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4 उपयंत्रियों के भरोसे 86 पंचायतें, पहली बारिश में बह रहा करोड़ों का विकास
विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की बाढ़
अशोकनगर। जिले की सबसे महत्वपूर्ण जनपदों में से एक, मुंगावली की कुल 86 ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं की जिम्मेदारी महज चार उपयंत्रियों के कंधों पर टिकी है। अमले की भारी कमी का सीधा असर धरातल पर दिख रहा है,जहां करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सुदूर सड़कें, अमृत सरोवर, पंचायत भवन और सामुदायिक स्वच्छता परिसर पहली बारिश भी नहीं झेल पा रहे हैं।
उपयंत्रियों की कमी का बहाना बनाकर धड़ल्ले से घटिया निर्माण कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में व्यस्त हैं। मुंगावली जनपद पंचायत में उपयंत्रियों के बीच पंचायतों का आवंटन किसी बड़े अजूबे से कम नहीं है। प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा उपयंत्रियों पर मेहरबानी बरसाई गई है, जिससे उनके पास काम का बोझ इतना बढ़ गया है कि वे महीनों तक किसी पंचायत का रुख भी नहीं कर पाते। मुंगावली जनपद में सबसे ज्यादा ‘प्रभावशाली’ और व्यस्त उपयंत्री सनन यादव हैं।
इनके अकेले के पास 32 ग्राम पंचायतों का जिम्मा है। तकनीकी रूप से देखें तो एक उपयंत्री के लिए महीने में 32 पंचायतों का भौतिक सत्यापन करना पूरी तरह असंभव है। कार्य आवंटन की दौड़ में दूसरे नंबर पर दिलीप राठौर हैं, जिनके पास 28 ग्राम पंचायतें हैं। सनन यादव और दिलीप राठौर, दोनों मिलकर जनपद की 86 में से 60 पंचायतों को नियंत्रित कर रहे हैं। यानी करीब 70 फीसदी मुंगावली इन दोनों इंजीनियर्स के भरोसे है। उपयंत्री युगल किशोर सेंगर इनके पास 14 पंचायतों का प्रभार है। तुलनात्मक रूप से इन पर काम का बोझ कम है, उपयंत्री ए.एन. अंसारी इनके पास सबसे कम, यानी 12 पंचायतें ए.एन. अंसारी के पास हैं।
इस असमान वितरण ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बना दिया है, बल्कि भ्रष्टाचार के लिए एक मुफीद माहौल भी तैयार कर दिया है।उपयंत्री फील्ड पर जाने के बजाय कार्यालय या अपने कमरों में बैठकर ही ‘मूल्यांकन’ कर रहे हैं। बिना मौके पर जाए, सरपंचों और सचिवों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्यों की फाइलें पास कर दी जाती हैं। जल संरक्षण के लिए सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाए जा रहे अमृत सरोवर में घटिया पिचिंग का काम किया गया है। मिट्टी की पार सही से न बांधने के कारण पहली ही तेज बारिश में तालाबों के फूटने का खतरा मंडरा रहा है। पंचायतों में बन रहे सुदूर संपर्क मार्गों में निर्धारित मापदंडों के विपरीत मुरुम की जगह घटिया पीली मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है।
