सरस्वती शिशु उच्च विद्या मंदिर गुलावता में प्रांतीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह रघुवंशी, प्रांत प्रमुख चंद्रहंस पाठक एवं जिला प्रमुख अखिलेश दुबे के मार्गदर्शक आगमन पर विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और संस्कार का संदेश दिया गया। विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।
सरस्वती शिशु उच्च विद्या मंदिर गुलावता में प्रांतीय पदाधिकारियों का प्रेरणादायी मार्गदर्शक आगमन
सरस्वती शिशु उच्च विद्या मंदिर गुलावता में प्रांतीय पदाधिकारियों का प्रेरणादायी मार्गदर्शक आगमन
पड़ाना | संवाददाता
ग्राम भारती शिक्षा समिति, जिला ब्यावरा द्वारा संचालित सरस्वती शिशु उच्च विद्या मंदिर गुलावता में प्रांतीय समिति के पदाधिकारियों का गरिमामय एवं प्रेरणादायी आगमन हुआ। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन, संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण के विषय पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विद्यालय परिसर पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर दिखाई दिया।विद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, प्रणव अक्षर ‘ॐ’ एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर वंदना सत्र के साथ किया गया। दीप प्रज्ज्वलन का शुभ कार्य प्रांतीय समिति के सम्माननीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह रघुवंशी, प्रांत प्रमुख चंद्रहंस पाठक तथा जिला प्रमुख अखिलेश दुबे के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
अतिथियों का आत्मीय स्वागत
कार्यक्रम में प्राथमिक इकाई प्रमुख राधेश्याम नागर ने सभी अतिथियों का परिचय कराते हुए उनके सामाजिक एवं शैक्षणिक योगदान की जानकारी उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को दी।इसके उपरांत वरिष्ठ आचार्य गोपाल राजपूत, कार्यालय प्रमुख सुनील सोमानी एवं जीवन चंद्रवंशी ने सभी अतिथियों का तिलक लगाकर, श्रीफल एवं अंगवस्त्र भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।विद्यालय परिवार द्वारा किए गए सम्मान से अतिथि अभिभूत दिखाई दिए।
विद्यार्थियों को मिला प्रेरणादायी मार्गदर्शन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह रघुवंशी ने विद्यार्थियों से कहा कि केवल पुस्तक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में अनुशासन, संस्कार, चरित्र निर्माण और कर्तव्य पालन भी समान रूप से आवश्यक हैं।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें।उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय का सदुपयोग, माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान तथा राष्ट्र सेवा की भावना को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
शिक्षा के साथ संस्कार ही सफलता की पहचान
अपने उद्बोधन में महेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि विद्यालयों में मिलने वाले संस्कार ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनते हैं। यदि विद्यार्थी अनुशासन, सत्य, ईमानदारी एवं परिश्रम को अपनाते हैं तो वे निश्चित रूप से जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं।उनके प्रेरक विचारों से प्रभावित होकर विद्यालय के सभी भैया-बहनों ने शिक्षा के साथ संस्कारों को अपनाने तथा देश के आदर्श नागरिक बनने का संकल्प लिया।
विद्यालय परिवार की रही सक्रिय सहभागिता
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य गिरीश बैरागी सहित समस्त आचार्य परिवार उपस्थित रहा।कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन राधेश्याम नागर द्वारा किया गया। पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अनुशासित एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता निभाई।
पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी अतिथियों ने विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के साथ पौधारोपण किया।इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण एवं प्रकृति संवर्धन का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं उनकी नियमित देखभाल करने की प्रेरणा दी गई।अतिथियों ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को संतुलित नहीं रखते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य की भी आधारशिला हैं।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
- मां सरस्वती एवं भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन
- प्रांतीय पदाधिकारियों का गरिमामय स्वागत
- विद्यार्थियों को शिक्षा एवं संस्कार पर प्रेरक मार्गदर्शन
- अनुशासन एवं राष्ट्र निर्माण का संदेश
- पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
- विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता
निष्कर्ष
सरस्वती शिशु उच्च विद्या मंदिर गुलावता में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। प्रांतीय समिति के पदाधिकारियों ने शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में समझाया। वहीं कार्यक्रम के अंत में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया, जिससे विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।
संवाददाता : पड़ाना
