Sagar में मासूम की आंखों की रोशनी जाने का मामला: इलाज में लापरवाही के आरोप से हड़कंप
परिचय
पूरा मामला 29 मई 2026 का बताया जा रहा है, जब सागर के बंडा सिविल अस्पताल में बच्चे का इलाज किया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान उचित देखभाल और समय पर सही चिकित्सा नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई।
कुछ समय बाद स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बच्चे की आंखों की रोशनी प्रभावित हो गई। बाद में जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई, तब उसे आगे के इलाज के लिए रेफर किया गया।
इलाज में लापरवाही के आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और फार्मासिस्ट ने इलाज में गंभीर लापरवाही बरती। समय पर सही उपचार न मिलने और स्थिति को गंभीरता से न लेने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ गई।
इस लापरवाही को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी देखने को मिल रही है और लोग अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
जांच समिति पर भी आरोप
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था, लेकिन अब इस समिति पर भी सवाल उठने लगे हैं। बच्चे के पिता का आरोप है कि समिति के सदस्यों ने उन्हें धमकाने की कोशिश की और पुलिस में शिकायत करने से नाराज हो गए।
यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे नहीं बढ़ रही है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आया
भोपाल एम्स (AIIMS Bhopal) के डॉक्टरों द्वारा की गई जांच में बताया गया कि बच्चे की आंखों में संक्रमण (infection) के कारण उसकी रोशनी गई है। इस रिपोर्ट के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है, क्योंकि संक्रमण के समय पर इलाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इलाज में देरी पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना को एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बच्चे को उचित और प्रभावी इलाज नहीं मिल पाया है। परिजनों का कहना है कि लगातार इलाज में देरी और लापरवाही के कारण स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे मामले ने मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पतालों में स्टाफ की जवाबदेही, समय पर इलाज और निगरानी प्रणाली को लेकर कई मुद्दे सामने आए हैं।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
