मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि के अवसर पर Indore के ज्ञानशिखर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने मातेश्वरी के मातृत्व प्रेम, नेतृत्व क्षमता और आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला।
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि: 61वीं पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि, Indore में आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया कार्यक्रम
रिपोर्ट: ब्रह्माकुमारी अनीता, ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन,Indore
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि पर Indore में श्रद्धापूर्वक आयोजित हुआ कार्यक्रम
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की 61वीं पुण्यतिथि इंदौर स्थित न्यू पलासिया के ज्ञानशिखर में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। इस विशेष अवसर को “आध्यात्मिक ज्ञान दिवस” के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी बहनों, भाईयों एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।कार्यक्रम में मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के आध्यात्मिक जीवन, उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता तथा मानवता के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
हेमलता दीदी ने बताया मातेश्वरी के व्यक्तित्व का प्रेरणादायक स्वरूप
Indore जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं बल्कि उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का दिन है।उन्होंने बताया कि मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती संस्थान के प्रारंभिक दौर में मात्र 16 वर्ष की आयु में “ओम राधे” के रूप में जुड़ी थीं। उन्होंने परमात्मा द्वारा दिए गए सत्य ज्ञान को गहराई से समझा और उसे अपने जीवन में धारण कर आध्यात्मिक परिवर्तन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
हेमलता दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी ने अपने जीवन में ईश्वर के गुणों और शक्तियों को समाहित कर हजारों आत्माओं का आध्यात्मिक पालन-पोषण किया। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व, करुणा, सेवा और नेतृत्व का अनूठा समन्वय था।
ओम राधे से जगदम्बा सरस्वती बनने तक की प्रेरक यात्रा
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन की प्रेरक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि ओम राधे के नाम से जानी जाने वाली इस महान आत्मा ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने न केवल स्वयं आध्यात्मिक ज्ञान को आत्मसात किया बल्कि लाखों लोगों तक ईश्वरीय संदेश पहुंचाने का कार्य भी किया। उनके समर्पण और सेवाओं के कारण उन्हें “मां जगदम्बा सरस्वती” के नाम से सम्मान मिला।उनके मार्गदर्शन में संस्थान ने महिलाओं के सशक्तिकरण, आध्यात्मिक जागृति और मानव मूल्यों के प्रसार की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
मातृत्व प्रेम और नेतृत्व कला की अद्भुत मिसाल थीं मातेश्वरी
हेमलता दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी के भीतर सभी के प्रति मातृत्व प्रेम अपार था। कोई भी व्यक्ति उनके पास आता तो वह अपनी कमजोरियों और चिंताओं को भूलकर आत्मिक शक्ति का अनुभव करता था।इसी कारण संस्थान के सभी सदस्य उन्हें स्नेहपूर्वक “मम्मा” कहकर संबोधित करते थे।उनकी नेतृत्व क्षमता इतनी प्रभावशाली थी कि उन्होंने हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आज भी उनके विचार और शिक्षाएं लाखों लोगों के जीवन को दिशा प्रदान कर रही हैं।
सोनल सिसोदिया ने कहा – नारी ही नारायणी है
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डेली कॉलेज बिजनेस स्कूल की प्राचार्या श्रीमती सोनल सिसोदिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती ने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि नारी ही नारायणी है।उन्होंने कहा कि मातेश्वरी जी ने अपने साथ-साथ पूरे ईश्वरीय परिवार का भी सदैव ध्यान रखा। उनकी विशेषता यह थी कि वे किसी की कमी बताने से पहले उसकी खूबियों को पहचानती और प्रोत्साहित करती थीं।सोनल सिसोदिया ने कहा कि हमें भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए तथा हर अच्छे कार्य में सहयोग और उत्साह के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
शिक्षाओं का वाचन, भोग और फिल्म प्रदर्शन रहा आकर्षण का केंद्र
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि कार्यक्रम का शुभारंभ उनकी शिक्षाओं के वाचन से किया गया। इसके पश्चात उन्हें भोग अर्पित किया गया।कार्यक्रम के दौरान मातेश्वरी जी के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित एक प्रेरणादायक फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। फिल्म के माध्यम से उपस्थित लोगों ने उनके संघर्ष, समर्पण, सेवा और आध्यात्मिक उपलब्धियों को निकट से जाना।इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने गहरी भावनाओं के साथ उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प भी लिया।
अनेक गणमान्यजनों ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन
कार्यक्रम के अंत में अनेक विशिष्ट अतिथियों एवं संस्थान से जुड़े लोगों ने मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती को श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
- ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी
- ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी
- ब्रह्माकुमारी उषा दीदी
- श्रीमती सोनल सिसोदिया
- पूर्व कुलपति डॉ. मानसिंह परमार
- डॉ. गिरीश टावरी
- डॉ. प्रज्ञा टावरी
- इंदौर जोन के विभिन्न सेवा केंद्रों से प्रशिक्षण हेतु आई ब्रह्माकुमारी बहनें
- संस्थान से जुड़े अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक
सभी ने मातेश्वरी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पुण्यतिथि केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक मूल्यों, सेवा भावना और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का संदेश देने वाला अवसर भी है।उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो प्रेम, करुणा और सेवा पर आधारित हो। मातेश्वरी जी ने अपने जीवन में जिन आदर्शों को अपनाया, वे आज भी समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, आध्यात्मिकता और मानवता की सेवा को समर्पित रहा। इसी कारण आज भी लाखों लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करते हैं।

