राजगढ़ के पड़ाना में 65.63 करोड़ की लागत से बन रही सीसी सड़क के साथ नाली निर्माण में अनियमितता का आरोप। ग्रामीणों ने विरोध कर PWD अधिकारियों से जांच और सुधार की मांग की।
पड़ाना में सीसी सड़क निर्माण और नाली निर्माण पर ग्रामीणों का हंगामा, ठेकेदार पर मनमानी के आरोप
स्थान: पड़ाना, राजगढ़ (मध्यप्रदेश)
पड़ाना नगर में केंद्रीय सड़क निधि से स्वीकृत मऊ–पड़ाना–तलेन 25.50 किलोमीटर सड़क मार्ग के निर्माण कार्य के दौरान नाली निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से नाली निर्माण करने का आरोप लगाया और निर्माण कार्य का विरोध किया।
ग्रामीणों के विरोध के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) के एसडीओ अक्षय महाजन और इंजीनियर पी.के. शर्मा मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने पहले सीसी सड़क का निर्माण कराया और बाद में नाली निर्माण शुरू कर दिया, जबकि नियमानुसार पहले अतिक्रमण हटाकर पुरानी नालियों की जगह नई नालियां बनाई जानी चाहिए थीं। आरोप है कि पुरानी नालियों को छोड़कर सड़क के बिल्कुल समीप नई नालियां बनाई जा रही हैं, जिससे सड़क संकरी हो गई है और नालियां सड़क से ऊंची दिखाई दे रही हैं।
यह सड़क निर्माण कार्य 65.63 करोड़ रुपये की लागत से गोडेक कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर में कई स्थानों पर बिना अतिक्रमण हटाए ही अधूरा नाली निर्माण शुरू कर दिया गया, जिससे भविष्य में जल निकासी और यातायात दोनों प्रभावित होंगे।
वाल्मीकि मोहल्ले में जलभराव की समस्या
वाल्मीकि मोहल्ले के लोगों ने अधिकारियों को बताया कि जंगलों से आने वाला बारिश का पानी नगर में प्रवेश करता है, लेकिन लगाए गए पाइप ऊंचे होने के कारण पानी की निकासी सही तरीके से नहीं हो पाती। इससे बरसात में घरों में पानी भरने की स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों ने मांग की कि सीसी सड़क को आवश्यकतानुसार ऊंचा किया जाए और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए।
कंडारा मोहल्ला मार्ग पर भी परेशानी
कंडारा मोहल्ला जाने वाले मार्ग पर भी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान निकासी व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो बारिश में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
इंजीनियरों की निगरानी पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान विभागीय इंजीनियर नियमित रूप से मौके पर मौजूद नहीं रहे। उनका कहना है कि तकनीकी निगरानी के अभाव में ठेकेदार ने अपनी सुविधा के अनुसार निर्माण किया। लोगों ने आशंका जताई कि सड़क किनारे बनी नालियां भविष्य में बड़े वाहनों के दबाव से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराकर नियमों के अनुसार नाली और सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
