Satna : निलंबित उपयंत्री सतीश समेले के गंभीर आरोप, बोले- सरपंच से भोपाल तक चलता है कमीशन का खेल
Satna (मध्यप्रदेश): मध्यप्रदेश के सतना जिले में मझगवां जनपद पंचायत के निलंबित संविदा उपयंत्री सतीश समेले के आरोपों से पंचायत विभाग में हलचल मच गई है। वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों के बाद निलंबित किए गए सतीश समेले ने गुरुवार 9 जुलाई को मीडिया के सामने आकर विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सतीश समेले ने आरोप लगाया कि पंचायत विभाग में कमीशनखोरी का एक पूरा सिस्टम चल रहा है, जो सरपंच स्तर से लेकर भोपाल तक फैला हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी निर्माण कार्यों और योजनाओं में नीचे से लेकर ऊपर तक कई स्तरों पर पैसों का लेन-देन होता है।
उन्होंने कहा कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े सबूत और कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद हैं, जिन्हें वह हाईकोर्ट में पेश करेंगे। हालांकि, उनके लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के संविदा उपयंत्री के पद पर पदस्थ थे।
निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों की ओर से उनके खिलाफ शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि वह निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चलते हैं।
इन शिकायतों के आधार पर जिला पंचायत सीईओ द्वारा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उनसे जवाब मांगा गया था।
बंदूक रखने की बात स्वीकार की थी
मामले में सतीश समेले ने निरीक्षण के दौरान अपने साथ बंदूक रखने की बात स्वीकार की थी। हालांकि, उनका जवाब अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगा।
इसके बाद उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर दिया गया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई।
निलंबन के बाद सतीश समेले का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
‘सरपंच से भोपाल तक चलता है कमीशन का खेल’
मीडिया से बातचीत के दौरान सतीश समेले ने आरोप लगाया कि पंचायत विभाग में हर स्तर पर कमीशन तय है। उन्होंने कहा कि नीचे से लेकर ऊपर तक सभी को पैसे चाहिए होते हैं।
उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्यों से जुड़े भुगतान और प्रक्रियाओं में अलग-अलग स्तरों पर प्रतिशत के हिसाब से पैसा बांटा जाता है।
सतीश समेले ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी कमीशन नहीं लेने की बात करता है तो वह अपने बेटे और भगवान हनुमान की शपथ लेकर इसे साबित करे।
किसे कितना कमीशन मिलने का लगाया आरोप?
सतीश समेले ने आरोप लगाते हुए एक कथित प्रतिशत व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनके अनुसार:
- सरपंच – 10 प्रतिशत
- सचिव – 5 प्रतिशत
- जीआरएस – 3 प्रतिशत
- सब इंजीनियर – 5 प्रतिशत
- सहायक यंत्री – 2 प्रतिशत
- जनपद सीईओ – 2 से 3 प्रतिशत
उन्होंने कहा कि ये सभी आरोप उनके अनुभव और जानकारी के आधार पर हैं।
निरीक्षण के नाम पर ‘सूटकेस’ देने का आरोप
सतीश समेले ने यह भी आरोप लगाया कि जिला, संभाग और भोपाल स्तर से निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों के लिए भी व्यवस्था करनी पड़ती है।
उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग विभागों से आने वाले निरीक्षण अधिकारियों के लिए “सूटकेस” दिए जाते हैं। हालांकि, उन्होंने जिन आरोपों का जिक्र किया है, उनके समर्थन में अभी कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
हाईकोर्ट में सबूत पेश करने का दावा
निलंबित उपयंत्री ने कहा कि उनके पास कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि वह इन सभी दस्तावेजों को हाईकोर्ट में पेश करेंगे।
उनका कहना है कि विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए इन मामलों की जांच जरूरी है।
विभाग की ओर से जवाब का इंतजार
सतीश समेले के आरोपों के बाद पंचायत विभाग और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में विभागीय जांच पहले से जारी है।
अब आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी।
नोट
यह खबर निलंबित संविदा उपयंत्री सतीश समेले द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों या विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
