कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल पर EOW के गंभीर आरोप, 800 करोड़ रुपये के कथित पार्टी फंड और हवाला नेटवर्क का दावा
Chhattisgarh Coal Levy Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद जांच एक बार फिर तेज हो गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और अपनी जांच के आधार पर कई गंभीर दावे किए हैं। एजेंसी का आरोप है कि कथित अवैध कोल लेवी से जुटाई गई बड़ी रकम का प्रबंधन रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से किया जाता था और पार्टी फंड के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपये एकत्र किए गए।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये सभी आरोप जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ में कथित कोल लेवी घोटाला पिछले कुछ वर्षों से लगातार चर्चा में है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि राज्य में कोयला परिवहन और उससे जुड़े कारोबार में अवैध वसूली का एक संगठित नेटवर्क संचालित किया गया। इस नेटवर्क के माध्यम से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई।
मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में उस समय हुई, जब आयकर विभाग ने कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान एजेंसियों को कई दस्तावेज, डायरी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिले, जिनके आधार पर बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अपनी जांच आगे बढ़ाई।
EOW का दावा: 800 करोड़ रुपये जुटाए गए
EOW ने अदालत में कहा कि कथित कोल लेवी से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा पार्टी फंड के नाम पर एकत्र किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस राशि का प्रबंधन कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल द्वारा किया जाता था।
एजेंसी का दावा है कि लगभग 800 करोड़ रुपये अलग-अलग माध्यमों से जुटाए गए। इस रकम का लेखा-जोखा रखने और उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी कथित रूप से रामगोपाल अग्रवाल के पास थी।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी बाकी है।
हवाला नेटवर्क से दिल्ली भेजी जाती थी रकम
जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि कथित रूप से जुटाई गई नकदी को बोरी और कार्टन में भरकर कांग्रेस भवन लाया जाता था। वहां से हवाला नेटवर्क के जरिए यह रकम दिल्ली भेजी जाती थी।
EOW के अनुसार, यह प्रक्रिया काफी समय तक चलती रही और इसमें कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि हवाला के माध्यम से धन के हस्तांतरण से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
कांग्रेस भवन तक पहुंचती थी कथित राशि
EOW ने अपने दस्तावेजों में कांग्रेस के अकाउंटेंट और रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक देवेंद्र डड़सेना के बयान का भी उल्लेख किया है।
एजेंसी के अनुसार, डड़सेना ने बयान में कहा कि कथित कोल लेवी से प्राप्त राशि कांग्रेस भवन लाई जाती थी और उसके बाद उस राशि का नियंत्रण रामगोपाल अग्रवाल के पास रहता था।
यह बयान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि इसकी सत्यता का अंतिम परीक्षण अदालत में होगा।
52.62 करोड़ रुपये सीधे मिलने का आरोप
EOW का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपये सीधे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचे।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह राशि प्राप्त करने, सुरक्षित रखने और उसके उपयोग से संबंधित भूमिका भी उन्हीं की थी।
इन आरोपों की पुष्टि अभी न्यायिक जांच और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
कारोबारियों के बयान भी जांच का हिस्सा
EOW ने कुछ कारोबारियों के बयान का भी हवाला दिया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, भिलाई के कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने अपने बयान में कहा कि दीपेन चावड़ा के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रुपये कांग्रेस भवन भेजे गए।
वहीं निखिल चंद्राकर ने भी कथित रूप से यह स्वीकार किया कि कोल लेवी से जुड़ी राशि रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचती थी।
एजेंसी इन बयानों को जांच में महत्वपूर्ण मान रही है। हालांकि, इन बयानों की सत्यता का परीक्षण अदालत में किया जाएगा।
तीन साल तक रहे फरार
जांच एजेंसी का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल लगभग तीन वर्षों तक जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहे।
प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने कथित रूप से बताया कि रायपुर छोड़ने के बाद वे कई राज्यों में रहे।
इनमें—
- ओडिशा
- उत्तर प्रदेश
- तेलंगाना
- कर्नाटक
- केरल
- राजस्थान
- मध्यप्रदेश
- दिल्ली
शामिल हैं।
EOW के अनुसार, इस दौरान उन्होंने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर दर्शन भी किए तथा विशेष पूजा-अर्चना कराई।
परिवार और परिचितों के संपर्क में रहने का दावा
जांच एजेंसी का कहना है कि फरारी के दौरान भी रामगोपाल अग्रवाल अपने परिवार, कुछ नेताओं और कारोबारियों के संपर्क में बने रहे।
एजेंसी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इस दौरान उनकी गतिविधियां क्या थीं और किन-किन लोगों से उनका संपर्क बना रहा।
8 जुलाई को किया सरेंडर
करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद रामगोपाल अग्रवाल ने 8 जुलाई 2026 को जांच एजेंसी के समक्ष सरेंडर किया।
इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया।
EOW ने अदालत से 14 दिन की रिमांड मांगी थी, ताकि उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके।
हालांकि, अदालत ने 9 दिन की रिमांड मंजूर करते हुए उन्हें 17 जुलाई तक EOW की हिरासत में भेज दिया।
आगे और भी हो सकती है कार्रवाई
जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य मामलों में भी कार्रवाई की जा सकती है।
बताया जा रहा है कि—
- कथित कस्टम मिलिंग घोटाला
- डीएमएफ (District Mineral Foundation) से जुड़े मामले
- कथित शराब घोटाला
में भी जांच आगे बढ़ सकती है।
यदि पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो इन मामलों में भी गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई संभव हो सकती है।
ED भी कर रही है जांच
कोल लेवी मामले की जांच केवल EOW ही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है।
ED पहले से इस मामले में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलुओं की जांच कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, EOW की पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ED भी आगे अलग कार्रवाई कर सकता है।
कानूनी प्रक्रिया अभी जारी
विशेष अदालत ने रामगोपाल अग्रवाल को 17 जुलाई तक EOW की रिमांड पर भेजा है।
इस दौरान जांच एजेंसी उनसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ करेगी।
इसके बाद उन्हें दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा, जहां आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।
मामले पर अंतिम फैसला अदालत का होगा
इस पूरे मामले में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि EOW द्वारा लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में साक्ष्यों की जांच, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।
फिलहाल, जांच एजेंसी अपने दावों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है, जबकि संबंधित पक्ष को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का पूरा अधिकार प्राप्त है। इसलिए मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के निर्णय के बाद ही सामने आएगा।
