Simhastha 2028 के लिए सरकार ला रही है नया एक्ट, मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण होगा अपराध, अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में तेजी, नया कानून लाने की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले Simhastha महापर्व की तैयारियों को लेकर व्यापक स्तर पर काम कर रही है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विशाल धार्मिक आयोजन को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और विवादमुक्त बनाने के उद्देश्य से सरकार एक नया सिंहस्थ अधिनियम (एक्ट) लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य मेला क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखना, अवैध निर्माण रोकना और आयोजन से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
सूत्रों के अनुसार नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नए सिंहस्थ एक्ट का मसौदा तैयार कर लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर इसकी समीक्षा भी की जा चुकी है। अब इसे सचिवों की समिति से मंजूरी मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस विधेयक को मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश कर कानून का रूप दिया जाए।
मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण करना होगा दंडनीय अपराध
नए सिंहस्थ एक्ट का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध है। प्रस्तावित कानून के अनुसार सिंहस्थ मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण करना कानूनन अपराध माना जाएगा। यदि कोई व्यक्ति, संस्था या निजी संगठन मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण करता है या अतिक्रमण करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि मेला क्षेत्र का मूल स्वरूप बनाए रखना आवश्यक है ताकि सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो सके। स्थायी निर्माण और अतिक्रमण के कारण भविष्य में आयोजन प्रभावित हो सकता है, इसलिए इस बार कानून को अधिक सख्त बनाया जा रहा है।
अतिक्रमण करने वालों पर दर्ज होगा आपराधिक मामला
प्रस्तावित कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति मेला क्षेत्र में अवैध कब्जा करता है या सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। संबंधित व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का उद्देश्य केवल अवैध कब्जा हटाना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को पूरी तरह रोकना भी है। इसी कारण कानून में दंडात्मक प्रावधानों को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया गया है।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई
नए सिंहस्थ एक्ट की एक विशेषता यह है कि इसमें केवल आम नागरिकों के लिए ही नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी जवाबदेही तय की गई है। यदि किसी क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने में संबंधित अधिकारी लापरवाही बरतते हैं या समय रहते कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इसमें तहसीलदार, राजस्व अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी, पुलिस अधिकारी और अन्य जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकेगा।
यह प्रावधान प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कलेक्टर करेंगे नियमित मॉनिटरिंग
प्रस्तावित कानून के तहत जिला कलेक्टर को निगरानी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कलेक्टर समय-समय पर संबंधित अधिकारियों से मेला क्षेत्र की स्थिति की रिपोर्ट प्राप्त करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं भी अवैध निर्माण या अतिक्रमण न हो।
यदि किसी अधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं की जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
सरकारी सूत्रों के अनुसार नए सिंहस्थ एक्ट का ड्राफ्ट लगभग तैयार है। अगले चरण में वरिष्ठ सचिवों की समिति इसकी समीक्षा करेगी। इसके बाद इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो सरकार इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश कर सकती है। कानून बनने के बाद सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को इसी नए अधिनियम के तहत संचालित किया जाएगा।
वर्तमान कानून की जगह लेगा नया अधिनियम
फिलहाल सिंहस्थ आयोजन के लिए मध्यभारत सिंहस्थ मेला अधिनियम, 1955 लागू है। यह कानून कई दशक पहले बनाया गया था और वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप इसमें कई सीमाएं महसूस की जा रही थीं।
इसी कारण सरकार अब पुराने अधिनियम को हटाकर नया और व्यापक कानून लागू करना चाहती है। नए कानून में आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों, सुरक्षा व्यवस्था, भूमि प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
17 से बढ़कर 50 से अधिक होंगे प्रावधान
वर्तमान अधिनियम में लगभग 17 प्रमुख प्रावधान हैं, जबकि नए सिंहस्थ एक्ट में इनकी संख्या बढ़ाकर 50 से अधिक कर दी गई है।
इन नए प्रावधानों में भूमि प्रबंधन, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, अस्थायी अधिग्रहण, प्रशासनिक अधिकार, दंडात्मक कार्रवाई, अतिक्रमण नियंत्रण और विभिन्न विभागों के समन्वय से जुड़े विस्तृत नियम शामिल किए गए हैं।
इससे सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन के संचालन में अधिक स्पष्टता और प्रभावशीलता आने की संभावना है।
