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Ujjain E-Rickshaw Scam: ऐप से वाहन ‘हैक’ कर लूटने वाला गिरोह बेनकाब, युवक हिरासत में

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Published On: 3 July 2026
Ujjain E-Rickshaw Scam: ऐप से वाहन ‘हैक’ कर लूटने वाला गिरोह बेनकाब, युवक हिरासत में

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Ujjain E-Rickshaw ठगी मामला: ऐप से वाहन ‘हैक’ कर लूटने वाला गिरोह बेनकाब, युवक हिरासत में

उज्जैन में तकनीक से जुड़ी सनसनीखेज ठगी का खुलासा

मध्य प्रदेश के Ujjain E-Rickshaw चालकों को निशाना बनाकर की जा रही एक अनोखी और चौंकाने वाली ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोग मोबाइल ऐप की मदद से चलते ई-रिक्शा को अचानक बंद कर देते थे और फिर खुद को “तकनीकी विशेषज्ञ” बताकर पैसे वसूलते थे।

इस पूरे मामले ने स्थानीय परिवहन व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे होती थी ठगी?

पुलिस और पीड़ित चालकों के अनुसार यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से किया जाता था।

ठगी का तरीका:

  • ई-रिक्शा को मोबाइल ऐप से दूर से बंद कर दिया जाता था
  • चालक अचानक वाहन रुकने से घबरा जाता था
  • कुछ देर बाद आरोपी मौके पर पहुंचते थे
  • खुद को “टेक्निकल एक्सपर्ट” बताकर मदद का नाटक करते थे
  • वाहन चालू करने के बदले 200 से 300 रुपये वसूलते थे

यह घटनाएं ज्यादातर देर रात सुनसान इलाकों में होती थीं, जहां चालक असहाय महसूस करते थे।

देर रात सुनसान इलाकों में निशाना बनाते थे चालक

जानकारी के मुताबिक, यह गिरोह खासकर रात के समय सक्रिय रहता था।

  • कम ट्रैफिक वाले इलाके चुने जाते थे
  • ई-रिक्शा के अचानक बंद होने से चालक डर जाते थे
  • इसी मौके का फायदा उठाकर आरोपी “मददगार” बनकर पहुंचते थे
  • थोड़ी देर की “मरम्मत” के बाद पैसे लेकर फरार हो जाते थे

शिकायतों के बाद पुलिस की कार्रवाई

लगातार शिकायतें मिलने के बाद असंगठित ई-रिक्शा चालक-परिचालक संघ ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

इसके बाद:

  • एडिशनल एसपी आलोक शर्मा के निर्देश पर जांच शुरू हुई
  • क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की
  • संदिग्धों की तलाश तेज की गई

18 वर्षीय युवक हिरासत में

जांच के दौरान नीलगंगा थाना पुलिस ने ग्राम नवली निवासी 18 वर्षीय रीतेश भानूपा को हिरासत में लिया है।

पुलिस:

  • आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है
  • उसके मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है
  • यह पता लगाया जा रहा है कि वह अकेला था या कोई गिरोह काम कर रहा था

अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त सबूत मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या सच में ई-रिक्शा ‘हैक’ किया जा सकता है?

पुलिस इस मामले में एक अहम तकनीकी पहलू की भी जांच कर रही है।

जांच बिंदु:

  • क्या मोबाइल ऐप से ई-रिक्शा को सच में बंद किया जा सकता है?
  • क्या वाहन के सिस्टम में कोई तकनीकी कमजोरी है?
  • क्या यह पूरी तरह साइबर फ्रॉड है या तकनीकी छेड़छाड़?

इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

CCTV और डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे हैं

पुलिस ने पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।

  • शहर के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं
  • संदिग्धों की लोकेशन और मूवमेंट ट्रैक की जा रही है
  • डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है
  • संभावित गिरोह की पहचान की कोशिश की जा रही है

पुलिस की चेतावनी और सलाह

पुलिस ने ई-रिक्शा चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

महत्वपूर्ण निर्देश:

  • अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें
  • वाहन खराब होने पर केवल अधिकृत तकनीशियन को बुलाएं
  • किसी भी संदिग्ध मदद के बदले पैसे न दें
  • घटना की फोटो/वीडियो सुरक्षित रखें
  • तुरंत डायल 100/112 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें

निष्कर्ष

उज्जैन का यह मामला सिर्फ एक सामान्य ठगी नहीं बल्कि तकनीक के गलत इस्तेमाल का गंभीर उदाहरण है। यदि जांच में यह साबित होता है कि ऐप या डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग हुआ है, तो यह साइबर और ऑटोमोबाइल सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लेकर जांच तेज कर दी है, और पूरे नेटवर्क के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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