Jhabua में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: अपूर्ण निर्माण कार्यों में राशि दुरुपयोग पर पूर्व सरपंच और सचिव से वसूली आदेश
ग्राम पंचायत जुलवानिया बड़ा में 14वें वित्त आयोग के कार्यों में अनियमितता का मामला
झाबुआ प्रतिनिधि मनीष कुमट
Jhabua जिले की ग्राम पंचायत जुलवानिया बड़ा (जनपद पंचायत थांदला) में 14वें वित्त आयोग योजना के तहत वर्ष 2018-19 में स्वीकृत दो निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितता और शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में जिला पंचायत झाबुआ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेंद्र सिंह चौहान द्वारा पूर्व सरपंच और पूर्व सचिव के विरुद्ध वसूली के आदेश जारी किए गए हैं।
दो निर्माण कार्य लंबे समय से अपूर्ण पाए गए
जनपद पंचायत थांदला द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, ग्राम पंचायत में स्वीकृत दो प्रमुख कार्य—
- रुण्डीपाड़ा से श्मशान घाट तक पुलिया निर्माण
- नाली निर्माण कार्य
आज तक पूर्ण नहीं हो पाए हैं। इन कार्यों के लिए कुल 8 लाख 62 हजार रुपये की राशि आहरित की गई थी, लेकिन कार्य की स्थिति अधूरी रहने के कारण इसे वित्तीय अनियमितता माना गया।
शासकीय राशि का दुरुपयोग और जांच प्रक्रिया
जांच में पाया गया कि संबंधित पूर्व सरपंच और सचिव द्वारा शासकीय धन का गलत तरीके से आहरण किया गया और निर्धारित समय में कार्य पूर्ण नहीं किया गया। इस आधार पर मामला मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 92 के अंतर्गत जांच के लिए जिला पंचायत को भेजा गया।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि निर्माण कार्य कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी अधूरे ही रहे, जिससे शासन को वित्तीय नुकसान की स्थिति बनी।
सुनवाई का अवसर दिया गया, लेकिन अनुपस्थिति दर्ज
प्रशासन द्वारा पूर्व सरपंच श्रीमती मारिया वसुनिया और पूर्व सचिव श्री धनसिंह चरपोटा को नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर दिया गया था। दोनों को 21 मई 2026 को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया, लेकिन वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए और न ही कोई लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद उनके विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई।
वसूली योग्य राशि का निर्धारण
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत थांदला के प्रतिवेदन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि कुल आहरित राशि में से 4 लाख 14 हजार 140 रुपये वसूली योग्य हैं।
निर्माण कार्य पूर्ण कराने और राशि जमा करने के लिए पहले भी कई अवसर दिए गए, लेकिन न तो कार्य पूर्ण किया गया और न ही राशि वापस जमा की गई।
पूर्व सचिव द्वारा आंशिक राशि जमा
प्रकरण में पूर्व सचिव श्री नरेंद्र अमलियार द्वारा अपनी हिस्सेदारी की 45 हजार 128 रुपये राशि जनपद पंचायत थांदला के खाते में जमा कर दी गई, जिसकी पुष्टि भी संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई।
इस भुगतान के बाद उनके खिलाफ शेष कोई वसूली योग्य राशि नहीं पाई गई, जिसके चलते उनका नाम वसूली सूची से हटा दिया गया।
पूर्व सरपंच और सचिव पर संयुक्त जिम्मेदारी तय
जांच के बाद प्रशासन ने पाया कि दोनों—पूर्व सरपंच और पूर्व सचिव—निर्माण कार्यों में लापरवाही और शासकीय धन के दुरुपयोग के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं।
इसके आधार पर दोनों से अलग-अलग राशि की वसूली के आदेश जारी किए गए—
- श्रीमती मारिया वसुनिया (पूर्व सरपंच): 2 लाख 29 हजार 634 रुपये
- श्री धनसिंह चरपोटा (पूर्व सचिव): 1 लाख 84 हजार 506 रुपये
पूर्व सचिव पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई
पूर्व सचिव श्री धनसिंह चरपोटा पर वित्तीय वसूली के अलावा एक अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है। उनके एक वेतनवृद्धि को असंचयी प्रभाव से रोकने का आदेश जारी किया गया है।
यह कार्रवाई कार्य में लापरवाही और शासकीय कर्तव्यों के पालन में गंभीर चूक के आधार पर की गई है।
भू-राजस्व बकाया के रूप में वसूली का प्रावधान
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित राशि समय पर जमा नहीं की जाती है, तो इसे भू-राजस्व बकाया के रूप में वसूला जाएगा।
इसके लिए मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 92(3)(क) और धारा 92(5) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
एक माह के भीतर राशि जमा करने का आदेश
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि सभी वसूली योग्य राशि एक माह के भीतर जनपद पंचायत थांदला कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा की जाए।
यदि निर्धारित समयसीमा में भुगतान नहीं किया गया, तो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 146 एवं 147 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: प्रशासन की सख्ती से बढ़ा जवाबदेही का संदेश
इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अपूर्ण निर्माण कार्यों और शासकीय राशि के दुरुपयोग पर की गई यह सख्त कार्रवाई अन्य पंचायतों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
