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1 महीने से ठप पड़ी पडाना सफाई व्यवस्था: सड़कों पर कचरे के ढेर, बीमारी का बढ़ा खतरा | ग्राम पंचायत की बड़ी लापरवाही

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Published On: 6 July 2026

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पडाना सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई। 1 महीने से कचरा वाहन बंद होने से गांव की सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत पर लापरवाही का आरोप लगाया।

पडाना सफाई व्यवस्था: 1 महीने से ठप कचरा वाहन, सड़कों पर फिर लगे कचरे के ढेर, बीमारी का बढ़ा खतरा

पडाना। पडाना सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है। जनपद क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत पडाना में पिछले लगभग एक महीने से कचरा वाहन बंद पड़ा हुआ है, जिसके कारण गांव की मुख्य सड़कें, गलियां और चौराहे फिर से कचरे के ढेर से भर गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वाहन बीच में केवल एक दिन आया था, लेकिन उसके बाद से नियमित कचरा उठाव नहीं हुआ। इसके चलते गांव में गंदगी फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

पडाना सफाई व्यवस्था हुई बदहाल

जनपद क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत पडाना में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। गांव में घर-घर से कचरा संग्रहण करने वाला कचरा वाहन पिछले एक महीने से बंद पड़ा हुआ है। नियमित कचरा उठाव नहीं होने से गांव के लोग मजबूरी में घरों का कचरा सड़क किनारे, खाली जगहों और नालियों के आसपास फेंक रहे हैं।इस स्थिति ने पूरे गांव की स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है।

एक महीने से बंद है कचरा वाहन

ग्रामीणों के अनुसार पिछले लगभग एक महीने से कचरा वाहन संचालित नहीं हो रहा है। इस दौरान केवल एक दिन वाहन गांव में आया, लेकिन उसके बाद से दोबारा कोई व्यवस्था नहीं की गई।कचरा वाहन बंद होने के कारण गांव में रोजाना निकलने वाला घरेलू कचरा जमा होता जा रहा है और जगह-जगह बड़े-बड़े कचरे के ढेर बन गए हैं।

सड़कों और गलियों में फैली गंदगी

गांव की मुख्य सड़कें, मोहल्ले, गलियां और सार्वजनिक स्थान गंदगी से अटे पड़े हैं। कई स्थानों पर कचरा कई दिनों से जमा है जिससे लगातार बदबू फैल रही है।बरसात के मौसम में यह स्थिति और गंभीर होती जा रही है क्योंकि कचरे के ढेरों में पानी भरने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

पडाना सफाई व्यवस्था से बीमारी फैलने का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खुले में पड़ा कचरा मच्छर, मक्खी और अन्य कीटों को बढ़ावा देता है, जिससे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सफाई व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो गांव में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत पर लगाए लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद नियमित कचरा उठाव शुरू नहीं किया गया।ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का प्राथमिक दायित्व गांव को स्वच्छ रखना और नियमित कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करना है, लेकिन वर्तमान में यह जिम्मेदारी पूरी तरह नजरअंदाज होती दिखाई दे रही है।

पंचायत की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

स्वच्छता केवल सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि ग्राम पंचायत की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नियमित कचरा संग्रहण, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पंचायत के आवश्यक कार्यों में शामिल हैं।यदि समय रहते व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो ग्रामीणों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और ग्राम पंचायत से मांग की है कि—

  • तत्काल कचरा वाहन पुनः शुरू किया जाए।
  • नियमित घर-घर कचरा संग्रहण किया जाए।
  • गांव के सभी सार्वजनिक स्थानों से कचरा हटाया जाए।
  • नियमित सफाई अभियान चलाया जाए।
  • बरसात के मौसम को देखते हुए फॉगिंग एवं दवा का छिड़काव कराया जाए।

निष्कर्ष

पडाना सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति अब केवल स्वच्छता का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। यदि ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासन जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाते हैं तो आने वाले दिनों में बीमारी फैलने का खतरा और अधिक बढ़ सकता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी शीघ्र हस्तक्षेप कर गांव की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाएंगे।

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