेत
MP Weather: मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद अब मौसम में अस्थायी बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 11 जुलाई से 13 जुलाई तक भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है। इस दौरान अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होगी और कहीं भी अत्यधिक वर्षा का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। हालांकि राहत का यह दौर ज्यादा लंबा नहीं रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 14 जुलाई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में फिर से झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
मौसम विभाग ने बताया कि वर्तमान में सक्रिय मानसूनी सिस्टम कुछ कमजोर पड़ गया है, जिसके कारण अगले तीन दिनों तक प्रदेश में हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। हालांकि कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
अगले तीन दिन हल्की से मध्यम बारिश
भोपाल स्थित मौसम केंद्र के अनुसार 11 से 13 जुलाई के बीच प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर बारिश होगी। राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर सहित सभी 55 जिलों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि इस अवधि में किसी भी जिले के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
14 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम
MP मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान के ऊपर एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसका प्रभाव अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। इसी सिस्टम के कारण 14 जुलाई से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां एक बार फिर तेज होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए सिस्टम के सक्रिय होने के बाद कुछ जिलों में भारी बारिश भी हो सकती है। हालांकि किन जिलों में सबसे अधिक वर्षा होगी, इसका विस्तृत पूर्वानुमान मौसम विभाग आगामी दिनों में जारी करेगा।
खरीफ फसलों के लिए राहतभरा दौर
लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। इससे सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ गई थी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन दिनों तक हल्की बारिश होने से खेतों में जमा अतिरिक्त पानी निकलने का अवसर मिलेगा। इससे फसलों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलेगी और पौधों का विकास बेहतर होगा। किसानों के लिए यह मौसम राहत लेकर आया है क्योंकि लगातार भारी वर्षा के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे थे।
जुलाई ने बदल दी मानसून की तस्वीर
इस वर्ष जून महीने में मध्य प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, जिससे किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई थी। लेकिन जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने रफ्तार पकड़ ली और शुरुआती दिनों में हुई लगातार बारिश ने पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल दी।
प्रदेश में अब तक लगभग 240 मिलीमीटर (करीब 9.5 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह सामान्य औसत 222.1 मिलीमीटर से लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। लगातार हुई बारिश के कारण जलाशयों, नदियों और बांधों का जलस्तर भी बढ़ा है, जिससे आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार पश्चिमी मध्य प्रदेश में मानसून अधिक सक्रिय रहा है। यहां सामान्य से करीब 24 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अब भी बारिश सामान्य से कम बनी हुई है। पूर्वी हिस्से में औसतन 8 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले नए सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी जिलों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
देवास बना सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला
MP में अब तक सबसे अधिक बारिश देवास जिले में दर्ज की गई है। यहां सामान्य से लगभग 115 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है और करीब 18 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।
इसके अलावा हरदा जिले में लगभग 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच, जबकि राजधानी भोपाल में लगभग 13.1 इंच वर्षा दर्ज की गई है। लगातार अच्छी बारिश के कारण इन क्षेत्रों में जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।
दूसरी ओर आलीराजपुर जिले में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। यहां अब तक केवल करीब 2.25 इंच वर्षा हुई है, जो सामान्य से काफी कम मानी जा रही है।
लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि भले ही अगले तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन गरज-चमक और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। बिजली गिरने की आशंका वाले समय खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
किसानों को भी सलाह दी गई है कि खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखें और मौसम के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।
क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ?
MP मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अगले सप्ताह नया सिस्टम बनने के बाद प्रदेश में फिर से अच्छी बारिश होने की संभावना है। ऐसे में जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून एक बार फिर सक्रिय रूप में दिखाई दे सकता है।
कुल मिलाकर MP में फिलहाल तीन दिन तक हल्की बारिश का दौर रहेगा, लेकिन 14 जुलाई से मौसम फिर करवट ले सकता है और कई जिलों में तेज बारिश लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
