Gwalior News: सिंधिया राजपरिवार का 40 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद पर समझौता, कोर्ट में ऑनलाइन पेश होंगे ज्योतिरादित्य और तीनों बुआ
Gwalior News: ग्वालियर के चर्चित सिंधिया राजघराने की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े करीब चार दशक पुराने विवाद का अब समाधान होने जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच चल रहे संपत्ति विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने की प्रक्रिया बुधवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में पूरी की जाएगी। दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
यह मामला सिंधिया राजपरिवार की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद अब परिवार के सदस्यों ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने का फैसला लिया है। न्यायालय में समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस मामले का पटाक्षेप हो जाएगा।
चार दशक पुराने विवाद का होगा अंत
सिंधिया राजघराने की संपत्ति को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 1988-89 के आसपास हुई थी। उस समय केंद्रीय मंत्री रहे माधवराव सिंधिया और उनकी बहनों के बीच पैतृक संपत्ति के अधिकार को लेकर मतभेद सामने आए थे।
वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद यह मामला उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच कानूनी विवाद के रूप में आगे बढ़ा। इसके बाद संपत्ति के बंटवारे और अधिकारों को लेकर न्यायालय में अलग-अलग दावे पेश किए गए।
तीनों बुआओं ने किया था संपत्ति में अधिकार का दावा
राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटियों — राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और ऊषा राजे — ने जिला न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया था।
उनका तर्क था कि पिता की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी समान कानूनी अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें उनका हिस्सा मिलना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने संपत्ति में अपने अधिकार का दावा किया था।
वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी संपत्ति में अपने अधिकार को लेकर अलग से कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चलती रही।
मामला जिला न्यायालय से हाई कोर्ट तक पहुंचा
संपत्ति विवाद से जुड़े दोनों मामले कई वर्षों तक ग्वालियर जिला न्यायालय में विचाराधीन रहे। करीब 16 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2017 में यह मामला हाई कोर्ट पहुंच गया, जहां इसे सिविल रिवीजन के रूप में दर्ज किया गया।
लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और दावे पेश किए। हालांकि अब परिवार के सदस्यों ने आपसी सहमति से विवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
कोर्ट के निर्देश के बाद बनी सहमति
न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान सभी पक्षकारों को आपसी सहमति से समाधान निकालने और राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने विवाद समाप्त करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की थी।
इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से समझौते का आवेदन ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अब बुधवार को अदालत में इस समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि तय समय सीमा में समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को दोबारा बहाल किया जा सकता है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी उपस्थिति
जानकारी के अनुसार, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ — वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे — अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
कोर्ट में दोनों पक्षों की सहमति के बाद राजीनामा रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके साथ ही वर्षों से चले आ रहे इस पारिवारिक और कानूनी विवाद का समाधान हो जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मामला
सिंधिया राजघराना मध्य भारत के सबसे प्रभावशाली राजपरिवारों में से एक माना जाता है। इस संपत्ति विवाद पर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर रही है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनकी बुआ वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। यशोधरा राजे भी मध्य प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं।
ऐसे में इस पारिवारिक समझौते को केवल संपत्ति विवाद के समाधान के रूप में ही नहीं, बल्कि राजपरिवार के भीतर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के अंत के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब खत्म होगी लंबी कानूनी लड़ाई
करीब चार दशक तक चले इस विवाद के बाद अब दोनों पक्षों ने समझौते का रास्ता चुना है। अदालत में औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सिंधिया परिवार की संपत्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई समाप्त हो जाएगी।
यह मामला देश के सबसे चर्चित राजपरिवारों में से एक से जुड़ा होने के कारण लगातार सुर्खियों में रहा। अब आपसी सहमति से हुए इस समाधान के बाद सभी पक्ष आगे बढ़ने की दिशा में कदम रखेंगे।
