China CMBC Corridor: भारत को बाहर रखकर नया China–Myanmar–Bangladesh Economic Corridor (CMBC) प्लान, जानिए पूरा मामला
प्रस्तावना: एशिया में बदलती भू-राजनीतिक रणनीति
चीन एक बार फिर अपनी पुरानी कनेक्टिविटी रणनीति को नए रूप में सक्रिय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस बार बीजिंग ने China–Myanmar–Bangladesh Economic Corridor (CMBC) को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू की है। खास बात यह है कि इस नए प्रस्तावित कॉरिडोर में भारत को पूरी तरह से बाहर रखा गया है।
यह विकास ऐसे समय में हो रहा है जब एशिया में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से ही तेज है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन लगातार बदल रहा है।
CMBC क्या है और चीन इसका क्या उद्देश्य रखता है?
China–Myanmar–Bangladesh Economic Corridor (CMBC) चीन की एक नई कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसका उद्देश्य चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) तक मजबूत सड़क और समुद्री पहुंच प्रदान करना है।
इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य:
- चीन के युन्नान प्रांत को दक्षिण एशिया से जोड़ना
- बंगाल की खाड़ी तक सीधा व्यापार मार्ग तैयार करना
- समुद्री व्यापार और रणनीतिक पहुंच को मजबूत करना
- दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन का प्रभाव बढ़ाना
इस कॉरिडोर को चीन की व्यापक रणनीति Belt and Road Initiative (BRI) का हिस्सा माना जा रहा है।
बांग्लादेश यात्रा के दौरान हुई बातचीत
इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा उस समय तेज हुई जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री (रिपोर्ट के अनुसार) ने 22 जून से बीजिंग की चार दिवसीय यात्रा की।
इस दौरान:
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हुई
- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा हुई
- CMBC को आगे बढ़ाने पर सहमति जैसा माहौल बना
चीन के अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह परियोजना क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए है।
BCIM कॉरिडोर से CMBC तक का सफर
यह नया कॉरिडोर वास्तव में कोई पूरी तरह नया विचार नहीं है।
पहले चीन ने एक बड़ा प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया था:
BCIM Economic Corridor (बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार कॉरिडोर)
- यह प्रस्ताव 1990 के दशक में सामने आया था
- योजना थी: कुनमिंग → मांडले → ढाका → कोलकाता
- उद्देश्य था क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क बढ़ाना
लेकिन:
- भारत और चीन के बीच तनाव
- सुरक्षा और रणनीतिक चिंताएं
- Belt and Road Initiative (BRI) को लेकर भारत का विरोध
इन कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई और बाद में चीन ने इसे BRI सूची से हटा दिया।
अब CMBC उसी पुराने विचार का एक संशोधित संस्करण माना जा रहा है, जिसमें भारत को शामिल नहीं किया गया है।
CMBC का प्रस्तावित रूट (Route Map)
इस कॉरिडोर का प्रस्तावित मार्ग काफी विस्तृत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
शुरुआत:
- चीन का युन्नान प्रांत (कुनमिंग)
आगे का रास्ता:
- म्यांमार का मांडले
इसके बाद यह कॉरिडोर दो शाखाओं में बंट जाएगा:
पहली शाखा:
- यांगून (Yangon) की ओर
दूसरी शाखा:
- क्यौकफ्यू (Kyaukphyu) गहरे समुद्री बंदरगाह की ओर
इसके बाद प्रस्ताव:
- म्यांमार से बांग्लादेश के चटगांव (Chattogram) और कॉक्स बाजार तक विस्तार
- आगे चलकर चटगांव और मोंगला बंदरगाहों तक सीधी कनेक्टिविटी
इससे चीन को बंगाल की खाड़ी तक सीधा भूमि और समुद्री मार्ग मिल जाएगा।
म्यांमार: सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण क्षेत्र
इस पूरे कॉरिडोर का सबसे कमजोर और अस्थिर हिस्सा म्यांमार है।
स्थिति:
- म्यांमार इस समय गंभीर गृहयुद्ध की स्थिति में है
- कई क्षेत्रों में सैन्य सरकार (Junta) का नियंत्रण कमजोर है
- विद्रोही समूहों और जातीय सशस्त्र संगठनों का प्रभाव बढ़ा है
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार:
- सरकार देश के केवल एक छोटे हिस्से पर नियंत्रण रखती है
- लगभग 40% से अधिक क्षेत्र में संघर्ष या अस्थिरता है
- लगातार लड़ाई के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स रुक जाते हैं
इस कारण किसी भी बड़े कॉरिडोर का निर्माण यहां बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
बांग्लादेश का रुख: अभी फैसला नहीं
बांग्लादेश ने इस परियोजना पर अभी सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है।
विदेश मंत्री के अनुसार:
- यह प्रस्ताव अभी शुरुआती समीक्षा चरण में है
- कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है
- म्यांमार में शांति बहाली को एक प्रमुख शर्त माना जा रहा है
बांग्लादेश का रुख फिलहाल “wait and watch” जैसा माना जा रहा है।
चीन की रणनीति: भारत को बाहर क्यों रखा गया?
विश्लेषकों के अनुसार यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है।
मुख्य कारण:
- भारत-चीन संबंधों में तनाव
- BCIM कॉरिडोर की विफलता
- BRI पर भारत का विरोध
- इंडो-पैसिफिक में चीन का प्रभाव बढ़ाना
इस नए कॉरिडोर के जरिए चीन:
- भारत को bypass करने की कोशिश कर रहा है
- बंगाल की खाड़ी में सीधी पहुंच बनाना चाहता है
- समुद्री व्यापार मार्गों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है
भारत के लिए इसके रणनीतिक मायने
भारत के दृष्टिकोण से यह विकास कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
1. पूर्वी सीमा पर रणनीतिक दबाव
चीन बांग्लादेश और म्यांमार के जरिए भारत के पूर्वी क्षेत्र के करीब पहुंच बना सकता है।
2. समुद्री प्रभाव क्षेत्र पर असर
बंगाल की खाड़ी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र है। चीन की बढ़ती मौजूदगी संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
3. CPEC के बाद पूर्वी मोर्चा
चीन पहले ही पाकिस्तान के जरिए China–Pakistan Economic Corridor (CPEC) से पश्चिमी दिशा में मजबूत पकड़ बना चुका है।
अब CMBC के जरिए:
- पश्चिम में पाकिस्तान
- पूर्व में म्यांमार-बांग्लादेश
दोनों तरफ से भारत के आसपास एक रणनीतिक नेटवर्क बनता दिख रहा है।
क्या यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ पाएगा?
विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना का भविष्य अनिश्चित है।
चुनौतियां:
- म्यांमार में युद्ध जैसी स्थिति
- बुनियादी ढांचे की कमी
- राजनीतिक अस्थिरता
- बांग्लादेश की सावधानीपूर्ण नीति
इन सभी कारणों से यह परियोजना लंबे समय तक केवल प्रस्ताव स्तर पर भी रह सकती है।
निष्कर्ष
China–Myanmar–Bangladesh Economic Corridor (CMBC) एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह परियोजना चीन की उस रणनीति को दिखाती है जिसमें वह भारत को bypass करते हुए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, म्यांमार की अस्थिर स्थिति और बांग्लादेश की सतर्कता इस परियोजना के भविष्य को अनिश्चित बनाती है। भारत के लिए यह विकास रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उसके पूर्वी और समुद्री सुरक्षा क्षेत्र पर संभावित प्रभाव डाल सकता है।
