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Bankipur उपचुनाव बना बिहार की सियासत का बड़ा इम्तिहान, सम्राट चौधरी, प्रशांत किशोर, बीजेपी, आरजेडी में त्रिकोणीय मुकाबला निर्णायक

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Published On: 6 July 2026
Bankipur उपचुनाव बना बिहार की सियासत का बड़ा इम्तिहान, सम्राट चौधरी, प्रशांत किशोर, बीजेपी, आरजेडी में त्रिकोणीय मुकाबला निर्णायक

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Bankipur उपचुनाव: बिहार की सियासत में नई परीक्षा का मैदान

बिहार की राजधानी पटना की Bankipur विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब केवल एक सामान्य राजनीतिक मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि इसे राज्य की नई राजनीतिक दिशा और नेतृत्व की क्षमता की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। यह चुनाव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए भी एक अहम अग्निपरीक्षा माना जा रहा है।

सीट खाली होने की वजह और चुनावी माहौल

बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा में चुने जाने के बाद खाली हुई है। इसके बाद यहां उपचुनाव की घोषणा की गई, जिसकी मतदान प्रक्रिया 30 जुलाई को प्रस्तावित है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 13 जुलाई तक उम्मीदवार अपने पर्चे दाखिल कर सकते हैं।

बीजेपी ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। इस बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला त्रिकोणीय

प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद बांकीपुर का चुनाव अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गया है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस सीट पर प्रशांत किशोर के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी, जबकि आरजेडी और बीजेपी दोनों ही पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को बिहार की जनता के लिए एक जनमत संग्रह बताया है। उनके अनुसार यह चुनाव राज्य में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर जनता की राय को स्पष्ट करेगा।

Bankipur: बीजेपी का मजबूत गढ़

बांकीपुर सीट को बीजेपी का अजेय किला माना जाता है। यह क्षेत्र पिछले तीन दशकों से बीजेपी के कब्जे में है। 1995 से लेकर अब तक यह सीट लगातार पार्टी के पास रही है।

नितिन नवीन इस सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने गए हैं। उनके पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2015, 2020 और 2025 के चुनावों में बीजेपी ने यहां भारी अंतर से जीत दर्ज की है।

मतदाता समीकरण और जातीय गणित

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3.91 लाख मतदाता हैं। यहां का जातीय समीकरण चुनाव परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कायस्थ समुदाय लगभग 14 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सबसे प्रभावशाली माना जाता है और पारंपरिक रूप से बीजेपी का समर्थन करता रहा है। इसके अलावा यादव (12%), मुस्लिम (10%), वैश्य (9%), चंद्रवंशी (9%), दलित (8%), भूमिहार (7%), ब्राह्मण (7%), राजपूत (5%), कुर्मी (5%) और कुशवाहा (3%) मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

आरजेडी का मुख्य आधार यादव और मुस्लिम मतदाता माने जाते हैं, जबकि बीजेपी को कायस्थ, वैश्य, ब्राह्मण और राजपूत समुदायों का समर्थन मिलता रहा है। इस बार प्रशांत किशोर की मौजूदगी से पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

सम्राट चौधरी के लिए पहली बड़ी परीक्षा

यह उपचुनाव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा चुनावी परीक्षण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव केवल सीट जीतने का नहीं, बल्कि सरकार के प्रदर्शन पर जनता की राय का संकेत भी देगा। यदि बीजेपी यहां अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखती है, तो इसे एनडीए सरकार की लोकप्रियता का प्रमाण माना जाएगा।

विपक्ष और मुद्दों की राजनीति

आरजेडी इस चुनाव को सरकार के खिलाफ जन असंतोष के रूप में पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और हाल की घटनाओं को लेकर जनता में नाराजगी है, जिसका असर मतदान में दिखेगा।

वहीं बीजेपी का दावा है कि पार्टी का वोट बैंक मजबूत है और कोई भी विपक्षी ताकत इसे प्रभावित नहीं कर सकती।

प्रशांत किशोर की रणनीति और प्रभाव

प्रशांत किशोर इस चुनाव को केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि बिहार की नई राजनीतिक दिशा तय करने वाला अवसर मान रहे हैं। उनकी जन सुराज पार्टी पहली बार किसी बड़े चुनावी मुकाबले में उतर रही है।

उन्होंने हाल के महीनों में राज्य के कई मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है, जिससे उन्हें युवाओं और शहरी मतदाताओं में समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।

निष्कर्ष

बांकीपुर उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है। यह चुनाव बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों, नए राजनीतिक प्रयोगों और पारंपरिक दलों की ताकत की परीक्षा बन गया है।

एनडीए के लिए यह सत्ता की स्थिरता का सवाल है, आरजेडी के लिए वापसी की उम्मीद और प्रशांत किशोर के लिए राजनीतिक भविष्य की पहली बड़ी कसौटी। 30 जुलाई को आने वाला परिणाम बिहार की सियासत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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