*युवा शक्ति, भारतीय जनसंघ की विचारधारा और विकसित भारत का संकल्प*
कु आर्या जैन चन्देरी विद्यार्थी (एम एस डव्लू) 6269414710
भारत की सबसे बड़ी पूँजी उसकी युवा शक्ति है। जनसंख्या तभी वरदान बनती है, जब उसका युवा शिक्षित, संस्कारित, स्वस्थ, कुशल और आत्मनिर्भर हो। अन्यथा वही जनसंख्या बेरोज़गारी, असमानता और सामाजिक चुनौतियों का कारण बन सकती है। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस केवल जनसंख्या नियंत्रण का संदेश नहीं देता, बल्कि जनसंख्या को मानव संसाधन में बदलने का भी आह्वान करता है।
भारतीय जनसंघ की स्थापना से ही राष्ट्र के नवयुवकों को चरित्रवान, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक बनाने पर विशेष बल दिया गया। ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना, जबकि ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय का दर्शन देकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने का मार्ग दिखाया। उनका विश्वास था कि राष्ट्र का उत्थान तभी संभव है, जब युवा अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखकर समाज और देश के प्रति उत्तरदायित्व निभाए।
आज स्वतंत्र भारत अमृतकाल में “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को सशक्त बनाने के लिए अनेक पहलें की गई हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी योजनाओं ने लाखों युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार, नवाचार और उद्यमिता की नई दिशा प्रदान की है। इन प्रयासों का उद्देश्य युवाओं को अवसर देकर उन्हें देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का सहभागी बनाना है।

विशेष रूप से चंदेरी जैसे पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्रों में यदि युवा आधुनिक तकनीक, ई-कॉमर्स और कौशल का समन्वय करें, तो वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को विश्व बाज़ार तक पहुँचा सकते हैं। यही आत्मनिर्भर भारत का वास्तविक स्वरूप है, जहाँ परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलती हैं।
आज आवश्यकता केवल जनसंख्या बढ़ाने या घटाने की नहीं, बल्कि प्रत्येक युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और नैतिक संस्कार उपलब्ध कराने की है। जब युवा अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझेगा, तब भारत विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश ही नहीं, बल्कि सबसे सक्षम, सशक्त और समृद्ध राष्ट्र भी बनेगा।
राष्ट्र का भविष्य संसदों की बहसों से अधिक विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं, खेतों, कारखानों और युवा मन की ऊर्जा में लिखा जाता है। यदि भारत का युवा सेवा, संस्कार, स्वावलंबन और नवाचार के पथ पर आगे बढ़े, तो जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति सिद्ध होगी। यही भारतीय जनसंघ की वैचारिक प्रेरणा, यही अंत्योदय का संदेश और यही विकसित भारत के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।
