Betul धामन्या नदी पुलिया निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी न होने से बैतूल के भीमपुर क्षेत्र के 40-50 गांव बरसात में कट जाते हैं। ग्रामीणों और जयस संगठन ने पुलिया निर्माण नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी। पूरी खबर पढ़ें।
Betul धामन्या नदी पुलिया निर्माण: 40-50 गांवों का संपर्क टूटने से ग्रामीणों में आक्रोश, चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
रिपोर्ट: राहुल राठौर
Betul। धामन्या नदी पुलिया निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी नहीं होने से बैतूल जिले के विकासखंड भीमपुर के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बरसात शुरू होते ही धामन्या नदी उफान पर आ जाती है, जिससे लगभग 40 से 50 गांवों का संपर्क मुख्य सड़क और कस्बों से पूरी तरह टूट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आवागमन का मुद्दा नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रोजगार और जीवन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा धामन्या नदी पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया तो आगामी चुनाव का लोकतांत्रिक तरीके से बहिष्कार किया जाएगा।
धामन्या नदी पुलिया निर्माण की मांग क्यों महत्वपूर्ण है
भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत धामन्या क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से धामन्या नदी पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। प्रत्येक वर्ष बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह समाप्त हो जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया नहीं होने से पूरा क्षेत्र कई दिनों तक अलग-थलग पड़ जाता है और लोगों का सामान्य जीवन ठप हो जाता है।
बरसात में 40-50 गांवों का संपर्क टूट जाता है
ग्रामीणों के अनुसार जैसे ही तेज बारिश होती है, धामन्या नदी उफान पर आ जाती है।इसके कारण—
- लगभग 40 से 50 गांव मुख्य सड़क से कट जाते हैं।
- बाजार तक पहुंचना असंभव हो जाता है।
- सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
- कई गांवों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं बल्कि कई वर्षों से बनी हुई है।
धामन्या नदी पुलिया निर्माण नहीं होने से सबसे अधिक परेशानी
मरीजों की जान पर बन आती है
आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना बेहद कठिन हो जाता है। कई बार नदी पार करने के दौरान जान का जोखिम उठाना पड़ता है।
छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र बरसात के दिनों में नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। कई दिनों तक स्कूल बंद जैसा माहौल बन जाता है।
किसानों को आर्थिक नुकसान
किसानों की तैयार फसल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पाती।
- फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
- परिवहन पूरी तरह बाधित हो जाता है।
बैंक और शासकीय सेवाएं बंद जैसी स्थिति
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दौरान
- बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होती हैं।
- पंचायत एवं अन्य सरकारी कार्य रुक जाते हैं।
- राशन, पेंशन और अन्य योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है।
आपदा प्रबंधन भी प्रभावित
किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना की स्थिति में राहत दल समय पर गांवों तक नहीं पहुंच पाते।ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया का निर्माण केवल सुविधा नहीं बल्कि सुरक्षा का विषय है।
वर्षों से मिलते रहे केवल आश्वासन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए।हर बार पुलिया निर्माण का आश्वासन मिला लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।ग्रामीणों का कहना है कि लगातार उपेक्षा के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहने के बाद भी विकास नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी अंचलों के विकास की लगातार बातें होती रही हैं, लेकिन धरातल पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।धामन्या नदी पर पुलिया नहीं बनने से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि यदि शीघ्र Betul धामन्या नदी पुलिया निर्माण को स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया तो आगामी चुनाव का लोकतांत्रिक तरीके से बहिष्कार किया जाएगा।उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों का विश्वास टूट रहा है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि—
- धामन्या नदी पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति दी जाए।
- निर्माण कार्य प्राथमिकता से प्रारंभ कराया जाए।
- बरसात के दौरान वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जाए।
- क्षेत्र के 40-50 गांवों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
मौके पर उपस्थित ग्रामीण एवं जयस संगठन भीमपुर
कार्यक्रम एवं ज्ञापन के दौरान उपस्थित प्रमुख ग्रामीण एवं जयस संगठन भीमपुर के सदस्य—
- विनेश बारस्कर
- महादेव बारस्कर
- पवन नागले
- दीपक नागले
- रोहित वरकड़े
- कैलाश प्रजापति
- राजेश प्रजापति
- संदीप कुमरे
- धर्मेन्द्र सिरसाम
- अखलेश अहाके
- संतोष आहके
- दिनेश भलावी
- सतीश वाडिया
- किसन धुर्वे
- वासुदेव भलावी
- राहुल भलावी
- उमर बारस्कर
- दीनू कसदे
- कमलेश वाडिया
- बलराम विश्वकर्मा
- तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
प्रशासन से अंतिम अपील
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से अनुरोध किया है कि जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धामन्या नदी पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ताकि हर वर्ष बरसात में होने वाली परेशानी से हजारों लोगों को राहत मिल सके।
