पिपलोदा ब्लॉक के ग्रामीण अंचलों में ‘सड़कों का संकट’: बछोड़िया-रियावन मुख्य मार्ग दलदल में बदला, सीएम की घोषणा भी हवा
डामर महंगा होने का बहाना बना रहे पीएमजीएसवाई के अफसर; सुध लेने न कलेक्टर पहुंचे न एसडीएम, जनप्रतिनिधियों के पास भी जवाब नहीं
**पिपलोदा/बछोड़िया। संवाददाता अर्जुन कुमावत**
पिपलोदा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा और संपर्क मार्ग पूरी तरह चरमरा गए हैं। बछोड़िया से रियावन और आस-पास के अंदरूनी ग्रामीण रास्तों की स्थिति इस मानसून में अत्यंत दयनीय हो चुकी है। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही लोक निर्माण और प्रधानमंत्री सड़क योजना के दावों की पोल खोलकर रख दी है। संपूर्ण क्षेत्र की मुख्य और लिंक सड़कें इस समय गहरे गड्ढों और कीचड़ के साम्राज्य में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जर्जर हो चुकी इन सड़कों की मरम्मत के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है, परंतु प्रशासनिक अमले की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। आए दिन दुपहिया वाहन चालक इन रास्तों पर फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
स्कूली छात्र और जावरा-रतलाम जाने वाले यात्री परेशान
बछोड़िया से रियावन जाने वाला मार्ग जावरा और रतलाम जिला मुख्यालय को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। इसी मार्ग से होकर क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थी हायर सेकेंडरी स्कूल की पढ़ाई के लिए रोजाना सफर करते हैं। अधिकारियों ने मानसून पूर्व वादा किया था कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही यहाँ 370 मीटर आरसीसी सड़क और बड़ी पुलिया का निर्माण कर दिया जाएगा। परंतु, अब प्रधानमंत्री सड़क योजना (PMGSY) के महाप्रबंधक पंकज मालवीय और अधीनस्थ अमला ‘डामर महंगा होने’ का तकनीकी बहाना बनाकर इस जनहित के कार्य को लगातार टाल रहा है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।

बदहाली का शिकार: तहसील के इन 7 प्रमुख मार्गों पर भी राहगीर भुगत रहे नरक
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण सिर्फ एक मार्ग नहीं, बल्कि पिपलोदा ब्लॉक के आधा दर्जन से अधिक संपर्क रास्ते पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। धरातल पर स्थिति कुछ इस प्रकार है:
* **रानीगांव फेंटे से मावता मार्ग (गंभीर लापरवाही का शिकार):** यह क्षेत्र का एक और सबसे प्रमुख और व्यस्त रास्ता है, जिसे प्रशासन ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। लगातार शिकायतों के बाद भी इस मार्ग पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। सड़क गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और वाहनों का निकलना दूभर हो गया है, जिससे इस प्रमुख केंद्र तक पहुँचने वाले ग्रामीण रोज़ाना परेशान हो रहे हैं।
* **बछोड़िया से बछोड़िया फांटा (होरी हनुमान जी रोड):** क्षेत्र को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग आज के आधुनिक दौर में भी पूरी तरह कच्चा और बदहाल पड़ा है। स्कूल जाने वाले नौनिहाल इस कीचड़ से गुजरने को मजबूर हैं। पूर्व में ग्रामीणों ने इसके लिए उग्र धरना प्रदर्शन भी किया था, लेकिन प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली।
* **रियावन से कालूखेड़ा मुख्य मार्ग:** हजारों वाहनों के दबाव वाले इस व्यस्ततम मार्ग को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनसभा में स्वीकृति प्रदान की थी। सीएम की इस घोषणा को एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो सका है।
* **रियावन से भागरखेड़ी-सुखेड़ा-पिपलोदा मार्ग:** भागरखेड़ी से हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के विद्यार्थी हर दिन इसी कच्चे और बदहाल रास्ते से होकर शिक्षण संस्थानों तक पहुँचते हैं। भारी व्यावसायिक वाहनों के आवागमन के बावजूद इस सड़क के सुधारीकरण पर कोई ध्यान नहीं ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
* **बछोड़िया से सुखेड़ा मार्ग (बिना पुलिया मंडरा रहा खतरा):** यह मार्ग बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। यहाँ बरसाती नाले पर पुलिया निर्माण न होने से हर समय दुर्घटना का भय रहता है। गत वर्ष भी यहाँ एक बाइक सवार नाले के तेज बहाव में बह गया था, जिसे स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बचाया था।
* **रियावन से चिपिया रास्ता:** ग्रामीण आबादी को जोड़ने वाला यह संपर्क रास्ता भी पूरी तरह उखड़ चुका है और पहली ही बारिश में यह मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध होने की कगार पर है।
* **जेठाना से झाझाखेड़ी मार्ग:** इस ग्रामीण रास्ते की गिट्टी और पत्थर बाहर निकल आए हैं। सड़क पर बने गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का आमंत्रण साबित हो रहे हैं।

वातानुकूलित कमरों से बाहर नहीं निकले जिला और अनुविभागीय अधिकारी
इस व्यापक अव्यवस्था और बदहाली को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी रोष व्याप्त है। जब ग्रामीण इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का घेराव करते हैं, तो उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं होता। क्षेत्रवासियों का सीधा आरोप है कि रतलाम कलेक्टर और जावरा एसडीएम जैसे आला प्रशासनिक अधिकारियों ने आज तक इन प्रभावित गांवों का रुख तक नहीं किया है। प्रशासनिक अधिकारियों की इस घोर उदासीनता के कारण ग्रामीण अंचल के लोग स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते इन सभी मुख्य व ग्रामीण रास्तों का सुधारीकरण और पुलिया निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो समस्त ग्रामवासी मिलकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने पर विवश होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

**- विशेष संवाददाता** – अर्जुन कुमावत
पिपलोदा तहसील
