जस्टिस Binod Kumar Dwivedi बने एमपी रेरा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष
मध्यप्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति Binod Kumar Dwivedi को मध्यप्रदेश भू-संपदा अपीलीय अधिकरण (MP REAT) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति मध्यप्रदेश भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 45 के प्रावधानों के तहत की गई है। न्यायमूर्ति द्विवेदी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर से सेवानिवृत्त हैं और न्यायिक सेवा में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पांच वर्ष या 67 वर्ष की आयु तक रहेगा कार्यकाल
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मध्यप्रदेश भू-संपदा अपीलीय अधिकरण (एमपी आरईएटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम पांच वर्ष तक निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि उनका कार्यकाल 67 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक ही रहेगा। इन दोनों में से जो भी अवधि पहले पूरी होगी, उसी आधार पर उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
आदेश में स्पष्ट रूप से यह भी उल्लेख किया गया है कि इस पद पर पुनर्नियोजन की कोई व्यवस्था नहीं होगी और न्यायमूर्ति द्विवेदी भविष्य में दोबारा इस पद के लिए पात्र नहीं होंगे। इस प्रावधान का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के नियमों से संवैधानिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली में स्थिरता आती है तथा पदों के दुरुपयोग की संभावनाएं कम होती हैं। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि समयबद्ध तरीके से नई नियुक्तियों का अवसर मिलता रहे और संस्थागत कार्य प्रणाली प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
वेतन और सेवा शर्तें नियमों के अनुसार
सरकारी आदेश के अनुसार, मध्यप्रदेश भू-संपदा अपीलीय अधिकरण (एमपी आरईएटी) के अध्यक्ष के वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तें मध्यप्रदेश रेरा अपीलीय प्राधिकरण (वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें) नियम, 2017 के तहत निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के अनुसार ही उन्हें पद पर रहते हुए सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान मिलने वाली सभी सुविधाएं एक तय ढांचे और मानक के अनुसार हों तथा किसी प्रकार की अनियमितता या असमानता की स्थिति उत्पन्न न हो।
इसके अलावा, प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी इन्हीं नियमों के अनुरूप संचालित होंगी, जिससे अधिकरण के कामकाज में पारदर्शिता और सुचारू संचालन बना रहे। इस व्यवस्था का उद्देश्य संस्थागत कार्यप्रणाली को मजबूत करना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट सेवा शर्तें और नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाएं न्यायिक और प्रशासनिक पदों पर कार्य करने वाले अधिकारियों को बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करती हैं, जिससे अधिकरण की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता दोनों में वृद्धि होती है।
पहले जस्टिस वीपीएस चौहान संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश भू-संपदा अपीलीय अधिकरण (एमपी आरईएटी) के अध्यक्ष पद पर इससे पहले न्यायमूर्ति वीपीएस चौहान अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कार्यकाल में अधिकरण ने रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और रेरा प्राधिकरण के आदेशों के विरुद्ध दायर अपीलों का निपटारा किया। अब उनके बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी को इस महत्वपूर्ण संस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। न्यायमूर्ति द्विवेदी के पास न्यायिक सेवा का लंबा अनुभव है और उनसे उम्मीद की जा रही है
कि उनके नेतृत्व में अधिकरण रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विवादों के त्वरित एवं निष्पक्ष समाधान की दिशा में प्रभावी भूमिका निभाएगा। रेरा अधिनियम का उद्देश्य घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना, रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और बिल्डरों व खरीदारों के बीच उत्पन्न विवादों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना है। ऐसे में नए अध्यक्ष की नियुक्ति को रियल एस्टेट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी न्यायिक नेतृत्व मिलने से अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी तथा व्यवस्थित हो सकती है।
क्या है एमपी रेरा अपीलीय अधिकरण?
मध्यप्रदेश भू-संपदा अपीलीय अधिकरण (MP REAT) रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत गठित एक विशेष अपीलीय संस्था है। इसका मुख्यालय भोपाल में स्थित है। यह अधिकरण रेरा प्राधिकरण (RERA) या न्याय निर्णायक अधिकारी द्वारा दिए गए आदेशों और फैसलों के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई करता है।
यह संस्था रियल एस्टेट परियोजनाओं, बिल्डरों, डेवलपर्स और घर खरीदारों के बीच उत्पन्न विवादों से संबंधित अपीलों का निपटारा करती है। यदि कोई पक्ष रेरा के आदेश से संतुष्ट नहीं होता, तो वह निर्धारित अवधि के भीतर इस अधिकरण में अपील कर सकता है।
60 दिनों के भीतर की जा सकती है अपील
रेरा प्राधिकरण के किसी भी आदेश के खिलाफ प्रभावित पक्ष को निर्णय की तिथि से 60 दिनों के भीतर एमपी रेरा अपीलीय अधिकरण में अपील दायर करनी होती है। अधिकरण दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय देता है। यदि कोई व्यक्ति ट्रिब्यूनल के फैसले से भी असंतुष्ट रहता है, तो वह आगे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कानूनी अपील करने का अधिकार रखता है।
