जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी चातुर्मास मुंबई के अंतर्गत 12 जुलाई 2026 को मुंबई के परेल-लालबाग स्थित श्री मुनिसुव्रत जिनालय उपाश्रय में भव्य प्रवेश होगा। 44 दिवसीय सामूहिक सिद्धितप, साधु-साध्वी परिवार की उपस्थिति और धार्मिक आयोजनों की पूरी जानकारी पढ़ें।
जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी चातुर्मास मुंबई: 12 जुलाई को होगा ऐतिहासिक भव्य प्रवेश, 44 दिवसीय सामूहिक सिद्धितप का भी होगा आयोजन
मुंबई।
जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी चातुर्मास मुंबई इस वर्ष पूरे जैन समाज के लिए अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनने जा रहा है। परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री जयघोषसूरीश्वरजी महाराजा के कृपाप्राप्त प्रिय पट्टधर एवं सिद्धवचनी रोचक प्रवचनकार जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी महाराजा आदि ठाणा का वर्ष 2026 का पावन चातुर्मास मुंबई में आयोजित होगा।
इस ऐतिहासिक चातुर्मास के शुभ अवसर पर 12 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजे भव्य प्रवेश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह प्रवेश यात्रा गुंदेचा गार्डन से प्रारंभ होकर श्री मुनिसुव्रत जिनालय उपाश्रय, करी रोड (पूर्व), परेल-लालबाग, मुंबई स्थित अविघ्न एस्टेट पहुंचेगी, जहां पूरे चातुर्मास के दौरान विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी चातुर्मास मुंबई का होगा ऐतिहासिक आयोजन
इस वर्ष का जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी चातुर्मास मुंबई कई मायनों में विशेष माना जा रहा है। संघ के अनुसार इस स्थान पर पहली बार इतना विशाल और ऐतिहासिक चातुर्मास आयोजित किया जा रहा है। पूरे मुंबई सहित महाराष्ट्र और देशभर से श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।
धर्मसभा, प्रवचन, तप, आराधना, स्वाध्याय, धार्मिक संस्कार एवं सामूहिक अनुष्ठानों के माध्यम से यह चातुर्मास श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।
12 जुलाई को सुबह 8 बजे निकलेगी भव्य प्रवेश यात्रा
संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रवेश यात्रा 12 जुलाई को प्रातः 8 बजे गुंदेचा गार्डन से प्रारंभ होगी।
यह यात्रा धार्मिक ध्वज, मंगल गीत, भक्ति संगीत और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकाली जाएगी। यात्रा का समापन श्री मुनिसुव्रत जिनालय उपाश्रय, करी रोड (पूर्व), परेल-लालबाग, मुंबई स्थित अविघ्न एस्टेट में होगा।
H2: गुरुदेव के साथ रहेगा चार संतों का पावन ठाणा
इस पावन चातुर्मास में जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी महाराजा के साथ
- मुनिश्री लब्धिनिधान विजयजी म.सा.
- मुनिश्री देवांगरत्न विजयजी म.सा.
- मुनिश्री योगपुण्य विजयजी म.सा.
सहित कुल चार संतों का ठाणा विराजमान रहेगा।
श्रद्धालुओं को पूरे चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, धर्मचर्चा एवं तप आराधना का लाभ प्राप्त होगा।
साध्वी श्री नंदिवर्धनाश्रीजी सहित पांच साध्वीजी परिवार भी रहेगा उपस्थित
महिलाओं की विशेष धार्मिक आराधना कराने के लिए बेन साध्वी श्री नंदिवर्धनाश्रीजी के नेतृत्व में पांच साध्वीजी परिवार भी इस ऐतिहासिक चातुर्मास में पधारेंगे।महिलाओं के लिए विशेष प्रवचन, तप, स्वाध्याय और धार्मिक संस्कारों का आयोजन किया जाएगा।
44 दिवसीय सामूहिक सिद्धितप का विराट आयोजन
इस वर्ष के चातुर्मास की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 44 दिवसीय सामूहिक सिद्धितप का विराट आयोजन रहेगा।गुरुदेव एवं संघ ने इसे
- सर्व चिंताचूरक
- सर्व सिद्धिदायक
- मोक्षमार्ग का श्रेष्ठ साधन
बताते हुए अधिकाधिक श्रद्धालुओं से इसमें भाग लेने का आग्रह किया है।संघ का कहना है कि सामूहिक सिद्धितप के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आध्यात्मिक साधना से जुड़ेंगे।
जैन समाज से तन-मन-धन से सहयोग का आह्वान
चातुर्मास आयोजन समिति एवं संघ ने सभी श्रद्धालुओं, परिवारों और समाजजनों से इस ऐतिहासिक आयोजन में तन, मन एवं धन से सहयोग करने का आग्रह किया है।संघ ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पूरे समाज के आध्यात्मिक उत्थान का महापर्व है। इसलिए प्रत्येक परिवार को इसमें अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
पूरे चातुर्मास में होंगे अनेक धार्मिक कार्यक्रम
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक गतिविधियों का आयोजन होगा, जिनमें प्रमुख रूप से—
- मंगल प्रवचन
- नवकारसी
- सामूहिक तप
- स्वाध्याय
- सिद्धितप
- आराधना
- धर्मसभा
- बच्चों के संस्कार शिविर
- महिलाओं की विशेष धार्मिक आराधना
- सामूहिक पूजन
- जैन संस्कृति पर विशेष प्रवचन
शामिल रहेंगे।
श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण
मुंबई जैन समाज में इस ऐतिहासिक चातुर्मास को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन समिति ने व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। प्रवेश यात्रा से लेकर चातुर्मास के समापन तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है।
निष्कर्ष
जैनाचार्य श्री विजय हरिकांतसूरीश्वरजी चातुर्मास मुंबई केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि श्रद्धा, तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व बनने जा रहा है। 12 जुलाई को होने वाला भव्य प्रवेश तथा 44 दिवसीय सामूहिक सिद्धितप पूरे जैन समाज के लिए अविस्मरणीय अवसर होगा।संघ ने सभी धर्मप्रेमियों से इस ऐतिहासिक आयोजन में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।
