—Advertisement—

Ujjain News: भस्म आरती में खुले बाबा महाकाल के त्रिनेत्र, पंचमी तिथि पर दिव्य श्रृंगार के साथ हुए अलौकिक दर्शन

Author Picture
Published On: 4 July 2026
Ujjain
— Ujjain News: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की पंचमी पर बाबा श्री महाकाल ने भस्म आरती में खुले त्रिनेत्र के साथ भक्तों को दिव्य दर्शन दिए

—Advertisement—

Ujjain News: भस्म आरती में खुले बाबा महाकाल के त्रिनेत्र, पंचमी तिथि पर दिव्य श्रृंगार के साथ हुए अलौकिक दर्शन

Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर शनिवार सुबह आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान श्री महाकाल का विधि-विधान से पूजन, अभिषेक और भव्य श्रृंगार किया गया। इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल के त्रिनेत्र खुले रहे, जिसने भक्तों को दिव्य और दुर्लभ दर्शन कराए। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

तड़के 4 बजे खुले मंदिर के पट

शनिवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ठीक चार बजे मंदिर के पट खोले गए। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान से आज्ञा ली गई, जिसके बाद गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत की।

इसके बाद भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से महाभिषेक किया गया। प्रथम घंटानाद के साथ ‘हरि ओम’ मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान को पवित्र जल अर्पित किया गया। पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से आध्यात्मिक वातावरण बन गया।

भव्य श्रृंगार और भस्म आरती का दिव्य दृश्य

महाभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया और पारंपरिक अलंकरण से उनका मनमोहक स्वरूप सजाया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण के दौरान झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु “जय श्री महाकाल” और “हर-हर महादेव” के जयघोष करते हुए बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन करते रहे।

त्रिनेत्र दर्शन बने आज के श्रृंगार की विशेषता

शनिवार की भस्म आरती की सबसे बड़ी विशेषता भगवान महाकाल का खुला हुआ त्रिनेत्र रहा। मान्यता है कि भगवान शिव का त्रिनेत्र ज्ञान, शक्ति और संहार का प्रतीक है। जब भगवान महाकाल त्रिनेत्र स्वरूप में दर्शन देते हैं तो इसे अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है।

भक्तों ने इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक क्षण को अपनी आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।

निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद वे निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण महाकाल मंदिर की भस्म आरती को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में विशेष महत्व प्राप्त है।

हर दिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

देर रात से लगी रही श्रद्धालुओं की कतार

शनिवार होने और पंचमी तिथि के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। कई भक्त देर रात से ही मंदिर के बाहर कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए थे। पुलिस और मंदिर कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से गर्भगृह तक पहुंचाया।

Ujjain भस्म आरती का धार्मिक महत्व

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती सनातन परंपरा की सबसे प्राचीन और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। इस आरती में भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की जाती है, जो जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का प्रतीक मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव श्मशानवासी हैं और उन्हें भस्म अत्यंत प्रिय है। इसी कारण प्रतिदिन प्रातःकाल उनकी भस्म आरती की जाती है। इस दिव्य अनुष्ठान को देखने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

महाकाल मंदिर में आरतियों का समय

आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक महाकाल मंदिर में आरतियों का समय इस प्रकार रहेगा—

  • भस्म आरती: प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
  • दद्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती: प्रातः 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती: रात्रि 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम

शनिवार की भस्म आरती में खुले त्रिनेत्र स्वरूप के दर्शन ने श्रद्धालुओं की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया। पूरे मंदिर परिसर में गूंजते “जय श्री महाकाल” और “हर-हर महादेव” के जयघोष ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी दिव्य बना दिया। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक भी है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp