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बारिश में जलमग्न शहरों की असली वजह क्या है? नागरिकों की छोटी लापरवाही कैसे बन रही है बड़े जलभराव का कारण

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Published On: 6 July 2026
बारिश में जलमग्न शहरों की असली वजह क्या है? नागरिकों की छोटी लापरवाही कैसे बन रही है बड़े जलभराव का कारण

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प्रकाशन हेतु
बारिश से जलमग्न हर शहर : परेशान नागरिक
आप डूबे तो जग डूबा, आप उभरे तो जग उभरा
पांच या दस मिनट की थोड़ी तेज बारिश और शहर जल मग्न हो जाता है । नाले और सड़क पानी से समतल हो जाते हैं । लगता है पूरी सड़क पर तालाब या नदी है । नालियां ओवरफ्लो हो जाती है । नालो का पानी, सड़कों का पानी लौटकर गलियों में आने लगता है । गली मोहल्ले पूरे पानी से डूब जाते हैं ।

दो-दो फीट पानी से भर जाते हैं । और तो और कुछ मकानों में भी जो नीचे है पानी चला जाता है । मेरठ, दिल्ली या हो मुंबई ,हर शहर का यही हाल है,लोग परेशान है ,क्या समाधान है ? हर समस्या की जड़ आदमी है ,और समाधान भी आदमी ही है । जैसे ही जल भराव होता है हम नगर निगम , निर्माण विभाग को टूटे मैनहोल, भरे हुए नालों के लिए कोसने में लगते हैं । पर हम भूल जाते हैं यह जो नाले नालियां भरी हुई है ,ये नगर निगम वालों ने आकर नहीं भरी ,हमने भरी है ।

दशकों से सरकार प्लास्टिक हटाओ की मुहिम चला रही है । पर सरकार कभी भी प्लास्टिक की पन्नी बनाने वाली फैक्ट्रीयो को बंद नहीं करवाती । यह सरकार की महानता है या दोगलापन । आप तय करें । कुछ दिन पन्नी वालों के लिए सब्जी ठेला पर, दुकानों पर पन्नी की चेकिंग अभियान चलाया जाता है । और महीना बांधकर ठप हो जाता है ।
पर वही ढाक के तीन पात । सब कुछ वैसे ही चलता रहता है। पन्नियां नालों, नालियों के ब्लॉक होने और पानी भरने की मूल जड़ है । हमें खुद ही जागना होगा । बाजार जाते समय कपड़े का थैला या जूट का थैला ले जाना होगा । पन्नियों को बाय-बाय टाटा कहना होगा ।

जब हम पन्नियों को लेना बंद कर देंगे तो दुकानदार खुद ही पन्नियों में सामान देना बंद कर देंगे । मेरी कई दुकानदारों से बात हुई है । वह कहते हैं कि यह हम क्या करें हर ग्राहक पन्नी में सामान मांगता है । कागज के लिफाफे में सामान लेने से मना करता है । दोस्तों नगर निगम और अन्य संस्थाओं को तो अपना काम करना ही चाहिए । और हमें उनका आभार व्यक्त करना चाहिए की हर साल स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और वह कोई सबक सिखने को तैयार नहीं है ।

पर हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम पन्नियों का उपयोग न करें । पन्नी में कूड़ा भरकर नालियों, नालों में ना डाले । हम नालों और नालियों पर अतिक्रमण न करें । जिससे सफाई कर्मी आसानी से सफाई कर सके । हमें खुद ही जागना होगा तभी इस समस्या से निदान पाया जा सकता है । आप डूबे तो जग डूबा, आप उभरे तो जग उभरा, तो उभरो मेरे शहर के नागरिकों और समस्या से निदान पा लो ।

इंजी. कवि अतिवीर जैन * पराग *
पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय
मोबाइल 94569 66722 what’s up
232/1डी,शिवलोक ,
कंकर खेड़ा, मेरठ केंट-250001

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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