मेला अधिकारी को मिलेंगे व्यापक अधिकार
प्रस्तावित कानून के तहत पहली बार मेला अधिकारी को व्यापक प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे।
मेला अधिकारी सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय, भूमि प्रबंधन, अस्थायी अधिग्रहण और आयोजन से जुड़े विभिन्न कार्यों की निगरानी करेंगे।
सरकार का मानना है कि सभी महत्वपूर्ण अधिकार एक ही अधिकारी के पास होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
प्रदेश सरकार करेगी मेला अधिकारी की नियुक्ति
नए कानून के अनुसार मेला अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। वर्तमान व्यवस्था में उज्जैन संभाग के आयुक्त मेला अधिकारी की भूमिका निभाते हैं, लेकिन नए अधिनियम के तहत सरकार आवश्यकतानुसार किसी सक्षम अधिकारी की नियुक्ति कर सकेगी।
इससे आयोजन की जरूरतों के अनुसार प्रशासनिक ढांचे में लचीलापन आएगा।
अस्थायी भूमि अधिग्रहण रहेगा केवल सिंहस्थ अवधि तक
नए सिंहस्थ एक्ट में भूमि अधिग्रहण को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
यदि सिंहस्थ आयोजन के लिए किसी निजी भूमि का अस्थायी अधिग्रहण किया जाता है तो वह केवल आयोजन अवधि तक ही प्रभावी रहेगा। आयोजन समाप्त होने के बाद संबंधित भूमि को पुनः उसके मूल स्वरूप में संबंधित मालिक को वापस कर दिया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों और भूमि स्वामियों के अधिकारों की रक्षा करना है, साथ ही आयोजन के लिए आवश्यक भूमि भी उपलब्ध कराना है।
3500 से 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा सिंहस्थ आयोजन
सरकारी तैयारियों के अनुसार सिंहस्थ 2028 का आयोजन लगभग 3500 से 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाएगा। इतने विशाल क्षेत्र में लाखों श्रद्धालुओं के ठहरने, स्नान, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, पार्किंग और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।
इतने बड़े आयोजन के सफल संचालन के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था को आवश्यक माना जा रहा है।
दो स्तर पर काम करेंगी समितियां
सिंहस्थ 2028 के सफल आयोजन के लिए सरकार दो स्तरों पर प्रशासनिक समितियों का गठन करेगी।
सेंट्रल कमेटी
सेंट्रल कमेटी की अध्यक्षता संबंधित मंत्री करेंगे। इसमें सिंहस्थ आयोजन से जुड़े प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को सदस्य बनाया जाएगा। सरकार आवश्यकतानुसार समिति की संरचना में बदलाव भी कर सकेगी।
इस समिति का कार्य नीतिगत निर्णय लेना, बजट स्वीकृत करना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और आयोजन की समग्र निगरानी करना होगा।
लोकल कमेटी
दूसरे स्तर पर स्थानीय समिति बनाई जाएगी जिसमें जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली, जल संसाधन और अन्य संबंधित विभागों के लगभग 15 से 20 अधिकारी शामिल होंगे।
सरकार आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों या नामित सदस्यों को भी समिति में शामिल कर सकेगी। यह समिति जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लागू करने और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा होगी प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि नए सिंहस्थ एक्ट का उद्देश्य केवल कानूनी नियंत्रण बढ़ाना नहीं बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। सुव्यवस्थित यातायात, बेहतर सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को नए कानून के माध्यम से अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
इससे सिंहस्थ में आने वाले देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम धार्मिक अनुभव प्राप्त होगा।
पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा विशेष ध्यान
सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए नए कानून में पर्यावरण संरक्षण, नदी तटों की सुरक्षा, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।
सरकार चाहती है कि धार्मिक आयोजन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की ओर महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि नया सिंहस्थ एक्ट केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था है। इसमें तकनीकी निगरानी, विभागीय समन्वय, जवाबदेही और पारदर्शिता को विशेष महत्व दिया गया है।
यदि यह कानून समय पर लागू हो जाता है तो सिंहस्थ 2028 के आयोजन में प्रशासनिक चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की तैयारियां लगातार तेज हो रही हैं। प्रस्तावित नए सिंहस्थ एक्ट में मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण पर रोक, अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही, मेला अधिकारी को व्यापक अधिकार, अस्थायी भूमि अधिग्रहण की स्पष्ट व्यवस्था और दो स्तरीय प्रशासनिक ढांचा जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
पुराने 1955 के कानून की तुलना में यह नया अधिनियम कहीं अधिक व्यापक और आधुनिक होगा। सरकार का उद्देश्य केवल कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना नहीं बल्कि सिंहस्थ जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, पारदर्शी और श्रद्धालु-अनुकूल बनाना है। यदि प्रस्तावित विधेयक मानसून सत्र में पारित हो जाता है, तो सिंहस्थ 2028 का आयोजन इसी नए कानूनी ढांचे के तहत संपन्न कराया जाएगा।
