पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती से 25 साल बाद स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है। डॉ. अभिलाषा चौधरी ने मेडिकल ऑफिसर का कार्यभार संभाला। जानिए पूरी खबर, ग्रामीणों की मांग और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति।
पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती: 25 साल बाद बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
संवाददाता
पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती: 25 साल बाद बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
पड़ाना। पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुई है। शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पड़ाना के 25 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी महिला एमबीबीएस चिकित्सक की नियुक्ति हुई है। डॉ. तन्मय मोदी के देवास स्थानांतरण के बाद डॉ. अभिलाषा चौधरी ने मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इससे पहले वे सिविल अस्पताल सारंगपुर में अपनी सेवाएं दे रही थीं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती से विशेष रूप से महिलाओं, गर्भवती माताओं और किशोरियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
डॉ. अभिलाषा चौधरी का किया गया भव्य स्वागत
अस्पताल पहुंचने पर अल्पसंख्यक मोर्चा मंडल अध्यक्ष शरीफ मंसूरी, सेल्फी कांग्रेस प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष रामबाबू सेन, सर प्रद्युम्न परमार, कैलाश टेलर, मुकेश जलोदिया, संतोष चतुर्वेदी, रघु परमार, दिनेश परमार और सतीश गोस्वामी सहित अन्य नागरिकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।
क्षेत्रवासियों ने कहा कि लंबे समय से महिला चिकित्सक की मांग की जा रही थी, जो अब पूरी हुई है।
वर्ष 1998 से पहली बार महिला चिकित्सक की नियुक्ति
वर्ष 1998 में स्थापित छह बिस्तरों वाला शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पड़ाना नगर सहित आसपास के दर्जनों गांवों की लगभग 50 हजार आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है।लेकिन स्थापना के बाद से यहां कभी महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई थी। इसके कारण महिलाओं को प्रसव एवं स्त्री रोग संबंधी उपचार के लिए सारंगपुर, शुजालपुर, शाजापुर या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था।अब पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती से यह स्थिति बदलने की उम्मीद जगी है।
महिलाओं और गर्भवती माताओं को मिलेगा सीधा लाभ
डॉ. अभिलाषा चौधरी की नियुक्ति के बाद अब क्षेत्र की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।इससे—
- गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच आसान होगी।
- प्रसूताओं को समय पर उपचार मिलेगा।
- किशोरियों की स्वास्थ्य जांच बेहतर होगी।
- बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी।
- महिला मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख कम करना पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2020 में डिलीवरी के दौरान दो महिलाओं की मौत के बाद अधिकांश प्रसूताएं बाहर के अस्पतालों में जाने को मजबूर थीं। अब महिला डॉक्टर की उपलब्धता से स्थानीय अस्पताल पर लोगों का भरोसा फिर से बढ़ेगा।
अस्पताल में स्टाफ की कमी बनी हुई चुनौती
हालांकि महिला डॉक्टर की नियुक्ति के बावजूद अस्पताल में स्टाफ की कमी अब भी बनी हुई है।लंबे समय से प्रसव सेवाएं संभाल रही प्रशिक्षित एएनएम लक्ष्मी जाट का हाल ही में टीकोद उपस्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरण हो गया है, जिससे एएनएम का पद रिक्त हो गया है।वर्तमान में अस्पताल में—
- नर्स ज्योति पालीवाल
- फार्मासिस्ट सीमा पाटीदार
- लैब टेक्नीशियन
अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने शासन से की जल्द नियुक्ति की मांग
ग्रामीण शिल्पी कांग्रेस प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष रामबाबू सेन, नानासाहब परमार, नाहर सिंह गुर्जर, दिनेश सेन, नारायण परमार, समीर अंसारी, संजय सिरोलिया, सौरभ परिहार और जितेंद्र खाती सहित अन्य लोगों ने शासन से मांग की है कि रिक्त एएनएम पद सहित अन्य आवश्यक पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि सभी पद भर दिए जाएं तो क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर एवं सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
बीएमओ ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा
बीएमओ सारंगपुर डॉ. मनीष चौहान ने बताया कि पड़ाना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक की पदस्थापना हो चुकी है।उन्होंने कहा कि एएनएम की व्यवस्था के लिए उच्च अधिकारियों से चर्चा की जा रही है तथा जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
पड़ाना अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं बल्कि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव है। करीब 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद महिला चिकित्सक मिलने से विशेष रूप से महिलाओं, गर्भवती माताओं और बच्चों को राहत मिलेगी। हालांकि अस्पताल में रिक्त पदों की पूर्ति भी उतनी ही आवश्यक है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित हो सकें।
