जबलपुर एयरपोर्ट का नाम होगा ‘वीरांगना Rani Durgavati एयरपोर्ट’, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान
भोपाल/जबलपुर, 24 जून 2026। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोंडवाना साम्राज्य की महान वीरांगना Rani Durgavati के सम्मान में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही जबलपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘वीरांगना रानी दुर्गावती एयरपोर्ट’ करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजेगी। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर जबलपुर स्थित उनके समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान की।
मुख्यमंत्री की इस घोषणा को क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल रानी दुर्गावती के शौर्य और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि जबलपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती मिलेगी।
Rani Durgavati के बलिदान को किया याद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की उन महान वीरांगनाओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने राज्य, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन साहस, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका बलिदान केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज भी उनके संघर्ष और शौर्य की गाथाएं लोगों को देश और समाज के प्रति समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी महान विभूतियों को सम्मान देना सरकार की जिम्मेदारी है और इसी सोच के तहत एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है।
जनभावनाओं का सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से यह मांग रही है कि शहर की किसी प्रमुख पहचान को रानी दुर्गावती के नाम से जोड़ा जाए। कई सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने भी समय-समय पर इस विषय को उठाया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभावनाओं का पूरा सम्मान करती है और जनता की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक नायकों और नायिकाओं को उचित सम्मान देकर नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ा जा सकता है।
देश-दुनिया तक पहुंचेगा रानी दुर्गावती का गौरव
मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट किसी भी शहर की पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। जब देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग जबलपुर पहुंचेंगे और एयरपोर्ट का नाम ‘वीरांगना रानी दुर्गावती एयरपोर्ट’ देखेंगे, तो उन्हें इस धरती की गौरवशाली विरासत के बारे में जानने की उत्सुकता होगी।
उन्होंने कहा कि इससे रानी दुर्गावती के योगदान और उनके बलिदान की कहानी अधिक लोगों तक पहुंचेगी। साथ ही मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
केंद्र सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट का नाम बदलने की प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार औपचारिक प्रस्ताव तैयार करेगी। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेजा जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एयरपोर्ट का नाम आधिकारिक रूप से ‘वीरांगना रानी दुर्गावती एयरपोर्ट’ रखा जाएगा।
रानी दुर्गावती के सम्मान में पहले भी लिए गए हैं कई फैसले
डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार पहले भी रानी दुर्गावती के सम्मान में कई महत्वपूर्ण निर्णय ले चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है।
उन्होंने जानकारी दी कि जबलपुर के सबसे बड़े नवनिर्मित फ्लाईओवर का नाम भी रानी दुर्गावती के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा शहर में प्रस्तावित नए चिड़ियाघर का नाम भी उनके नाम से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करना और लोगों में गौरव की भावना विकसित करना है।
जबलपुर और संग्रामपुर में हुई थीं कैबिनेट बैठकें
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार ने इतिहास और विरासत को सम्मान देने की दिशा में कई नई पहल की हैं। इसी क्रम में जबलपुर और संग्रामपुर जैसे ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों पर कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया गया था।
उन्होंने कहा कि इन बैठकों का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कार्य नहीं था, बल्कि उन ऐतिहासिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी था, जिनका संबंध मध्य प्रदेश की गौरवशाली विरासत से रहा है।
क्षेत्रीय अस्मिता को मिलेगा बल
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि एयरपोर्ट का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखने से महाकौशल और गोंडवाना क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।
यह निर्णय आदिवासी समाज और गोंड समुदाय के लिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि रानी durgavati उनके गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक मानी जाती हैं। लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उनकी स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की मांग की जाती रही है।
कौन थीं वीरांगना रानी दुर्गावती?
रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की एक महान योद्धा और गोंडवाना साम्राज्य की शासिका थीं। उनका जन्म वर्ष 1524 में हुआ था। वे अपनी वीरता, प्रशासनिक क्षमता और युद्ध कौशल के लिए जानी जाती थीं।
पति दलपत शाह के निधन के बाद उन्होंने अपने पुत्र वीर नारायण के संरक्षक के रूप में राज्य की बागडोर संभाली। उस समय उन्होंने न केवल राज्य का कुशल संचालन किया, बल्कि अपने शासन को मजबूत और समृद्ध भी बनाया।
जब मुगल साम्राज्य की सेना ने उनके राज्य पर आक्रमण किया, तब उन्होंने हार स्वीकार करने के बजाय युद्ध का मार्ग चुना। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अद्भुत साहस का परिचय दिया और शत्रु सेना का डटकर मुकाबला किया।
बलिदान की अमर गाथा
वर्ष 1564 में मुगल सेनापति आसफ खान के नेतृत्व में हुई लड़ाई के दौरान रानी दुर्गावती गंभीर रूप से घायल हो गईं। किंतु उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय वीरगति को स्वीकार करना उचित समझा।
उनका बलिदान भारतीय इतिहास में स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक माना जाता है। आज भी देशभर में उनकी वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं और उन्हें महिलाओं के सशक्त नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
कार्यक्रम में कई नेता रहे मौजूद
रानी दुर्गावती समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह, संपतिया उइके, पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन साहस, आत्मसम्मान और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम
जबलपुर एयरपोर्ट का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखने की घोषणा को केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत को नई पहचान मिलेगी और देशभर के लोगों को रानी दुर्गावती के महान योगदान के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
सरकार का मानना है कि ऐसे निर्णय समाज में ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करते हैं और युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का कार्य करते हैं। यदि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में जबलपुर एयरपोर्ट एक नई पहचान के साथ देश के विमानन मानचित्र पर दर्ज होगा।
