*सनातन संस्कृति का गौरव बढ़ाएगी ‘महिष्मती बोल बम कावड़ यात्रा’ भव्य तैयारियों के लिए आज महेश्वर में जुटेंगे धर्मप्रेमी*
*विधायक राजकुमार मेव की अगुवाई में 22 अगस्त से शुरू होगी निमाड़ की सबसे बड़ी पैदल कावड़ यात्रा, पहली बैठक आज*
*स्वराज वाणी संवादाता गोतम साल्वे (मंडलेश्वर)*
मण्डलेश्वर। निमाड़ अंचल की आस्था, जन-आकांक्षाओं और शिवभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी ऐतिहासिक ‘महिष्मती बोल बम कावड़ यात्रा’ इस वर्ष अपने गौरवमयी 17वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। अंचल के इस सबसे विशाल धार्मिक आयोजन की अधिकृत शुरुआत आज होने जा रही है, जब यात्रा की विस्तृत रूपरेखा और भव्य तैयारियों को लेकर पहली मुख्य ‘मंगलाचरण बैठक’ का आयोजन किया जा रहा है । महेश्वर के महेतवाड़ा रोड स्थित यमुनाकुंज धर्मशाला में आज प्रातः 10 बजे आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में पूरे क्षेत्र के प्रबुद्ध जन, सामाजिक संगठन और सनातन प्रेमी जुटेंगे, जिसके बाद से ही इस तीन दिवसीय महायात्रा की मैदानी तैयारियां धरातल पर शुरू हो जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि ‘सत्रहवें साल आयोजित होने वाली यह मुख्य पैदल कावड़ यात्रा आगामी 22, 23 और 24 अगस्त 2026 को शनिवार, रविवार व सोमवार को संपन्न होगी। ऐतिहासिक नगरी महेश्वर के पावन नर्मदा तट से जल भरकर हजारों की संख्या में विधायक राजकुमार मेव के साथ हजारो कावड़िए तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के जलाभिषेक के लिए पैदल प्रस्थान करेंगे। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके शुभारंभ के अवसर पर देश और प्रदेश के ख्यातिनाम संत-महात्मा, प्रबुद्ध विचारक और कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि महेश्वर में एकत्रित होते हैं। संतों के सान्निध्य और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब मां नर्मदा के तट से इस यात्रा का आगाज होता है, तो पूरी महेश्वर नगरी सावन के रंग में सराबोर नजर आती है।

इस पूरी यात्रा का नेतृत्व मुख्य आयोजक महेश्वर विधायक राजकुमार मेव करेंगे। ‘तमारो आपणू कावड़ियो भाई’ के रूप में क्षेत्र में पहचान रखने वाले विधायक श्री मेव अपने कंधे पर कावड़ और नर्मदा जी का पवित्र जल उठाकर हजारों श्रद्धालुओं के साथ पैदल सफर तय करेंगे। निमाड़ अंचल की यह सबसे बड़ी कावड़ यात्रा इसलिए भी मानी जाती है क्योंकि इसमें केवल युवा ही नहीं, बल्कि हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी पूरी आस्था के साथ शामिल होते हैं। महेश्वर से शुरू होकर ओंकारेश्वर पहुंचने तक के इस पूरे तीन दिवसीय मार्ग पर जगह-जगह ग्रामीण और सामाजिक संस्थाओं द्वारा पलक-पावड़े बिछाकर कावड़ियों का आत्मीय स्वागत किया जाता है, जिससे पूरा मार्ग ‘बोल बम’ और ‘नर्मदे हर’ के जयघोष से गुंजायमान रहता है।
