अम्बाह में होगा आर्यिकाश्री संगममति माताजी का पावन वर्षायोग
मुरैना/अम्बाह (मनोज जैन नायक) Jain साध्वी आर्यिकाश्री संगममति माताजी का इस वर्ष का पावन वर्षायोग धर्म नगरी अम्बाह में होना सुनिश्चित हुआ है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जैनाचार्य श्री सिद्धांतसागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका रत्न श्री संगममति माताजी का पावन वर्षायोग अम्बाह नगर में होने की घोषणा से संपूर्ण समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। बताया जाता है कि पूज्य आर्यिका माताजी का अभी कुछ समय पूर्व ही अम्बाह आगमन हुआ । माताजी की प्रवचन शैली, वात्सल्य को देखते हुए साधर्मी बंधुओं ने अम्बाह नगर में वर्षायोग स्थापित करने हेतु श्रीफल अर्पित करते हुए निवेदन किया ।
समाजजनों की भावना को दृष्टिगत रखते हुए पूज्य आर्यिका माताजी ने सभी को शुभाशीष देते हुए पूज्य गुरुदेव से स्वीकृति लाने को कहा ।
विगत दिवस अम्बाह जैन समाज के प्रतिनिध मंडल ने इंदौर के नजदीक आचार्यश्री सिद्धांत सागर महाराज से मुलाकात कर पूज्य आर्यिका माताजी के अम्बाह चातुर्मास हेतु स्वीकृति देने का निवेदन किया । पूज्य गुरुदेव ने सभी की भावना के अनुरूप चातुर्मास की

स्वीकृति प्रदान करते हुए, धर्म वृद्धि का शुभाशीष प्रदान किया । प्रतिनिधि मंडल में वरिष्ठ समाजसेवी विमल जैन राजू, शरद जैन, दिलीप जैन, पंकज जैन परेड, भारत जैन चीकू सम्मिलित थे ।
जैन संतों का वर्षायोग लगभग चार माह का होता है । वर्षा ऋतु के चार महीनों जुलाई से अक्टूबर तक के समय को चातुर्मास या वर्षायोग कहते हैं । इस दौरान जैन साधु संत मुनि, आर्यिका और उनका संघ एक ही स्थान पर रहकर साधना करते है। इस दौरान जैन साधु संत पदयात्रा या विहार नहीं करते हैं और एक ही नगर या मंदिर में रहकर धर्म-प्रसार, ध्यान और स्वाध्याय करते हैं ।
इस समय वर्षा ऋतु में छोटे जीवों, कीड़े-मकोड़ों और वनस्पतियों की उत्पत्ति अत्यधिक होती है। निरंतर विहार करने से अनजाने में इन जीवों को नुकसान पहुँच सकता है। अहिंसा के व्रत का पालन करने के लिए संत एक ही स्थान पर स्थिर हो जाते हैं ताकि जीव हिंसा न हो । यह समय संतों के गहन ध्यान, तपस्या और श्रद्धालुओं को धार्मिक शिक्षा देने के लिए समर्पित होता है । आगम अथवा जैन शास्त्रीय विधान के अनुसार, यह योग आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी की रात से शुरू होकर कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तक चलता है । यह समय संतों के गहन ध्यान, तपस्या और श्रद्धालुओं को धार्मिक शिक्षा देने के लिए समर्पित होता है ।
वर्षायोग में पूज्य आर्यिका माताजी के ज्ञान, भक्ति और शक्ति से लोग एक अलग तरह की ऊर्जा प्राप्त करेंगे। चार महीने चलने वाले चातुर्मास में विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किए जाएंगे
