MP Promotion News: मध्य प्रदेश में प्रमोशन का रास्ता खुला, 10 साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया; कानूनी राय के आधार पर विभागों ने जारी किए आदेश
MP में सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया अब फिर से शुरू हो गई है। मई 2016 से बंद प्रमोशन का सिलसिला करीब 10 साल बाद एक जुलाई 2026 से दोबारा शुरू किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का आधार वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय को बताया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के संचालन और क्रियान्वयन पर कोई रोक नहीं है।
हालांकि, सरकार द्वारा दी जा रही नई पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। यदि भविष्य में अदालत का फैसला अलग आता है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय के बाद बदली स्थिति
MP में पदोन्नति को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। इसी कारण सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया वर्ष 2016 से रुकी हुई थी। हाल ही में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन से इस मामले में कानूनी राय ली गई।
29 जून 2026 को भेजे गए इस विधिक अभिमत में स्पष्ट किया गया कि न्यायालय द्वारा पदोन्नति नियम 2025 के संचालन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अदालत में दिए गए मौखिक आश्वासन को उस समय की परिस्थितियों के संदर्भ में माना गया था, जब जल्द निर्णय आने की उम्मीद थी। लेकिन परिस्थितियां बाद में बदल गईं।
इस राय के आधार पर राज्य सरकार ने पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
विभागों को जारी किए गए निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने 30 जून को सभी विभागों को पत्र जारी कर महाधिवक्ता की राय और वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन के अभिमत की जानकारी दी। इसके बाद विभागों ने पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी।
मंगलवार को डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति के आदेश भी जारी किए गए। इसके अलावा अन्य विभागों में भी विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी पदोन्नतियां
कानूनी राय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन सभी पदोन्नतियां हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।
अभिमत में मध्य प्रदेश राज्य बनाम विन्नी कुमार बाबेल सहित अन्य मामलों का हवाला दिया गया है। इन मामलों में यह माना गया था कि यदि नियमों को चुनौती देने वाला मामला न्यायालय में लंबित है, तब भी सरकार विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक बुला सकती है और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर सकती है।
हालांकि, अंतिम निर्णय आने के बाद परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
10 साल से प्रभावित थे हजारों कर्मचारी
MP में पदोन्नति प्रक्रिया बंद होने से हजारों सरकारी कर्मचारी प्रभावित हुए थे। कर्मचारियों को लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार था। कई कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो गए, जबकि कई कर्मचारियों की वरिष्ठता और करियर प्रगति पर इसका असर पड़ा।
अब प्रक्रिया शुरू होने से कर्मचारियों में राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक असमंजस भी बना हुआ है।
पूर्व सचिव ने उठाए सवाल
पूर्व सामान्य प्रशासन विभाग सचिव डीएस राय ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने न्यायालय में कोई अंडरटेकिंग दी थी तो उसका पालन किया जाना चाहिए था।
उनके अनुसार, यदि परिस्थितियों में बदलाव आया था तो सरकार को न्यायालय के सामने जाकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। उनका कहना है कि इस मामले से लाखों कर्मचारी जुड़े हुए हैं, इसलिए कोई भी कदम पूरी प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ उठाया जाना चाहिए।
सपाक्स ने भी जताई चिंता
सामान्य, अन्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) ने भी सरकार के फैसले पर चिंता व्यक्त की है।
सपाक्स के अध्यक्ष केपीएस तोमर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने की बात कही थी, जबकि अब पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में न्यायालय का निर्णय सरकार की कार्रवाई के विपरीत आता है तो इससे कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को होने वाली मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों की जिम्मेदारी किसकी होगी।
सरकार का तर्क- नियमों पर कोई रोक नहीं
वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट की ओर से पदोन्नति नियम 2025 के संचालन पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है। इसलिए कानूनी राय के आधार पर प्रक्रिया शुरू की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के अंतिम आदेश का पालन किया जाएगा और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत
MP में करीब एक दशक से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होना सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। सरकार और विभाग अब तेजी से लंबित पदोन्नतियों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले की अंतिम तस्वीर न्यायालय के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों को राहत मिली है, लेकिन कानूनी चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
