Indore में GST चोरी के नाम पर ट्रकों की जब्ती पर विवाद, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, विभाग ने कहा– कोई आदेश नहीं दिए गए
Indore मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में GST चोरी के आरोप में दो ट्रकों की जब्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परदेशीपुरा पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर ट्रांसपोर्टर और व्यापारी वर्ग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं राज्य जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसने न तो किसी वाहन की जांच के आदेश दिए थे और न ही पुलिस से किसी तरह की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था।
इस पूरे मामले ने अब प्रशासनिक प्रक्रिया, अधिकार क्षेत्र और जांच के नियमों पर बहस छेड़ दी है।
GST चोरी के आरोप में ट्रकों की जब्ती
जानकारी के अनुसार परदेशीपुरा पुलिस ने बुधवार को एक ट्रांसपोर्टर के गोदाम में खड़े दो ट्रकों को GST चोरी के संदेह में जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान दोनों ट्रक ड्राइवरों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उन्हें थाने ले जाया गया।
बताया जा रहा है कि ट्रक कई घंटों तक थाने में खड़े रहे और ड्राइवरों को भी लगभग 20 से 24 घंटे तक हिरासत में रखा गया। बाद में ट्रांसपोर्टर और व्यापारियों के विरोध के बाद ड्राइवरों को छोड़ दिया गया।
GST विभाग ने पल्ला झाड़ा
इस पूरे मामले पर स्टेट जीएसटी विभाग ने साफ कर दिया है कि इस कार्रवाई से उसका कोई संबंध नहीं है। विभाग के अनुसार न तो किसी प्रकार की जांच का आदेश जारी किया गया था और न ही पुलिस को ऐसी कोई कार्रवाई करने के लिए कहा गया था।
विभाग ने यह भी कहा कि जीएसटी जांच के लिए एक तय एसओपी (Standard Operating Procedure) होती है, जिसका पालन अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में उसका पालन नहीं किया गया।
ट्रांसपोर्टर और व्यापारियों ने उठाए सवाल
पुलिस कार्रवाई के बाद ट्रांसपोर्टर और व्यापारी वर्ग ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि गोदाम में खड़े वाहनों की जांच GST विभाग भी सामान्य रूप से नहीं करता, ऐसे में पुलिस द्वारा सीधे ट्रकों को जब्त करना नियमों के खिलाफ है।
व्यापारियों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से कारोबार प्रभावित होता है और बिना ठोस आधार के वाहन रोकना अनुचित है।
24 घंटे तक थाने में खड़े रहे ट्रक
ट्रांसपोर्टर का आरोप है कि पुलिस ने ट्रकों को लगभग 24 घंटे तक थाने में खड़ा रखा और ड्राइवरों को भी हिरासत में लिया गया। इस दौरान किसी भी सक्षम जीएसटी अधिकारी की मौजूदगी नहीं थी।
व्यापारियों का कहना है कि यदि कोई जांच भी करनी थी, तो वह अधिकृत जीएसटी अधिकारियों की मौजूदगी में होनी चाहिए थी, न कि पुलिस द्वारा अकेले कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
GST नियम और एसओपी का हवाला
स्टेट GST विभाग ने बताया कि अप्रैल में जारी एसओपी के अनुसार किसी भी वाहन को कर चोरी के शक में रोकने के बाद आधे घंटे के भीतर जीएसटी पोर्टल पर उसकी जानकारी दर्ज करना आवश्यक होता है।
इसके अलावा जांच केवल अधिकृत जीएसटी अधिकारी ही कर सकते हैं। पुलिस को इस प्रकार की जांच का अधिकार नहीं दिया गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में कर चोरी पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक की हो, तभी गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की प्रक्रिया लागू होती है।
बिना अनुमति जांच पर रोक
GST विभाग ने पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना पूर्व अनुमति किसी भी वाहन, गोदाम या व्यापारी प्रतिष्ठान की जांच नहीं की जा सकती।
विभाग के अनुसार किसी भी संदिग्ध वाहन या सामग्री की जांच केवल सक्षम अधिकारी की मौजूदगी में ही की जा सकती है। इस मामले में विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे, जिससे कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
वसूली के आरोप भी उठे
कुछ ट्रांसपोर्टरों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस तरह की कार्रवाई का इस्तेमाल दबाव बनाने या वसूली के लिए किया जा रहा है। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
व्यापारियों का कहना है कि बिना जीएसटी विभाग की अनुमति के पुलिस द्वारा सीधे कार्रवाई करना नियमों के खिलाफ है और इससे व्यापारिक माहौल पर असर पड़ रहा है।
कानूनी कार्रवाई की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार GST नियमों के तहत यदि कोई जांच प्रक्रिया एसओपी का पालन किए बिना की गई है, तो पीड़ित पक्ष इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
व्यापारी वर्ग अब इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
जांच पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और GST विभाग के अधिकार क्षेत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पुलिस इसे कर चोरी के संदेह में कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर जीएसटी विभाग ने इससे पूरी तरह दूरी बना ली है।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है और क्या भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं या नहीं।
यह मामला इंदौर में प्रशासनिक समन्वय की कमी और जांच प्रक्रिया के पालन को लेकर एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
