Gold-Silver Price Today on June 25: सोने-चांदी के दामों में तेज गिरावट, रिकॉर्ड स्तर से फिसला बाजार
प्रस्तावना: सर्राफा बाजार में अचानक बड़ा बदलाव
गुरुवार, 25 जून को भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। लगातार कई दिनों से जारी उतार-चढ़ाव के बाद आज बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते दोनों कीमती धातुएं अपने हाल के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की बदलती रणनीति का परिणाम है। सोने-चांदी को आमतौर पर सुरक्षित निवेश (safe haven) माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इनकी मांग में कमी आई है।
Gold की कीमतों में बड़ी गिरावट
आज के कारोबार में सोने की कीमतों में लगभग ₹1450 से ₹1900 तक की गिरावट दर्ज की गई, जो एक ही दिन में काफी बड़ी मानी जा रही है।
24 कैरेट सोना
- ₹1,43,010 से ₹1,44,330 प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार
22 कैरेट सोना
- ₹1,30,997 से ₹1,32,440 प्रति 10 ग्राम के दायरे में
18 कैरेट सोना
- ₹1,07,260 से ₹1,08,390 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर
इस गिरावट के बाद ज्वेलरी बाजार में भी हलचल देखी गई है। शादी-विवाह और निवेश के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहक कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं और कई जगहों पर खरीदारी फिलहाल टलती नजर आई।
चांदी के दाम भी दबाव में
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है।
- प्रति 10 ग्राम चांदी: ₹2450 से ₹2550
- प्रति 100 ग्राम चांदी: ₹24,500 से ₹25,500
- प्रति 1 किलो चांदी: ₹2,45,000 से ₹2,55,000
MCX पर चांदी भी दबाव में कारोबार कर रही है और अपने हाल के उच्च स्तर से नीचे फिसल गई है। औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों में कमजोरी इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों में आई यह तेज गिरावट कई वैश्विक और आर्थिक कारणों का संयुक्त परिणाम है।
1. भू-राजनीतिक तनाव में कमी
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी समझौते के बाद वैश्विक तनाव में कमी आई है। जब वैश्विक जोखिम कम होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर कम रुख करते हैं।
2. फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए साल के अंत तक ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले साधनों में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है।
3. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर
डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के लिए सोना महंगा हो जाता है और मांग घट जाती है।
4. मुनाफावसूली (Profit Booking)
लंबे समय से चल रही तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी है। इससे अचानक बिकवाली बढ़ी और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों पर असर और बाजार की प्रतिक्रिया
इस गिरावट का सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ा है जिन्होंने हाल ही में उच्च स्तर पर सोने और चांदी में निवेश किया था। कई ट्रेडर्स को शॉर्ट टर्म में नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक अवसर भी हो सकती है। उनका कहना है कि सोना और चांदी अभी भी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और वैश्विक अस्थिरता बढ़ने पर इनमें फिर से तेजी आ सकती है।
ज्वेलरी बाजार में हलचल
सर्राफा बाजार में कीमतों में गिरावट के बाद ज्वेलरी दुकानों पर ग्राहकों की रुचि थोड़ी बढ़ी है, लेकिन बड़ी खरीदारी अभी भी सावधानी के साथ की जा रही है। व्यापारी वर्ग भी फिलहाल कीमतों में स्थिरता का इंतजार कर रहा है।
शादी के सीजन को देखते हुए कुछ व्यापारी इसे अस्थायी गिरावट मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
MCX और वैश्विक संकेतों की भूमिका
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आने वाले संकेत सीधे भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
विशेष रूप से अमेरिका, यूरोप और एशिया के आर्थिक डेटा, डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतें सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
आगे की संभावनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगा। यदि भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ता है या अमेरिकी आर्थिक नीतियों में बदलाव आता है, तो सोने-चांदी की कीमतों में दोबारा तेजी देखी जा सकती है।
वहीं, अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
निष्कर्ष
25 जून को सोने और चांदी की कीमतों में आई यह तेज गिरावट वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों के संकेत और निवेशकों की मुनाफावसूली का संयुक्त परिणाम है। हालांकि यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे बाजार का सामान्य उतार-चढ़ाव मानते हैं।
दीर्घकालिक दृष्टि से सोना और चांदी अभी भी मजबूत निवेश विकल्प बने हुए हैं, लेकिन अल्पकालिक अस्थिरता जारी रहने की संभावना है।
