MP Promotion Reservation Case: हाईकोर्ट ने प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने से किया इनकार,
मध्य प्रदेश में सरकारी प्रमोशन आरक्षण मामले में बड़ा अपडेट
MP Promotion Reservation Case: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच जबलपुर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई से बड़ा अपडेट सामने आया है। कोर्ट ने फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतिम फैसला आने तक राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है। हालांकि, सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 13 जुलाई तक का समय दिया गया है।
इस फैसले के बाद प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति और प्रशासनिक तबादलों की प्रक्रिया को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है।
Promotion प्रक्रिया रोकने की मांग पर कोर्ट का फैसला
मामले की सुनवाई 7 जुलाई को जबलपुर हाईकोर्ट में हुई थी। इस दौरान पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की गई।
संगठन सपाक्स की ओर से मांग की गई थी कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार को प्रमोशन आदेश जारी करने से रोका जाए।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और प्रमोशन प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है।
कोर्ट के अनुसार—
- प्रमोशन प्रक्रिया पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं है।
- सरकार अपने प्रशासनिक कार्य जारी रख सकती है।
- मामले में सरकार को 13 जुलाई तक जवाब प्रस्तुत करना होगा।
इससे सरकारी विभागों में चल रही पदोन्नति और स्थानांतरण प्रक्रिया जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण टली सुनवाई
बताया जा रहा है कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AG) मौजूद नहीं थे, जिसके कारण मामले की आगे की सुनवाई टाल दी गई।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 जुलाई को प्रस्तावित है।
सपाक्स ने सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सपाक्स ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सपाक्स का कहना है कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है। संगठन का तर्क है कि कोर्ट का कोई लिखित स्थगन आदेश नहीं है, इसलिए केवल मौखिक टिप्पणी के आधार पर प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
सपाक्स का कहना है कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक सरकार को पदोन्नति आदेश जारी करने से बचना चाहिए।
सरकार को 13 जुलाई तक देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 13 जुलाई तक समय दिया है।
अब अगली सुनवाई में सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा, जिसके बाद मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
कर्मचारियों की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में उलझा हुआ है। इस मामले पर प्रदेश के हजारों कर्मचारी और अधिकारी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े इस विवाद का सीधा असर सरकारी विभागों में होने वाली नियुक्तियों, पदोन्नतियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच कर्मचारियों की नजर अब आने वाले निर्णय पर टिकी हुई है। कोर्ट का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।
इस मामले से जुड़े कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे कई कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ रहा है। वहीं, सरकार भी मामले में अपना पक्ष कोर्ट के सामने रख रही है। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ही प्रदेश में प्रमोशन व्यवस्था को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सभी पक्ष 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश के प्रमोशन आरक्षण मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार को राहत देते हुए प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अंतिम फैसले तक प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रह सकती है। वहीं सपाक्स ने सरकार के कदम का विरोध करते हुए वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। अब सभी की नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है।
