Indore नगर निगम में बड़ा घोटाला: 350 से अधिक संपत्तियों का फर्जी नामांतरण, रात 10 से सुबह 3 बजे के बीच हुआ पूरा ‘खेल’
Indore मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने संपत्ति रिकॉर्ड प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि नगर निगम के संपत्तिकर रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ करते हुए 350 से अधिक संपत्तियों का फर्जी नामांतरण किया गया। यह पूरा खेल कथित रूप से जनवरी से मार्च 2026 के बीच अंजाम दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा रात के समय, रात 10 बजे से सुबह 3 बजे के बीच, सिस्टम में लॉगिन कर किया गया, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह काम योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।
पारिवारिक विवाद वाली संपत्तियां बनीं निशाना
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन संपत्तियों का फर्जी नामांतरण किया गया, उनमें से अधिकतर मामले पारिवारिक विवाद से जुड़े हुए थे। कई संपत्तियां ऐसे मामलों में थीं जो वर्षों से लंबित चल रही थीं और जिनका निपटारा अदालत या प्रशासनिक स्तर पर नहीं हो पाया था।
इन्हीं कमजोर या विवादित फाइलों को निशाना बनाकर संपत्ति स्वामित्व में बदलाव कर दिया गया, जिससे असली मालिकों को लंबे समय तक इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।
अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग
सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया है कि फर्जी नामांतरण के लिए नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल किया गया।
जांच में पाया गया कि अधिकांश नामांतरण उपायुक्त केशव सगर की आईडी से किए गए हैं, जबकि कुछ मामलों में उपायुक्त प्रदीप जैन की आईडी का भी उपयोग हुआ है। इससे यह आशंका और मजबूत हो जाती है कि इस पूरे घोटाले में तकनीकी सिस्टम की जानकारी रखने वाले किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है।
निगम की कार्यप्रणाली से परिचित व्यक्ति पर शक
Indore फर्जी नामांतरण की प्रक्रिया जिस कुशलता और सावधानी से की गई, उससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह काम किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली से अच्छी तरह परिचित व्यक्ति द्वारा किया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की डिजिटल हेरफेर के लिए सिस्टम की गहरी समझ और आंतरिक पहुंच का होना आवश्यक है।
जनवरी से मार्च 2026 के बीच हुआ फर्जीवाड़ा
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा जनवरी से मार्च 2026 के बीच किया गया। इस दौरान संपत्तिकर खातों में स्वामित्व से जुड़े नामों को बदलकर नए नाम दर्ज कर दिए गए।
इस प्रक्रिया में न केवल रिकॉर्ड में बदलाव किया गया बल्कि कई मामलों में पुराने मालिकों के दस्तावेजों को भी गलत तरीके से अपडेट किया गया।
रात के समय सिस्टम में सेंध
जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि अधिकांश फर्जी नामांतरण रात के समय किए गए।
रात 10 बजे से सुबह 3 बजे के बीच सिस्टम में लॉगिन कर यह पूरा बदलाव किया गया, ताकि दिन के समय होने वाली निगरानी और जांच से बचा जा सके।
इस पैटर्न से यह भी संकेत मिलता है कि आरोपी तकनीकी रूप से सक्षम थे और उन्होंने सिस्टम की निगरानी व्यवस्था को कमजोर समय में निशाना बनाया।
जांच में जुटी पुलिस और निगम प्रशासन
फिलहाल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और नगर निगम प्रशासन दोनों ही जांच में जुट गए हैं। फर्जी नामांतरण की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
संपत्ति रिकॉर्ड की सुरक्षा पर सवाल
इस पूरे मामले ने नगर निगम की डिजिटल संपत्ति प्रबंधन प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सिस्टम की सुरक्षा मजबूत नहीं की गई तो ऐसे फर्जीवाड़े दोबारा भी हो सकते हैं।
निष्कर्ष
Indore नगर निगम में सामने आया यह फर्जी नामांतरण घोटाला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि डिजिटल सिस्टम के दुरुपयोग की गंभीर संभावनाओं की ओर भी इशारा करता है। 350 से अधिक संपत्तियों में हेरफेर और अधिकारियों की आईडी के दुरुपयोग ने इस मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजर जांच के निष्कर्ष और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
