दिल्ली-लखनऊ अग्निकांड के बाद भोपाल में बड़ा खुलासा: 80% कोचिंग संस्थानों में फायर एग्जिट नहीं,
दिल्ली और लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांडों के बाद भोपाल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत सामने आ गई है। नगर निगम द्वारा शुरू की गई जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर के करीब 80 प्रतिशत कोचिंग संस्थानों में फायर एग्जिट जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं तक मौजूद नहीं हैं। वहीं, प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल Hammidia Hospital में भी वैध फायर NOC नहीं पाई गई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हादसों के बाद जागा प्रशासन, शुरू हुआ निरीक्षण अभियान
दिल्ली और लखनऊ के अग्निकांडों के बाद भोपाल नगर निगम अब हरकत में आया है। पहले चरण में शहर की 25 हाईराइज इमारतों का निरीक्षण किया गया, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार कई भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम या तो खराब पाए गए या फिर नियमों के अनुरूप ही नहीं थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई इमारतों में न तो पर्याप्त निकासी मार्ग हैं और न ही आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की उचित व्यवस्था मौजूद है।
कोचिंग संस्थानों में 80% जगह फायर एग्जिट नहीं
फायर विभाग की टीमों ने एमपी नगर, पिपलानी, न्यू मार्केट, टीटी नगर और बैरागढ़ क्षेत्रों में करीब 30 कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि अधिकांश संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत कोचिंग संस्थानों में डेडिकेटेड फायर एग्जिट नहीं मिले। इसके अलावा लगभग 90 प्रतिशत संस्थानों ने कभी फायर ऑडिट ही नहीं कराया था। कई जगहों पर केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार पाया गया, जो आपात स्थिति में बड़े खतरे का कारण बन सकता है।
फायर उपकरण भी मिले अधूरे और एक्सपायरी
निरीक्षण के दौरान कई कोचिंग सेंटरों में फायर एक्सटिंग्विशर या तो उपलब्ध नहीं थे या फिर उनकी एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी थी। कुछ संस्थानों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं पाई गई, जिससे आग लगने की स्थिति में नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि कई संस्थानों में वेंटिलेशन की भी कमी पाई गई, जिससे किसी भी आपात स्थिति में धुएं के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है।
Hammidia Hospital में भी गंभीर लापरवाही उजागर
जांच में सामने आया कि भोपाल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हमीदिया भी अग्नि सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल के पास वैध फायर NOC नहीं है, जो कि एक गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
इसके अलावा अस्पताल में फायर फाइटिंग उपकरणों की भी कमी पाई गई है। चूंकि यहां प्रतिदिन हजारों मरीज आते हैं और ICU सहित कई संवेदनशील वार्ड हैं, ऐसे में आग लगने की स्थिति में बड़ी जनहानि का खतरा पैदा हो सकता है।
अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
पारस अपार्टमेंट की फायर NOC निरस्त करने की प्रक्रिया
जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर पारस अपार्टमेंट की फायर NOC निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। नगर निगम का कहना है कि जिन भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, लेकिन सुधार नहीं
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में भी प्रशासन ने सेफ्टी ड्राइव चलाकर कई कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई की थी। उस समय बेसमेंट में चल रही कक्षाओं को सील किया गया था।
हालांकि, कुछ संस्थानों ने बाद में भी नियमों का पालन नहीं किया और बेसमेंट का उपयोग लाइब्रेरी या अन्य गतिविधियों के लिए करते रहे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सख्ती के बावजूद स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।
फायर सुरक्षा के नियमों की अनदेखी
जांच में यह भी सामने आया कि कई संस्थान और भवन बुनियादी फायर सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। नियमों के अनुसार प्रत्येक भवन में कार्यशील फायर एक्सटिंग्विशर, स्पष्ट एग्जिट मार्ग, फायर हाइड्रेंट और पर्याप्त जल भंडारण अनिवार्य है।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश जगहों पर इन नियमों की अनदेखी की जा रही है।
प्रशासन की सख्ती के संकेत
नगर निगम और फायर विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगे और सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों और भवनों में खामियां पाई जाएंगी, उन्हें नोटिस देकर सुधार का मौका दिया जाएगा, लेकिन सुधार न होने पर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।
निष्कर्ष: हादसों से नहीं, नियमों के पालन से बचेगी जान
दिल्ली और लखनऊ की घटनाओं के बाद भोपाल में हुई यह जांच यह साबित करती है कि शहर में फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। कोचिंग संस्थान हों या अस्पताल, सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जांच या कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित मॉनिटरिंग और सख्त अनुपालन ही ऐसे संभावित हादसों को रोक सकता है।
